मिरिक फूलों से महक रहा है पूर्वोत्तर, खेती को मिला पहला पुरस्कार

Daily news network Posted: 2017-11-13 15:24:47 IST Updated: 2017-11-13 15:24:47 IST
मिरिक फूलों से महक रहा है पूर्वोत्तर, खेती को मिला पहला पुरस्कार
  • देश के पूर्वोत्तर में मिलने वाले मिरिक के फूलों का डंका पूरे भारत में बज रहा है। उत्तर पूर्व के राज्यों के अलावा बंगाल में मिरिक में इन फूलों की ज्यादा और उत्कृष्ट खेती के चलते इस प्रजाति को प्रथम पुरस्कार मिला है।

देश के पूर्वोत्तर में मिलने वाले मिरिक के फूलों का डंका पूरे भारत में बज रहा है। उत्तर पूर्व के राज्यों के अलावा बंगाल में मिरिक में इन फूलों की ज्यादा और उत्कृष्ट खेती के चलते इस प्रजाति को प्रथम पुरस्कार मिला है।


उत्तर पूर्वी भारत में सबसे ज्यादा खपत होने वाले फूलों के अलावा मिरिक में खास तौर पर उत्पादित सिंबीडियम आर्किड फूलों की पूरे देश में चर्चा हो रही है। क्षेत्र के सौरेनी पानी गोलाई,डिपू,निगाले जैसे ठंडे स्थानों में इस पुष्प की पचास से अधिक प्रजातियां पैदा की जाती हैं।


इन फूलों की खेती में यहां के छोटे छोटे किसानों ने भी बढ़ती मांग को देखते हुए फूल की खेती को मुख्य फसल के रूप में स्थान दिया है। किसानों के अनुसार इस फूल की खेती में कम समय और झंझट के साथ ही मुनाफा ज्यादा है।


किसानों के इतर शहर के लोगों ने अपने घरों में भी इन फूलों की खेती की जा रही है। शहर की महिलाएं इन फूलों का प्रयोग अपने घर को सजाने के लिए विशेष तौर पर प्रयोग किया जाता है। मिरिक के सत्तर फीसदी घरों को इन पुष्पों और फलों से सजाया जाता है।


इन फूलों की नागालैंड और मिजोरम जैसे राज्यों में भी अच्छी खपत होती है। फूल के किसानों का कहना है कि पुष्प उत्पादन में उन्हे यदि राज्य सरकार की ओर से कोई प्रोत्साहन नहीं भी मिलता है तो भी अन्य राज्यों में ज्यादा खपत होने के चलते अच्छी कमाई हो जाती है।