मेघालय: विरोध के लिए सड़कों पर उतरे बैंक कर्मचारी, नोटबंदी पर उठाए सवाल

Daily news network Posted: 2017-05-17 12:05:55 IST Updated: 2017-05-17 12:05:55 IST
मेघालय: विरोध के लिए सड़कों पर उतरे बैंक कर्मचारी, नोटबंदी पर उठाए सवाल
  • यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस के बैनर तले बैंकिंग बिरादरी के सदस्यों ने मंगलवार को सेंट्रलाइज्ड ज्वाइंट डिमोंस्ट्रेशन किया

शिलॉन्ग।

यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस के बैनर तले बैंकिंग बिरादरी के सदस्यों ने मंगलवार को सेंट्रलाइज्ड ज्वाइंट डिमोंस्ट्रेशन किया। यह प्रदर्शन आरबीआई की ओर से बैंकों के री-प्राइवेटाइजेशन के संबंध में दिए गए बयान के विरोध में किया गया। आरबीआई के डिप्टी गर्वनर विरल आचार्य ने टिप्पणी की थी कि कुछ राष्ट्रीय बैंकों को री-प्राइवेटाइज किया जाएगा। 



यूएफबीयू के संयोजक बिमान बी भट्टाचार्य ने कहा कि सरकार निजीकरण के लिए दबाव बना रही है और हम अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ रहे हैं। यह दुख की बात है कि आरबीआई के गर्वनर ने राष्ट्रीय बैंकों के खिलाफ सार्वजनिक बयान दिया। वे पहले डी-नेशनलाइज फिर प्राइवेटाइज करना चाहते हैं। हाल ही में मुंबई में हुए कार्यक्रम में आरबीआई के डिप्टी गर्वनर ने कहा था कि अब वक्त आ गया है जब पब्लिक सेक्टर बैंकों को री-प्राइवेटाइज किया जाए। विनिवेश,मर्जर और वीआरएस के जरिए स्टाफ में कमी कम एनपीए के मसले का समाधान किया जा सकता है। 




भट्टाचार्य ने कहा कि आरबीआई बैंकों का रेगुलेटर है। वह बैंकों को मजबूत करने और ऋण की वसूली के संबंध में सुझाव देने की बजाय निजीकरण की वकालत कर रहा है। यह नाजायज और चिढ़ाने वाला बयान है। हम इसकी निंदा करते हैं। 1969 से 2014 के बीच कई बैंकों का निजीकरण किया गया। इनमें से 20 बैंक तबाह हो गए। एनडीए सरकार के नोटबंदी के कदम की आलोचना करते हुए भट्टाचार्य ने कहा कि बाहर जमा किया गया काला धन कहां है। सरकार ने आश्वासन दिया था कि नोटबंदी के बाद ये वापस आ जाएगा। सरकार के नोटबंदी के कदम से कुछ नहीं बदला। इससे सिर्फ छोटे उद्योग और मध्यवर्ग को दंडित किया गया। 




सेंट्रलाइज्ड ज्वाइंट डिमोंस्ट्रेशन में शामिल हुए एक अन्य बैंकर डेविस लिंगदोह ने कहा कि राष्ट्रीय बैंकों का निजीकरण सभी लोगों के लिए हानिकारक है चाहे वह सर्विस सेक्टर में हो,मध्य वर्ग हो या फिर लॉअर मिडल क्लास हो। इससे सिर्फ कॉर्पोरेट को फायदा होगा। इससे बेरोजगारी बढ़ जाएगा। लिंगदोह ने कहा कि प्राइवेट सेक्टर के बैंकों के योगदान को सरकार स्वीकार नहीं कर रही है। साथ ही आम आदमी के लिए हानिकारक एंटी लेबर रिफॉर्म लागू किए जा रहे हैं।