सुनील देवधर ने माणिक सरकार पर साधा निशाना, कहा- अनुसूचित जातियों की दुश्मन है वामपंथी

Daily news network Posted: 2018-02-15 12:48:46 IST Updated: 2018-02-15 12:48:46 IST
सुनील देवधर ने माणिक सरकार पर साधा निशाना, कहा- अनुसूचित जातियों की दुश्मन है वामपंथी
  • त्रिपुरा में आगामी 18 फरवरी को होने वाला चुनाव महासंग्राम में बदलता दिख रहा है। सत्ता पर काबिज होने के लिए 'लाल' और 'भगवा' के बीच जुबानी जंग भी तेज हो गई है। त्रिपुरा में भाजपा के राज्य प्रभारी सुनील देवधर राज्य में ताबड़ तोड़ रैलियां आैर यात्राएं कर रहे हैं।

अगरतला।

त्रिपुरा में आगामी 18 फरवरी को होने वाला चुनाव महासंग्राम में बदलता दिख रहा है। सत्ता पर काबिज होने के लिए 'लाल' और 'भगवा' के बीच जुबानी जंग भी तेज हो गई है। त्रिपुरा में भाजपा के राज्य प्रभारी सुनील देवधर राज्य में ताबड़ तोड़ रैलियां आैर यात्राएं कर रहे हैं। इसी कड़ी में कल बुधवार को सुनील देवधर ने बधारघाट में एक जनसभा को संबोधित करते हुए माणिक सरकार पर तंज कसा, 'कहा- माणिक सरकार के स्वर्ण युग में आपका स्वागत है, जहां हत्यारे आराम से घूम रहे हैं, महिलाआें के खिलाफ अपराध सबसे ज्यादा है, जहां अपराधियों की सजा दर भी कम हैं, वे लोग मारे जा रहे हैं जिनकी विचारधारा वामपंथियों से अलग है आैर राज्य की एक तिहार्इ आबादी के पास नौकरी नहीं है। '

इसके बाद सुनील देवधर ने काकराबन विधानसभा के सालगढ़ में भी जनसभा  को संबोधित किया आैर वहां पर भी वामपंथियों पर जमकर बरसे कहा त्रिपुरा में 19% नुसूचित जाति हैं लेकिन वामपंथी सरकार उनके विकास के लिए पूरे राज्य के बजट का सिर्फ़ 3% आवंटित करती है। यह सरकार अनुसूचित जाति की दुश्मन है। आपको बता दें कि भाजपा की जीत को पक्की करने के लिहाज से आज पीएम माेदी अगरतला में दो रैलियों को संबोधित करेंगे। त्रिपुरा विधानसभा चुनाव में वामपंथियों के इस गढ़ में सत्ता हासिल करने के लिए पहली बार दक्षिणपंथी बीजेपी सीधे मुकाबले में नजर आ रही है।

25 वर्षों के वाम के सल्तनत में कब्जा करने के लिए बीजेपी ने कमर कस ली है। 'चलो पलटाई' के नारे के साथ बीजेपी अपने धुर विरोधी सीपीएम के साथ चुनावी नारे से लेकर पार्टी के झंडे तक लड़ाई लड़ रही है। राज्य में जहां पर कोर्इ  बीजेपी के निशान से वाकिफ नहीं था आज वहां कमल चमक रहा है। लाल के जगी भगवा ने जगी बना ली है आैर पिछले साढ़े तीन सालों में भाजपा राज्य में मुख्य विपक्षी दल की तरह उभरी हैं आज आलम ये है कि माकपा राज्य में अपने अस्तित्व को बचाने के लिए संघर्ष कर रही है।

बीजेपी ने लेफ्ट मुक्त भारत का नारा दिया है और उसकी नजर आदिवासी वोटों पर है। त्रिपुरा में 30 फीसदी आदिवासी हैं और 60 में से 20 सीटें उनके लिए आरक्षित हैं। राज्य में कुल 19 आदिवासी जातियां हैं। लेफ्ट ने भी पहली बार आदिवासी वोटों के जरिए ही सत्ता का स्वाद चखा था। आदिवासियों को अपने पाले में लाने के लिए बीजेपी कई वादे कर रही है। पीएम मोदी ने भी अपनी रैली में राज्य की माणिक सरकार की जगह बीजेपी सरकार को लाने का आह्वान किया था।