सजा पूरी होने के बावजूद मणिपुर की जेल में कैद है रोहिंग्या मुस्लिम, जानिए क्यों

Daily news network Posted: 2017-09-16 15:02:11 IST Updated: 2017-09-16 15:02:11 IST
सजा पूरी होने के बावजूद मणिपुर की जेल में कैद है रोहिंग्या मुस्लिम, जानिए क्यों
  • मणिपुर की सेंट्रल जेल में म्यांमार के 22 कैदी बंद हैं। इनमें 11 रोहिंग्या मुस्लिम भी है जो राखिने प्रांत के हैं। सभी 22 कैदियों की सजा पूरी हो चुकी है फिर भी ये जेल में बंद हैं।

इंफाल। मणिपुर की सेंट्रल जेल में म्यांमार के 22 कैदी बंद हैं। इनमें 11 रोहिंग्या मुस्लिम भी है जो राखिने प्रांत के हैं। सभी 22 कैदियों की सजा पूरी हो चुकी है फिर भी ये जेल में बंद हैं। सभी को भारत में अवैध रूप से प्रवेश करने के आरोप में जेल भेजा गया था। सभी कैदी कारावास में यंत्रणा भोग रहे हैं क्योंकि म्यांमार की अथॉरिटीज ने इनको वापस लेने से इनकार कर दिया है। इनमें से दस 2012 से जेल में हैं जबकि एक 2014 से। मणिपुर के मुख्यमंत्री एन.बीरेन सिंह ने कहा कि 22-23 लोग जेल में हैं। कई रोहिंग्या समुदाय से हैं। हम इनकी सूची केन्द्र को देंगे । हम उन्हें केन्द्र को सौंप देंगे। केन्द्र सरकार इनको वापस भेजेगी। 


मणिपुर सरकार के सूत्रों का कहना है कि पिछले तीन साल में जब भी उन्हें वापस भेजने की कोशिश की गई तो म्यांमार ने उन्हें अपने नागरिक के रूप में स्वीकार करने से इनकार कर दिया। राज्य में भाजपा के नेतृत्व वाली सरकार ने केन्द्र सरकार से फिर अनुरोध किया है कि वह इंफाल के नजदीक अति सुरक्षित सजिवा जेल में बंद कैदियों को लेकर म्यांमार के साथ संवाद शुरू करे। 


मुख्यमंत्री बीरेन सिंह ने कहा, म्यांमार के कैदियों जिनकी जेल की सजा पूरी हो चुकी है, को वापस उनके देश भेजने के संबंध में हम केन्द्र सरकार खासतौर पर विदेश मंत्रालय से कंसल्ट करेंगे। राज्य सरकार विदेश मंत्रालय के निर्देशों के मुताबिक कार्रवाई करेगी। उनके मौजूदा स्टेटस को लेकर सरकारी दस्तावेज जिसे मणिपुर सरकार ने हाल ही में केन्द्र के साथ साझा किया था,के मुताबिक इनका जेल टर्म पूरा हो चुका है। दस्तावेज में उनके एड्रेस का भी जिक्र है। 


दस्तावेज के मुताबिक ये राखिने प्रांत के रहने वाले हैं। आपको बता दें कि भारत में करीब 40 हजार रोहिंग्या मुस्लिम रह रहे हैं। मोदी सरकार स्पष्ट कर चुकी है कि सभी की पहचान कर इन्हें वापस उनके देश भेजा जाएगा लेकिन कई हैरान है कि क्या यह तब भी संभव है जब म्यांमार इन्हें अपने नागरिक के रूप में स्वीकार ही नहीं करता। डीपोर्टेशन के लिए जरूरी है कि होस्ट कंट्री उस व्यक्ति की नागरिकता की पुष्टी करे जिसे वापस भेजना है। सरकार खुद कह चुकी है कि उनके साथ क्या किया जाना है इस पर चर्चा चल रही है। 


आपको बता दें कि मणिपुर की 398 किलोमीटर लंबी सीमा म्यांमार से लगती है। रोहिंग्या मुस्लिमों के राज्य में घुसपैठ की आशंका के चलते मणिपुर सरकार ने रेड अलर्ट जारी किया है। मुख्यमंत्री बीरेन सिंह ने दावा किया है कि इस साल राज्य में एक भी रोहिंग्या मुस्लिम गिरफ्तार नहीं हुआ है।