85 साल के गोगोई की वजह से असम में हो रही अवैध घुसपैठियों की पहचान

Daily news network Posted: 2018-01-14 16:08:29 IST Updated: 2018-01-14 16:08:29 IST
85 साल के गोगोई की वजह से असम में हो रही अवैध घुसपैठियों की पहचान
  • असम में एनआरसी को अपडेट कराने का श्रेय 85 वर्ष के प्रदीप गोगोई और 43 साल के अभिजीत सरमा को जाता है

गुवाहाटी।

असम में एनआरसी को अपडेट कराने का श्रेय 85 वर्ष के प्रदीप गोगोई और 43 साल के अभिजीत सरमा को जाता है। आईआईटी खडग़पुर के पूर्व छात्र प्रदीप गोगोई मतदाता सूची से 41 लाख अवैध मतदाताओं को हटाने के लिए सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका दाखिल करना चाहते थे। जनवरी 2009 में उन्होंने इसके लिए उद्यमी से सामाजिक कार्यकर्ता बने अभिजीत सरमा से संपर्क किया।


सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की गई। याचिकाकर्ता ने अदालत से अपील की कि एनआरसी को अपडेट करने की प्रक्रिया पर वह स्वयं नजर रखे जो मतदाता सूची की सफाई के लिए एक आवश्यक शर्त थी। २ अप्रेल 2013 को यह मामला न्यायमूर्ति रंजन गोगोई और एच.एल.गोखले की खंडपीठ के पास पहुंचा। काम मई 2015 में शुरू हुआ और न्यायालय ने एनआरसी के पहले मसौदे के प्रकाशन की तारीख के तौर पर 31 दिसंबर 2017 की तारीख तय की। मीडिया से दूर रहने वाले गोगोई कहते हैं, इस तरह के काम के लिए समर्पण,ईमानदारी और साहस की जरूरत होती है,इसलिए मैंने सरमा से संपर्क किया था।


पहली याचिका का मसौदा उन्होंने ही लिखा था और कानूनी लड़ाई के लिए अपने पैसे लगाए। 2000 में 36 कारोबारियों की ओर से स्थापित उनका गैर सरकारी संगठन असम पब्लिक वक्र्स इस अभियान का चेहरा बन गया। सरमा बताते हैं, एपीडब्लू की पहली लड़ाई उल्फा के खिलाफ थी। 2008 के बाद हमने अवैध घुसपैठियों के मसले को उठाया। पर सरमा की लड़ाई अभी खत्म नहीं हुई है। एनआरसी का वर्तमान अपडेट असम समझौते के आधार पर किया गया है, जिसने किसी को भी अवैध घुसपैठिया घोषित करने के लिए 1971 को कट ऑफ वर्ष के रूप में स्वीकार किया था। दिसंबर 2012 में असम सम्मलित महासंघ के अध्यक्ष मतिउर रहमान ने सुप्रीम कोर्ट में एक रिट याचिका के जरिए कट ऑफ वर्ष को 1950 करने की मांग की।


इस मांग को आरएसएस और असम के वित्त मंत्री हिमंता बिस्वा सरमा का भी समर्थन हासिल है। अगर अदालत ने रहमान की याचिका के पक्ष में फैसला किया तो एनआरसी को अद्यतन करने की प्रक्रिया अमान्य हो जाएगी। आपको बता दें कि 31 दिसंबर की आधी रात एनआरसी का पहला ड्राफ्ट प्रकाशित किया गया था। देश में कहीं भी एनआरसी के प्रकाशित होने की यह दूसरी घटना थी। पहली बार इसे 1951 में प्रकाशित किया गया था। 1 करोड़ 90 लाख लोगों का नाम एनआरसी में मिल गया है जबकि 1 करोड़ 39 लाख लोगों के लिए सत्यापन चल रहा है।


आपको बता दें कि असम से अवैध घुसपैठियों को बाहर निकालने के मकसद से 1985 में केन्द्र, असम व असम आंदोलन के नेताओं ने एक समझौते पर हस्ताक्षर किए थे। समझौते की महत्वपूर्ण धाराओं में से एक 1951 के एनआरसी को अद्यतन करना भी था ताकि राज्य के पास वैध नागरिकों का एक वास्तविक विवरण हो लेकिन यह शर्त कागज पर ही रह गई। 2005 में एक और त्रिपक्षीय समझौते पर केन्द्र सरकार, असम सरकार और ऑल असम स्टूडेंट्स यूनियन के नेताओं ने हस्ताक्षर किए। नए समझौते के तहत 2010 में राज्य सरकार ने दो जिलों में एनआरसी की पायलट परियोजनाएं शुरू की लेकिन चूंकि एक अल्पसंख्यक छात्र समूह के सदस्यों ने हिंसा का सहारा लेकर इस प्रक्रिया को अवरुद्ध कर दिया था, इस कारण परियोजना को निरस्त कर दिया गया।