मेघायल में 23 साल से रहस्य बनी हुई है ये गुत्थी,आपका दिमाग भी चकरा जाएगा

Daily news network Posted: 2017-05-16 16:29:37 IST Updated: 2017-05-16 16:29:37 IST
मेघायल में 23 साल से रहस्य बनी हुई है ये गुत्थी,आपका दिमाग भी चकरा जाएगा
  • 23 साल पहले एक शख्स को हत्या के आरोपी के रूप में पेश किया गया। बाद में वह गायब हो गया। उस शख्स का नाम है रुसिथ संगमा।

शिलॉन्ग।

मेघालय में एक केस 23 साल से रहस्य बना हुआ है। अब इस रहस्य से पर्दा उठ सकता है। हाईकोर्ट एक जनहित याचिका पर सुनवाई करेगी। 23 साल पहले एक शख्स को हत्या के आरोपी के रूप में पेश किया गया। बाद में वह गायब हो गया। उस शख्स का नाम है रुसिथ संगमा। 



संगमा को हत्या के संदिग्ध दीपचरण कईपेंग बताकर पेश किया गया था। दीपचरण 1994 में जेल से गायब हो गया। वह न तो जिंदा मिला और न मृत। इस बात का भी कोई सबूत नहीं है कि वह जेल से भाग गया था। सीबीआई ने सालों बाद मामले की जांच की। सीबीआई ने खुलासा किया कि शिलॉन्ग जेल ने रूसिथ संगमा को दीपचरण बताकर पेश किया था। अब हाईकोर्ट जनहित याचिका पर सुनवाई करेगी,जिससे 23 साल पुराने रहस्य से पर्दा उठेगा। 



संगमा को 1980 के दशक में पुलिस ने उठाया था। वह जब गलियों में घूम रहा था तब पुलिस उसे उठाकर ले गई। संगमा को पत्नी,बेटी और रिश्तेदारों ने बंधक बनाकर रखा था। पुलिस ने संगमा को 1912 के इंडियन लूनसी एक्ट के तहत नॉन क्रिमिनल लूनटिक बताया। 1912 के कानून को निरस्त कर 1987 में मेंटल हेल्थ एक्ट लाया गया। संगमा की देखरेख के लिए दिए गए मुआवजे का परिवार ने कथित रूप से गलत ढंग से उपयोग किया। शिलॉन्ग के वकील एसपी महंता ने कहा,हमें इस बात का पता चलेगा कि संगमा के साथ क्या हुआ था और वह कहां है। यह केस दीपचरण के मामले पर भी प्रकाश डालेगा। दीपचरण ने अपने साथी डोलिलियन कईपेंग की 1992 में हत्या कर दी थी। दोनों त्रिपुरा के अमरपुर सबडिविजन के तेडु गांव के रहने वाले थे। दोनों शिलॉन्ग की सेंट एंथनी कालेज के छात्र रह चुके हैं। 



2001 में दीपचरण को कोर्ट में पेश करना था तब तक जेल स्टाफ ने दीपचरण को गायब रखा। जब जेल स्टाफ ने संगमा को दीपचरण बताकर पेश किया तो कोर्ट ने जेल वार्डर्स को कड़ी फटकार लगाई। कोर्ट ने सरकार को आदेश दिया है कि वह संगमा को हर महीने 2500 रुपए मुआवजे के रूप में दे। 2001 में महंता ने संगमा का केस हाथ में लिया। महंता ने उस साल संगमा को जेल से बाहर निकालने में मदद दी। संगमा को उसके भाई थॉमस को सौंप दिया गया। थॉमस अपने भाई को लेकर मेघायल के दक्षिण गारो हिल्स जिले के गुलपानी गांव ले गया।


 


एक साल बाद सीबीआई ने 10 जेल अधिकारियों को संगमा को दीपचरण बताकर पेश करने का दोषी पाया। उन्हें सिर्फ एक साल के लिए निलंबन की सजा मिली। 2005 में विभाग ने संगमा को दिए जाने वाले मासिक मुआवजे को रोक दिया क्योंकि गुवाहाटी हाईकोर्ट ने 2 लाख रुपए का मुआवजा देने का आदेश दिया था। संगमा के घरवालों को निर्देश दिया गया कि वे इस राशि को संगमा के कल्याण के लिए उसके नाम से बैंक में खाता खोलकर जमा करवाएं। पिछले साल 10 नंबर को उन्होंने बताया कि संगमा तो जनवरी 2006 से गायब है। दक्षिण गारो हिल्स जिले की पुलिस ने उन्हें मिसिंग की शिकायत दर्ज कराने को कहा। जिले के एसपी आनंद मिश्रा ने कहा कि हमने जांच की लेकिन संगमा अभी तक नहीं मिला है।