मोदी सरकार आपको भी दे सकती है 5 लाख रुपए,करना होगा ये काम

Daily news network Posted: 2017-03-16 13:30:41 IST Updated: 2017-06-23 12:20:14 IST
मोदी सरकार आपको भी दे सकती है 5 लाख रुपए,करना होगा ये काम
  • गायों को कृत्रिम वीर्यरोपण के दायरे में नहीं लाया गया। पशुधन और मत्स्य विभाग के सचिव देवेन्द्र चौधरी ने बताया कि अब ऊंची उत्पादकता वाले 500 सांडों को चुनने पर काम शुरू करने की योजना है।

नई दिल्ली।

देसी गायों की बेहतरीन नस्ल रखने वाले किसानों और गौ शालाओं को अब 5 लाख कैश के पुरस्कार से नावाज जाएगा। नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार दूध के उत्पादन के लिए गायों की देसी नस्ल पर फोकस कर रही है। केन्द्र सरकार ने सभी राज्यों से कहा है कि वे इस सिलसिले में 31 मार्च तक किसानों,गौशालाओं और प्रजनन सोसायटी के नॉमिनेशन भेजें।


नवंबर में नेशनल मिल्क डे के मौके पर 5 लाख,3 लाख और 1 लाख रुपए के कुल 30 पुरस्कार दिए जाएंगे। सरकार का कहना है कि पिछली सरकार ने देसी गायों की नस्ल की पहचान कर उनके संरक्षण से जुड़े अभियान पर निवेश नहीं किया। ऐसे में 74 फीसदी देसी गायों को कृत्रिम वीर्यरोपण के दायरे में नहीं लाया गया। पशुधन और मत्स्य विभाग के सचिव देवेन्द्र चौधरी ने बताया कि अब ऊंची उत्पादकता वाले 500 सांडों को चुनने पर काम शुरू करने की योजना है। चौधरी ने बताया कि अडवांस री-प्रॉडक्शन तकनीक से 7 हजार बेहतरीन गायों को तैयार किया जाएगा जिससे हर साल 50 लाख देसी गायों को अपग्रेड करने में मदद मिलेगी।


केन्द्र सरकार इस बारे में संदेश फैलाने के लिए नेशनल इंफॉर्मेटिक्स सेंटर के जरिए देशभर के 1  लाख अधिकारियों को एसएमएस भेजना शुरू करेगी। सरकार का लक्ष्य पंजाब के सहिवाल,राजस्थान के राठी और गुजरात के गिर जैसी देसी नस्लों पर फोकस करना है। गायों की कुछ अन्य देसी नस्लें भी विलुप्त होने के कगार पर है। केन्द्र सरकार बेहतरीन देसी नस्ल की गायों को पालने वाले किसानों,ट्रस्टों,गौशालाओं और गैर सरकारी संगठनों को बढ़ावा देने के लिए गोपाल रत्न और कामधेनु कैश अवॉर्ड देगी।


सरकार का मानना है कि भारत के जलवायु के लिहाज से देसी गायें ज्यादा अनुकूल हैं और ये यहां के हालात में संकर नस्ल वाली गायों के मुकाबले ज्यादा बेहतर तरीके से एडजस्ट कर सकती है। अधिकारियों ने बताया कि अमरीका,ब्राजील और ऑस्ट्रेलिया ने भारत की देसी गायों का इंपोर्ट किया है जबकि यहां की पिछली सरकारों ने देसी गायों को नजरअंदाज किया। भारत में पहचान की गई 40 देसी नस्लों के अलावा कई ऐसी नस्लें हैं जो कृत्रिम वीर्यरोपण के दायरे से पूरी तरह बाहर है। चौधरी ने बताया कि हमारी योजना हर साल इस तरह की नस्ल के 1 करोड़ उन्नत जानवरों को पैदा करने के लिए 2 हजार सांडों का चुनाव करने की है। इससे बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है।