चीनी सेना ने बदली रणनीति,भारत के लिए लिए खतरे की घंटी

Daily news network Posted: 2018-01-08 16:19:36 IST Updated: 2018-01-08 16:19:36 IST
चीनी सेना ने बदली रणनीति,भारत के लिए लिए खतरे की घंटी
  • चीन अपनी बेजा हरकतों से बाज नहीं आ रहा है। एक मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक चीन की सेना वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी)पर स्थायी ढांचे बनाने की कोशिश कर रही है

नई दिल्ली।

चीन अपनी बेजा हरकतों से बाज नहीं आ रहा है। एक मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक चीन की सेना वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी)पर स्थायी ढांचे बनाने की कोशिश कर रही है। पहले चीनी सेना एलएसी के नजदीक अस्थायी ढांचे बनाती थी या भारत की ओर से बनाए गए अस्थायी ढांचों को नष्ट करती थी लेकिन अब भारत के साथ 4,057 किलोमीटर लंबी एलएसी पर चीनी सेना के अतिक्रमण के तरीकों में एक बड़ा बदलाव दिख रहा है।


मीडिया रिपोर्ट में जानकारों के हवाले से बताया गया है कि चीन का लक्ष्य एलएसी पर मौजूदा स्थिति में बदलाव करना है और इसी वजह से उसकी सेना भारतीय क्षेत्र के अंदर प्रवेश करने की कोशिश कर रही है। इससे चीन बाद में भारत के साथ सीमा को लेकर बातचीत में अपने पक्ष मजबूत कर सकता है। जानकारों का कहना है कि अरुणाचल प्रदेश में हाल ही में चीनी सेना के एक बुलडोजर के प्रवेश करने से यह संकेत मिलता है। यह घटना पिछले साल डोकलाम विवाद के जैसी है।


अरुणाचल प्रदेश की हाल की घटना चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग के कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ चाइना का दोबारा महासचिव चुने जाने के बाद इस तरह का पहला विवाद है। चीनी सेना ने इस अतिक्रमण की कोशिश ऐसे समय की थी जब उसके स्टेट काउंसलर यांग जिएची सीमा के मसले पर विशेष प्रतिनिधि स्तर की बातचीत के 20 वें दौर के लिए दिल्ली में थे। चीन के मामलों के विशेषज्ञ श्रीकांत कोंडापल्ली ने कहा, डोकलाम और अरुणाचल प्रदेश दोनों घटनाओं में चीन ने अपनी सीमा के बाहर जमीन पर कब्जा करने की कोशिश की और चीन को क्षेत्र या विपक्षी देश से फर्क नहीं पड़ता।


भारत और चीन के बीच सीमा विवाद के केन्द्र में अरुणाचल प्रदेश(90 हजार स्क्वेयर किलोमीटर) का मुद्दा है। अरुणाचल प्रदेश को चीन दक्षिण तिब्बत कहता है। चीन की मांग है कि अगर पूरा अरुणाचल प्रदेश नहीं तो कम से कम तवांग का क्षेत्र उसे स्थानांतरिक कर दिया जाए। चीन ने तवांग को स्थानांतरिक किए बिना सीमा विवाद के निपटारे की संभावना से इनकार किया है लेकिन भारत यह स्पष्ट कर चुका है कि अरुणाचल प्रदेश को लेकर कोई समझौता नहीं किया जाएगा।


भारतीय अधिकारियों का कहना है कि तवांग पर भी कोई समझौता नहीं होगा। उन्होंने बताया कि चीन को कई बार यह स्पष्ट किया जा चुका है कि अरुणाचल प्रदेश का पूरा राज्य भारत का अहम हिस्सा है। चीन की दलील है कि छठे दलाई लामा सांगयांग ग्यात्सो का जन्म तवांग में होने के कारण यह क्षेत्र तिब्बती लोगों के दिलों और धार्मिक भावनाओं से जुड़ा है और भारत को इस क्षेत्र पर अपना दावा छोड़ देना चाहिए। मौजूदा दलाई लामा 1950 के दशक के अंत में तवांग के रास्ते भारत आए थे।