नॉर्थ ईस्ट को म्यांमार और थाईलैंड से जोड़ेगी ये सड़क, 1117 करोड़ होंगे खर्च

Daily news network Posted: 2017-05-18 14:46:47 IST Updated: 2017-05-18 14:46:47 IST
नॉर्थ ईस्ट को म्यांमार और थाईलैंड से जोड़ेगी ये सड़क, 1117 करोड़ होंगे खर्च

गुवाहाटी।

म्यांमार में भारत ने 120 किलोमीटर लंबी सड़क का निर्माण शुरू कर दिया है। यह सड़क भारत-म्यामांर-थाईलैण्ड ट्राइलैटरल हाईवे का हिस्सा है। इस सड़क से भारत और दक्षिण एशिया के बीच व्यापार और जमीनी कनेक्टिविटी को भारी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। इससे एक्ट ईस्ट पॉलिसी को भी गति मिलेगी। सगेइंग क्षेत्र में कलेवा-यार्गी सड़क के अपग्रेडेशन के लिए नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (एनएचएआई) टेक्निकल एग्जिक्यूटिंग एजेंसी नियुक्त किया गया है। इस प्रोजेक्ट पर करीब 1,117 करोड़ रुपए खर्च होंगे। सड़क की मौजूदा स्थिति बहुत खराब है। 




ट्राईलैटरल हाईवे मोरेह(मणिपुर) से शुरू होता है और म्यांमार के रास्ते थाईलैण्ड के मे सॉट जिले तक जाता है। मोरेह को तामू और कलेवा(म्यांमार)से जोडऩे वाली 130 किलोमीटर लंबी सड़क का निर्माण भारत का बॉर्डर रोड ऑर्गेनाइजेशन पहले ही पूरा कर चुका है। बाकी बची यार्गी-मोयोवा-मंडालय-मे सॉट को जोडऩे वाली सड़क के निर्माण का काम म्यांमार और थाईलैण्ड की सरकारें अपने हाथ में लेगी। एनएचएआई(नॉर्थ ईस्ट) के चीफ जनरल मैनेजर राज चक्रवर्ती(गुवाहाटी) प्रतिष्ठित प्रोजेक्ट का निरीक्षण कर रहे हैं। 




चक्रवर्ती ने कहा कि कलेवा-यार्गी प्रोजेक्ट के लिए निविदाएं आमंत्रित की गई है। बारिश के मौसम के बाद हमें ग्राउंड पर काम शुरू होने की उम्मीद है। हमें तीन साल में प्रोजेक्ट को पूरा कर लेना चाहिए। इस वक्त ज्यादातर साउथ ईस्ट एशियन देशों के साथ सीधी फ्लाइट कनेक्टिविटी नहीं है। यह सड़क भारत और साउथ ईस्ट एशिया के बीच महत्वपूर्ण लिंक होगी। इससे बैंकॉक म्यांमार के जरिए सिंगापुर जुड़ जाएगा। इससे लैंडलॉक नॉर्थ ईस्ट साउथ ईस्ट एशिया के लिए खुल जाएगा। 




हाईवे भारत से म्यांमार और थाईलैण्ड की सीमाओं तक मालवाहक और कंटेनर ट्रकों को जाने को अनुमति देगा। यह सड़क तीनों देशों में व्यापार और निवेश को बढ़ावा दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। ११ सम्मानित कंस्ट्रक्शन एजेंसियों  के प्रतिनिधियों और भारत के सलाहकारों व एनएचएआई के एक अधिकारी के ाथ चक्रवर्ती ने प्रोजेक्ट साइट का दौरा किया था। टीम में म्यांमार के डिपार्टमेंट ऑफ हाईवेज के अधिकारी भी शामिल थे। भारत का विदेश मंत्रालय और म्यांमार के निर्माण मंत्रालय के डिपार्टमेंट ऑफ हाईवेज इस प्रोजेक्ट लागू करने की नोडल एजेंसीज है।