मिजोरम में अभी तक नहीं घुस पाया है एक भी रोहिंग्या मुस्लिम

Daily news network Posted: 2017-09-13 10:41:06 IST Updated: 2017-09-13 10:41:06 IST
मिजोरम में अभी तक नहीं घुस पाया है एक भी रोहिंग्या मुस्लिम
  • मिजोरम में किसी भी रोहिंग्या मुस्लिम के प्रवेश की खबर नहीं है। एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने मंगलवार को यह जानकारी दी।

आईजोल।

मिजोरम में किसी भी रोहिंग्या मुस्लिम के प्रवेश की खबर नहीं है। एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने मंगलवार को यह जानकारी दी। अधिकारी ने बताया कि राज्य की म्यांमार के साथ 404 किलोमीटर अंतरराष्ट्रीय सीमा लगती है। साथ ही 318 किलोमीटर लंबी सीमा बांग्लादेश से लगती है। दोनों बॉर्डर पर निगरानी कड़ी कर दी गई है लेकिन किसी भी रोहिंग्या मुस्लिम के मिजोरम में प्रवेश की रिपोर्ट नहीं है।


लॉ एनफोर्समेंट एजेंसियां और खुफिया एजेंसियां म्यांमार और बांग्लादेश से मिजोरम में रोहिंग्या मुस्लिमों के प्रवेश की संभावना पर कड़ी नजर रखे हुए है। अधिकारी ने कहा, म्यांमार और बांग्लादेश से लगती सीमा पर

तैनात सेंट्रल पैरा मिलिट्री फोर्सेज जैसे स्टोक होल्डर्स के साथ हम नियमित रूप से बैठकें कर रहे हैं। साथ ही सीमावर्ती इलाकों में स्थिति का जायजा लेने के लिए हर दो महीने में खुफिया एजेंसियों के साथ बैठक

करते हैं।


हालांकि अधिकारी ने कहा कि म्यांमार आर्मी और अराकान लिबरेशन आर्मी(एएलए) के बीच हालिया संघर्ष के दौरान 170 अरकानीज लोगों ने मिजोरम में प्रवेश किया है। उन्होंने दक्षिण मिजोरम के लॉन्गतलई जिले के बॉर्डर एरियाज में शरण ले रखी है।  अस्थायी शिविर बनाए गए हैं जिनमें शरणार्थियों ने शरण ले रखी है और लॉन्गतलई जिले के डिप्टी कमिश्नर ने उनके लिए खाद्य पदार्थों की व्यवस्था की है। हाल ही में मोदी सरकार ने स्पष्ट किया था कि म्यांमार के रोंहिग्या मुस्लिमों को अपने देश लौटना होगा। गृह राज्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा था कि रोहिंग्या मुस्लिम भारत में अवैध प्रवासी हैं। कानूनी प्रक्रिया के जरिए उन्हें वापस भेजा जाएगा लेकिन इसके लिए फोर्स का इस्तेमाल नहीं होगा। बकौल रिजिजू, हम किसी को बाहर करने के लिए फोर्स का इस्तेमाल नहीं करेंगे। इस तरह की छवि बनाने की कोशिश की जा रही है कि हम अमानवीय हैं लेकिन ऐसा नहीं है। दरअसल किसी भी देश ने उतने शरणार्थी स्वीकार नहीं किए हैं जितने भारत ने किए हैं। कोई भी भारत को मानवाधिकारों और शरणार्थियों की सुरक्षा के बारे में नहीं सिखा सकता है। प्रधानमंत्री कार्यालय में राज्य मंत्री जितेन्द्र सिंह ने कहा था कि रोहिंग्या मुस्लिमों को वापस जाना चाहिए।



असम के वित्त मंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने कहा था कि पूर्वोत्तर राज्यों में किसी अवैध प्रवासी के लिए जगह नहीं है। अगर राज्य सरकार से पूछा गया तो यही बात सुप्रीम कोर्ट को भी बता दी जाएगी। बकौल सरमा, हमारे पास पहले से ही पर्याप्त प्रवासी हैं। इसलिए पूर्वोत्तर का इस्तेमाल रोहिंग्या मुस्लिमों समेत अन्य प्रवासियों के लिए नहीं होना चाहिए। सरमा ने कहा कि असम इस संबंध में सुप्रीम कोर्ट में पार्टी नहीं है। अगर असम को पार्टी बनाया गया या कोई आदेश आया तो असम सरकार कोर्ट में जाकर कहेगी कि अब और प्रवासियों के लिए कोई जगह नहीं है।



आर्ट ऑफ लिविंग के संस्थापक व आध्यात्मिक गुरु श्री श्री रविशंकर ने कहा था कि  प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने रोहिंग्या मुस्लिमों को लेकर म्यांमार की अथॉरिटीज के समक्ष देश का स्टैंड स्पष्ट किया है। शरणार्थियों का मसला सुलझना चाहिए लेकिन उनके साथ तब तक सम्मानजक बर्ताव किया जाना चाहिए जब तक वे अपने देश लौटने के लिए तैयार हों।