सीपीएम का आरोप, पीएमओ के आदेश पर रेल और रोड रोको आंदोलन

Daily news network Posted: 2017-06-19 17:38:20 IST Updated: 2017-06-19 17:38:20 IST
सीपीएम का आरोप, पीएमओ के आदेश पर रेल और रोड रोको आंदोलन
  • आईपीएफटी ने अलग राज्य की मांग को लेकर 10 जुलाई से आंदोलन की घोषणा की है। आईपीएफटी ने धमकी दी है कि अलग राज्य की मांग को लेकर 10 जुलाई से रेल और रोड रोको आंदोलन शुरू किया जाएगा।

अगरतला। त्रिपुरा में सत्तारुढ़ सीपीआई-एम ने सोमवार को दावा किया है कि प्रधानमंत्री कार्यालय के आदेश पर आईपीएफटी राज्य में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले समस्या पैदा करने की कोशिश कर रही है। गौरतलब है कि आईपीएफटी ने अलग राज्य की मांग को लेकर 10 जुलाई से आंदोलन की घोषणा की है। आईपीएफटी ने धमकी दी है कि अलग राज्य की मांग को लेकर 10 जुलाई से रेल और रोड रोको आंदोलन शुरू किया जाएगा। यह आंदोलन तब तक चलेगा जब तक अलग राज्य की मांग स्वीकार नहीं कर ली जाती। आईपीएफटी ने त्रिपुरा की लईफ लाइन राष्ट्रीय राजमार्ग-8 को जाम करने की घोषणा की है। 


आईपीएफटी की मांग है कि त्रिपुरा ट्राइबल एरिया ऑटोनोमस डिस्ट्रिक्ट काउंसिल(टीटीएएडीसी) के अंतर्गत आने वाले इलाके को अलग राज्य बना दिया जाए। सीपीआई-एम के राज्य सचिव बिजन धर ने कहा, पीएमओ के आदेश पर आईपीएफटी खतरनाक रोड और रेल रोको आंदोलन शुरू करने जा रहा है। आईपीएफटी के नेताओं की 17 मई को नई दिल्ली में प्रधानमंत्री कार्यालय में राज्य मंत्री जितेन्द्र सिंह से मुलाकात हुई थी। इसके बाद ही आईपीएफटी ने रोड और रेल रोको आंदोलन की घोषणा की थी। मणिपुर में विधानसभा चुनाव से कुछ माह पूर्व कांग्रेस सरकार को विचित्र स्थिति में लाने और सत्ता से हटाने के लिए भाजपा ने यूनाइटेड नगा काउंसिल को राज्य के बड़े राष्ट्रीय राजमार्ग को ब्लॉक करने के लिए मजबूर किया था। 


भाजपा के सत्ता संभालने के 48 घंटे के भीतर ही कुछ माह तक चला रोड रोको आंदोलन वापस ले लिया गया। धर ने कहा कि यूनाइटेड नगा काउंसिल एनएससीएन(आईएम) का राजनीतिक संगठन है। सीपीआई-एम की केन्द्रीय समिति के सदस्य धर ने आरोप लगाया है कि आईपीएफटी के अध्यक्ष नरेन्द्र चंद्र देबबर्मा ने बांग्लादेश स्थित आतंकी संगठनों से मुलाकात की थी। इस बारे में सेंट्रल और स्टेट इंटेलिजेंस एजेंसीज को बता था। उस वक्त देबबर्मा  ऑल इंडिया रेडियो के स्टेशन डायरेक्टर थे। उग्रवादी संगठन नेशनल लिबरेशन फ्रंट ऑफ त्रिपुरा(एनएलएफटी) ने हाल ही में नेतृत्व परिवर्तन करते हुए आईपीएफटी को अगले विधानसभा चुनाव में समर्थन देने की बात कही है। भाजपा ने आईपीएफटी के साथ गुप्त समझौता किया है। 


ये तीनों विधानसभा चुनाव से पहले गंभीर साजिश कर सकते हैं। अगर इतने छोटे राज्य से अलग राज्य बना दिया गया तो त्रिपुरा का कोई अस्तित्व नहीं रह जाएगा। साथ ही दशकों पुराना जातीय सौहार्द भी नष्ट हो जाएगा। हालांकि भाजपा और आईपीएफटी ने आरोपों को खारिज कर दिया है। भाजपा की स्टेट यूनिट के अध्यक्ष बिप्लब कुमाब देब ने कहा, सीपीआई-एम के दावे पूरी तरह गलत और काल्पनिक है। भाजपा ने कभी भी त्रिपुरा के विभाजन का समर्थन नहीं किया। लेफ्ट फ्रंट उनके खिलाफ कानूनी और प्रशासनिक कार्रवाई करें जो राज्य में अशांति पैदा करने की कोशिश कर रहे हैं। सीपीआई-एम के कुशासन के कारण त्रिपुरा में आदिवासी पिछड़े रह गए। 


सीपीआई-एम की केन्द्रीय समिति के सदस्य गौतम ने भाजपा नेता की आलोचना करते हुए कहा, बिप्लब देब अभी अभी राजनीति में आए हैं। उन्हें पता नहीं है कि 1978 में सीपीआई-एम के सत्ता में आने के तुरंत बाद अलग राज्य की मांग शुरू हो गई थी। अब आईपीएफटी प्रतिबंधित उग्रवादी संगठन एनएलएफटी का चेहरा है। उसने फिर से मांग शुरू की है।