नगालैंड का खाना आपके छुड़ा देगा पसीना!, जानिए क्या है वजह

Daily news network Posted: 2017-12-06 15:53:31 IST Updated: 2017-12-06 15:53:31 IST
नगालैंड का खाना आपके छुड़ा देगा पसीना!, जानिए क्या है वजह
  • नागालैंड के लोग धरती पर मौजूद हर उस चीज को खाते हैं जिसमें प्राण हैं। वो कीट पतंगों और कीड़े मकौड़ों तक को नहीं छोड़ते। लेकिन जिस चीज को वो मजे से खाते हैं वो हैं जंगली जानवर। वह स्वभाव से ही लड़ाके होते हैं।

नागालैंड के लोग धरती पर मौजूद हर उस चीज को खाते हैं जिसमें प्राण हैं। वो कीट पतंगों और कीड़े मकौड़ों तक को नहीं छोड़ते। लेकिन जिस चीज को वो मजे से खाते हैं वो हैं जंगली जानवर। वह स्वभाव से ही लड़ाके होते हैं। शिकार करना उन्हें बेहद पसंद है और जंगली जानवरों का मांस उनकी खुशी में चार चांद लगा देता है लेकिन दिल्ली और उत्तर भारत के चिकन प्रेमियों को शायद इसे देखकर उल्टी आ जाए।



चावल नागाओं का प्रमुख भोजन होता है, जिसे वह मीट के साथ खाते हैं। ये मीट मुख्यतः पोर्क, बीफ या चिकन का होता है। लेकिन ये सांप, घोंगे, चूहे, गिलहरी, कुत्ते, बिल्ली, मिथुन (बैल जैसी दिखने वाली एक पशु की प्रजाति), भैंसे, हिरन, मकड़ी, चिड़िया, केंकड़ा, बंदर, मधुमक्खी का लार्वा, झींगा, लाल चींटियां भी बड़े चाव से खाते हैं। यूं कहें कि वो हर चीज जिसके बारे में उत्तर भारत में रहने वाला मांसाहारी शख्स सोच भी नहीं सकता, उस हर जंगली जानवर को नागा खाते हैं। आपको जानकर हैरानी होगी कि वे हाथी भी खाते हैं। वे पशु के शरीर के कोई भी अंग बर्बाद नहीं करते हैं। खून, खाल और आंते भी वे खा जाते हैं। खास मौकों पर वे पशुओं की खाल के वस्त्र बनाकर पहन लेते हैं।



नगालैंड में नगाओं की 16 जनजातियां और उप जातियां ऐसी हैं जिनकी पहचान कर ली गई है। इनकी अच्छी खासी आबादी अरुणाचल प्रदेश, असम, मणिपुर और पूर्वी म्यांमार में भी है। जानवरों को मारकर पकाने में ही नहीं बल्कि उन्हें पकाने के तरीके में भी नगा पूर्वोत्तर की बाकी जनजातियों से भिन्न हैं। वह मीट से उठने वाले धुएं को सूंघते हैं और एक विशेष पद्दति का इस्तेमाल कर उसे खुशबूदार बनाते हैं। कुछ मीट पर अनीषी लगाते हैं, जो शकरकंद की पत्तियों से बना होता है।