फिलोबाड़ी हत्त्याकाण्ड: आज तक पूरा नहीं हुआ सरकारी आश्वासन

Daily news network Posted: 2017-08-12 22:11:50 IST Updated: 2017-08-12 22:11:50 IST
फिलोबाड़ी हत्त्याकाण्ड:  आज तक पूरा नहीं हुआ सरकारी आश्वासन
  • एकसाल पहले 12 अगस्त को आतताहयों ने रात के अंधेरे में अधाधुंध फायरिंग कर पिता पुत्र सहित तीन लोगों को मौत की नींद सुला दी थी जबकि कई लोग घायल हो गए थे।

असम

दुमदुमा । एकसाल पहले 12 अगस्त को आतताहयों ने रात के अंधेरे में अधाधुंध फायरिंग कर पिता पुत्र सहित तीन लोगों को मौत की नींद सुला दी थी जबकि कई लोग घायल हो गए थे।  




उस काली स्याह रात को याद कर आज भी फिलोबाडी बामुनगांव  के लोग कांप उठते हैं घटना के एक वर्ष बीत जाने के बाद भी लोगों में भय व्याप्त है। मालूम हो कि पिछले साल 1 2 अगस्त को करीब 8 बजे रात को संदिग्ध अल्फाहयों ने फिलोबाडी जामुन गांव में अधाधुंध फायरिंग कर पिता किशोर साह व  पुत्र राजेश साह को मौत की नींद सुला दिया था। 

 

वहीं कई लोग घायल हुए। घटना से पूरे अंचल में अपना तफरी मच गई थी। घटना में गंभीर रूप से घायल बबन गोंड़ की मृत्यु डिब्रूगढ मेडिकल कालेज़ में इलाज़ के दौरान पिछले साल ही 30 सितंबर को हो गई। हालांकि इलाज़ में लापरवाही  का आरोप भी लगा। 




घटना के बाद लोगों ने जमकर विरोध प्रदर्शन किया था। लोगों के आक्रोश व  मांग  को देखते हुए मंत्री से संतरी तक घटना स्थल तक पहुंचकर लोगों की मांग को पूरा करने का आश्वासन दिया मगर आजतक आश्वासन पूरा नहीं हो पाया है ज्ञात हो कि राज्य के कृषि मंत्री अतुल बोरा तथा श्रम व  रोजगार मंत्री पल्लव  लोचन  दास ने घटना स्थान पर पहुंच कर लोगों की मांग को स्वीकारते हुए आवासन दिया था कि मृतक परिजनों के एक एक सदस्य को सरकारी नौकरी दी जाएगी तथा अंचल में सेना  शिविर स्थापित की जाएगी लेकिन आवासन वही ढाक के तीन पात निकला। एक साल की जाने के बाद भी किसी भी परिजन को सरकार नौकरी नहीं मिली  है ।



मालूम हो कि मृतक राजेश साह तथा मटर छोला बेच कर अपने परिवार का लालन पालन करने वाले मृतक बबन गोंड़ की परिजनों की हालत दयनीय है।