मकर संक्रांति : उत्तर से लेकर दक्षिण भारत की फूड सफारी का बनें हिस्सा

Daily news network Posted: 2018-01-13 19:25:48 IST Updated: 2018-01-13 19:25:48 IST
  • भारत को किसानों की भूमि कहा जाता है, जिसका कारण, यहां की कृषि प्रधान संस्कृति। दिन-रात एक कर माटी को सोने में परिवर्तित कर रहे धरतीपुत्र भारत के मूल शिल्पकार माने जाते हैं। सुबह से लेकर शाम तक हमारी थाली में सजने वाले विभिन्न स्वादिष्ट व्यंजनों के चटखारे लेने के दौरान, भले ही हम अन्नदाताओं को याद न

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भारत को किसानों की भूमि कहा जाता है, जिसका कारण, यहां की कृषि प्रधान संस्कृति। दिन-रात एक कर माटी को सोने में परिवर्तित कर रहे धरतीपुत्र भारत के मूल शिल्पकार माने जाते हैं। सुबह से लेकर शाम तक हमारी थाली में सजने वाले विभिन्न स्वादिष्ट व्यंजनों के चटखारे लेने के दौरान, भले ही हम अन्नदाताओं को याद न करते हों, पर हमें ये नहीं भूलना चाहिए, कि ये सब इन्हीं की ही देन है।

14 से 15 जनवरी के बीच भारतीय भूमि नाना प्रकार के व्यंजनों से सजने वाली है, जिसकी तैयारी आज से ही भारत के सभी प्रांतों में शुरू हो चुकी है। उत्तर से लेकर दक्षिण, सभी दिशाएं मौसम की करवट के साथ, भारतीय संस्कृति की सौंधी सुगंध लिए खिल उठने के लिए तैयार हैं।डेली न्यूज़ 360 .कॉम आज लेकर आया है 'मकर संक्रांति' के दिन सतरंगी भारत के अगल-अलग हिस्सों से स्वाद की कौन-कौन सी महक आने वाली है।

विविधता में एकता प्रदर्शित करते भारतीय त्योहारों की असल झलक 'मकर संक्रांति' के माध्यम से देखी जा सकती है। उत्तर भारत के हरियाणा-पंजाब प्रांत में जहां इस पर्व को लोहड़ी के रूप में मनाया जाता है तो वहीं उत्तर प्रदेश में 'दान' व बिहार में इसे 'खिचड़ी' का पर्व कहा जाता है। इस अवसर पर सिख समुदाय तिल से बने 'गजक' व 'रेवड़ियों' को आपस में बांटकर खुशियां मनाते हैं। साथ ही पारंपरिक 'मक्के की रोटी-सरसों का साग' भी बनाया जाता है। उत्तर प्रदेश व बिहार में इस दिन 'काली दाल की खिचड़ी' बनाने की परंपरा है। खिचड़ी के साथ-साथ इस दिन बिहार में दही - चूड़ा, तिलकुट भी खाए जाते हैं।

'मकर संक्रांति' का पर्व मनाने में भारत का पूर्वोतर प्रांत भी किसी मायने में कम नहीं। बंगाल की बात की जाए तो यहां प्रात: स्नान के बाद तिल दान करने की प्रथा है। इस दिन हर घर में स्वादिष्ट 'पीठों' (पारंपरिक व्यंजन) को बनाकर तैयार किया जाता है। दूध, गुड़ व चावल के आटे से बने ये स्वादिष्ट पीठे वाकई लाजवाब होते हैं। साथ ही इस दिन 'खेजुर गुड़' का लुफ्त भी उठाया जाता है। पूर्वोत्तर के अन्य राज्यों में भी मकर संक्रांति का पर्व सांस्कृतिक दृष्टि से काफी मायने रखता है। इस दिन महिलाएं पारंपरिक व्यंजनों के साथ लोक कलाओं में भाग लेती हैं जिनमें पुरूष भी उनका साथ बढ़ चढ़कर देते हैं।

किसानों के त्योहार 'मकर संक्रांति' के धार्मिक, पारंपरिक पहलुओं के बाद इससे जुड़े अन्य पहलुओं को भी जानना आपके लिए जरूरी है। अन्य दृष्टि से ये पर्व तब मनाया जाता है जब सूर्य मकर राशि में प्रवेश करता है। इसी दिन सूर्य धनु राशि के स्थान से हट मकर राशि की ओर बढ़ता है। सूर्य की इसी उत्तरायण गति के कारण इस पर्व को 'उत्तरायणी' भी कहा जाता है।