मेघालय: कांग्रेस सांसद ने माना,विधायकों के पार्टी छोडऩे से जरूर असर पड़ेगा

Daily news network Posted: 2017-09-15 17:38:31 IST Updated: 2017-09-15 17:38:31 IST
मेघालय: कांग्रेस सांसद ने माना,विधायकों के पार्टी छोडऩे से जरूर असर पड़ेगा
  • कांग्रेस सांसद विंसेन्ट पाला ने गुरुवार को कहा कि प्रेस्टोन ताइनसोंग और ए.धर जैसे वरिष्ठ नेता पार्टी छोड़कर जाते हैं तो कांग्रेस पर असर पड़ेगा।

शिलॉन्ग।

कांग्रेस सांसद विंसेन्ट पाला ने गुरुवार को कहा कि प्रेस्टोन ताइनसोंग और ए.धर जैसे वरिष्ठ नेता पार्टी छोड़कर जाते हैं तो कांग्रेस पर असर पड़ेगा। कुछ कांग्रेस विधायकों के भाजपा में शामिल होने की अफवाहों पर पाला ने कहा कि निर्गमन करीब है और मैंने एमपीसीसी चीफ डीडी लपांग से इस बारे में बात की थी। बकौल पाला, जब कोई वरिष्ठ नेता पार्टी छोड़ता है तो कांग्रेस पर प्रभाव पड़ता है लेकिन उसी वक्त कांग्रेस के पास पार्टी को होने वाले किसी नुकसान को रोकने के लिए रास्त होते हैं क्योंकि सबकुछ नियंत्रण में है। 



पाला ने कहा कि केन्द्र में भाजपा के सत्ता में आने के बाद राज्य में रानजीतिक संकट गहरा गया है। कांग्रेस विधायकों के पार्टी छोडऩे और सत्ता की लड़ाई की समझाते हुए पाला ने कहा कि इस तरह की उम्मीद की जाती है कि जब केन्द्र में भाजपा की सरकार है तो अगले विधानसभा चुनाव के बाद राज्य में भी उसे सत्ता में होना चाहिए ,इसलिए लोग छोड़कर जा रहे हैं न कि इसलिए कि वे कांग्रेस को पसंद नहीं करते लेकिन वे सत्ता में बने रहना चाहते हैं। यह उन पर निर्भर है। कुछ लोग सत्ता के बिना रह सकते हैं जबकि कुछ नहीं। 



कांग्रेस कमेटियां भंग करने के संबंध में पाला ने कहा कि पार्टी को होने वाले नुकसान को रोकने के लिए कांग्रेस को ब्लॉक कांग्रेस कमेटियां भंग करने के लिए मजबूर होना पड़ा। पार्टी के रूप में हम उनके एक्शन के लिए चुप नहीं रह सकते। एमपीसीसी के चीफ डीडी लपांग को पाला ने ऐसे व्यक्ति के रूप में बताया जिनके पास 50 से ज्यादा साल का अनुभव है, पाला ने कहा कि यह उनकी रणनीति है और इसमें कुछ भी गलत नहीं है। 



भाजपा के मेघालय में होल्ड पर पाला ने कहा, वह कुछ सीटें जीत सकती है लेकिन मेघालय में सत्ता में नहीं आ सकती। जब उनसे पूछा गया कि क्या कांग्रेस सत्ता में आएगी तो पाला ने कहा,इस पर कमेंट करना बहुत जल्दबाजी होगी। लोगों का अभी भी कांग्रेस पर भरोसा है वे किसी अन्य दल के मुकाबले खुद को कांग्रेस के करीब पाते हैं लेकिन पीडीएफ और भाजपा के आने से त्रिशंकु विधानसभा की स्थिति उत्पन्न हो सकती है।