कानूनी उम्र से पहले शादी करने वालों को असम में नहीं मिलेगी सरकारी नौकरी

Daily news network Posted: 2017-09-16 17:23:56 IST Updated: 2017-09-16 17:23:56 IST
कानूनी उम्र से पहले शादी करने वालों को असम में नहीं मिलेगी सरकारी नौकरी
  • असम में शादी की कानूनी उम्र का उल्लंघन करने वाले असम सरकार की नौकरियों के लिए पात्र नहीं होंगे...

गुवाहाटी। असम में शादी की कानूनी उम्र का उल्लंघन करने वाले असम सरकार की नौकरियों के लिए पात्र नहीं होंगे। शुक्रवार को विधानसभा में पेश असम की जनसंख्या एवं महिला सशक्तिकरण नीति में यह प्रावधान है। सरकार में भागीदारी के लिए पॉलिसी कहती है कि पुरुष और महिला दोनों जो शादी की कानूनी उम्र का उल्लंघन करते हैं वे न तो किसी रोजगार के लिए पात्र होंगे और न ही सरकार की रोजगार सृजन नीतियों के योग्य होंगे। जिन उम्मीदवारों के दो बच्चे होंगे वे ही सरकार में रोजगार के लिए पात्र होंगे। 


पॉलिसी कहती है कि समाज के सामने रोल मॉडल्स पेश करने के लिए सरकारी कर्मचारियों को दो बच्चों के परिवार के नियम का कड़ाई से पालन करना होगा। सदन में पॉलिसी को पेश करते हुए वित्त मंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने कहा कि पॉलिसी सुरक्षित मातृत्व, लैंगिक समानता, हेल्थ केयर, नि:शक्तजनों और बुजुर्गों के लिए कल्याणकारी सेवाएं, प्रजनन संबंधी हेल्थ इश्यूज और जनसंख्या को लेकर जागरुकता फैलाने को सुनिश्चि करेगी। सरमा ने कहा कि पॉलिसी का मकसद शहरीकरण व माइग्रेशन के आर्थिक लाभों को प्रमोट करना जबिक उनके विपरीत सामाजिक व स्वास्थ्य प्रभावकों को नियंत्रित करना है। 


इसके अलावा असम विधानसभा ने शुक्रवार को बुजुर्गों से जुड़ा एक अहम विधेयक पारित किया। बिल के मुताबिक सरकारी कर्मचारियों के लिए ये जरूरी होगा कि वे अपने अभिभावकों और दिव्यांग भाई बहनों की सही तरीके से देखभाल करें। अगर कोई सरकारी कर्मचारी ऐसा नहीं करता है तो सरकार उसकी सैलरी में से हर महीने 10 फीसदी रकम काट ली जाएगी। यह पैसा उस कर्मचारी के माता पिता या दिव्यांग भाई बहनों पर खर्च होगा। बता दें कि इस तरह का कानून बनाने वाला असम देश का पहला राज्य है। शुक्रवार को पेश असम कर्मचारी अभिभाव जवाबदेही एवं निगरानी विधेयक 2017 को 126 सदस्यों वाली असम विधानसभा ने ध्वनिमत से पारित किया। राज्यपाल की मंजूरी के बाद यह विधेयक कानून बन जाएगा। 


असम कर्मचारी अभिभाव जवाबदेही एवं निगरानी विधेयक 2017 को असम एम्पलॉयीज प्रमाण बिल के नाम से जाना जाता है। बिल के प्रावधानों के मुताबिक अगर राज्य सरकार का कोई कर्मचारी अपने माता पिता की जिम्मेदारी उठाने से भागता है तो सरकार उसकी सैलरी का 10 फीसदी हिस्सा काट लेगी और उसे मां-बाप के खाते में ट्रांसफर कर देगी। अगर कर्मचारी का कोई भाई या बहन दिव्यांग है तो उसकी सैलरी से 5 फीसदी अतिरिक्त कटौती होगी। 


राज्य के वित्त मंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने सदन में विधेयक पेश करते हुए कहा कि बिल का मकसद राज्य कर्मचारियों के निजी जीवन में हस्तक्षेप करना नहीं बल्कि यह सुनिश्चित करना है कि अनदेखी किए जाने की स्थिति में माता पिता या दिव्यांग भाई बहन कर्मचारियों के विभाग में शिकायत कर सकते हैं। 


सरमा ने कहा कि उनकी सरकार को यह मंजूर नहीं है कि कोई भी शख्स अपने बुजुर्ग मां-बाप को ओल्ड एज होम में छोड़कर जाए। उन्होंने दावा किया कि इस तरह का कानून बनाने वाला असम देश का पहला राज्य है। सरमा ने कहा कि बाद में सांसदों,विधायकों, सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों और असम में संचालित निजी कंपनियों के कर्मचारियों के लिए भी एक ऐसा ही विधेयक पेश किया जाएगा। 


बता दें कि असम सरकार ने बजट सत्र में इस तरह का बिल लाने का वादा किया था। सरकार का कहना था कि असम के कई ओल्ड एज होम से इस तरह की शिकायतें मिल रही है कि अच्छी नौकरी पाने वाले सरकारी कर्मचारियों ने अपने अभिभावकों को छोड़ दिया है। फरवरी में मुख्यमंत्री सर्वानंद सोनोवाल ने कहा था कि उनकी सरकार इस मामले को गंभीरता से ले रही है और इस सामाजिक समस्या को दूर करने के लिए कानून बनाएगी।