मणिपुर में कांग्रेस को तगड़ा झटका, 8 ने छोड़ी पार्टी, रह गए 20 विधायक

Daily news network Posted: 2017-07-17 16:21:49 IST Updated: 2017-07-17 16:21:49 IST
मणिपुर में कांग्रेस को तगड़ा झटका, 8 ने छोड़ी पार्टी, रह गए 20 विधायक
  • कांग्रेस के विधायकों का पार्टी छोड़कर भाजपा में जाने का सिलसिला जारी है।

इंफाल।

मणिपुर में मार्च में विधानसभा चुनाव हुए थे। 28 सीटों के साथ कांग्रेस सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी थी। भाजपा को 21 सीटें मिली थी। वह दूसरे स्थान पर रही। इसके बावजूद भाजपा ने क्षेत्रीय दलों से गठबंधन कर सरकार बना ली। सबसे बड़ी पार्टी होने के बावजूद कांग्रेस सरकार नहीं बना पाई। इसे लेकर कांग्रेस ने राज्यपाल नजमा हेपतुल्ला पर केन्द्र के इशारे पर काम करने का आरोप लगाया था।


ओकराम इबोबी सिंह के नेतृत्व में कांग्रेस ने मणिपुर में लगातार 15 साल तक शासन किया। भाजपा मणिपुर में कांग्रेस को समाप्त करने के अपने अभियान में लगातार आगे बढ़ रही है। जब से प्रदेश में भाजपा के नेतृत्व

वाली गठबंधन सरकार बनी है तब से कांग्रेस के विधायकों का पार्टी छोड़कर भाजपा में जाने का सिलसिला जारी है। कांग्रेस के 8 विधायक पार्टी छोड़कर भाजपा में शामिल हो चुके हैं। राज्य में कांग्रेस के अब 20 विधायक रह गए हैं।


शनिवार को ही कांग्रेस के दो और विधायक भाजपा में शामिल हो गए। ये हैं थोबुल जिले की वांगजिंग तेंथा विधानसभा सीट से विधायक पी.ब्रोजेन और इंफाल पूर्व की लामलाई विधानसभा सीट से चुन कर आए विधायक बीरेन सिंह। दोनों का भाजपा मुख्यालय में शनिवार को जोरदार स्वागत किया गया। कांग्रेस का एक और विधायक शनिवार को ही भाजपा में शामिल होने वाला था लेकिन आखिरी मिनट में उनका मन बदल गया। शनिवार को ही कांग्रेस की मीडिया सेल के चेयरमैन एल.मोमो भी भाजपा में शालिम हो गए थे।



मुख्यमंत्री बीरेन सिंह ने दोनों विधायकों का स्वागत करते हुए कहा कि कांग्रेस के विधायकों ने इसलिए भाजपा ज्वाइन की क्योंकि उनका भाजपा के नेतृत्व वाली सरकार में विश्वास है। लोगों का मौजूदा सरकार में भरोसा है। नगा पीपुल्स फ्रंट और नेशनल पीपुल्स पार्टी भाजपा के सहयोगी दल हैं। इस तरह की संभावना है कि नगाओं के मसले पर एनपीएफ सरकार से समर्थन वापस ले सकती है।



एनपीपी के चारों विधायकों को मंत्री बनाए जाने को लेकर भाजपा विधायक दल में भी घड़घड़ाहट है। भाजपा की कोशिश है कि अगर एनपीएफ सरकार से समर्थन वापस ले लेती है तो भी उसके पास उतने विधायक हो जिससे सरकार चलती रहे। इस तरह की भी संभावना है कि अगर एनपीपी के कुछ मंत्रियों को हटाया जाता है तो पार्टी बगावत कर सकती है। भाजपा विधायकों की मांग है कि एनपीएफ के कुछ मंत्रियों को हटाया जाए। हालांकि कांग्रेस भी भाजपा पर आक्रमण के दौरान मूकदर्शक नहीं बने हुए है।