दार्जिलिंग में आरपीएफ ऑफिस, पुलिस चौकी, और लाइब्रेरी को फूंका

Daily news network Posted: 2017-07-14 17:57:01 IST Updated: 2017-07-14 17:57:01 IST
दार्जिलिंग में आरपीएफ ऑफिस, पुलिस चौकी, और लाइब्रेरी को फूंका
  • पश्चिम बंगाल के दार्जिलिंग में अलग गोरखालैंड राज्य की मांग को लेकर चल रहा आंदोलन शुक्रवार को 30 वें दिन भी जारी रहा।

दार्जिलिंग। पश्चिम बंगाल के दार्जिलिंग में अलग गोरखालैंड राज्य की मांग को लेकर चल रहा आंदोलन शुक्रवार को 30 वें दिन भी जारी रहा। गोरखा जनमुक्ति मोर्चा के नेतृत्व में चल रहा आंदोलन हिंसक रूप ले चुका है। शुक्रवार को रेलवे प्रोटेक्शन फोर्स के दफ्तर, एक पुलिस चौकी और राज्य संचालित एक लाइब्रेकी को आग के हवाले कर दिया गया। पुलिस ने यह जानकारी दी। अशांति उबाल पर है। इंटरनेट सेवाएं 27 वें दिन भी निलंबित रही। एक पुलिस अधिकारी ने बताया कि शुक्रवार सुबह कुर्सियोंग स्थित आरपीएफ के ऑफिस, सुखियापोखरी स्थित पुलिस चौक को आग के हवाले कर दिया गया। मिरिक सबडिवीजन में स्थित एक लाइब्रेरी को गोरखालैंड समर्थकों ने बीती रात फूंक दिया। इससे वह जलकर राख हो गई। दार्जिलिंग,कलिमपोंग और सोनादा में सेना अभी भी तैनात है। 


गोरखालैंड आंदोलन समन्वय समिति ने आगामी राष्ट्रपति चुनावों के चलते 15 जुलाई से अपने आमरण अनशन के कार्यक्रम को स्थगित करने का फैसला किया है। जीएमसीसी के सदस्य ने कहा, राष्ट्रपति चुनाव करीब है,इसलिए हमने आमरण अनशन के कार्यक्रम को स्थगित करने का फैसला किया है। 18 जुलाई को होने वाली हमारी अलगी ऑल पार्टी मीटिंग इस पर फैसला लेंगे। 30 सदस्यीय जीएमसीसी पहाड़ी में स्थित दलों का प्रतिनिधित्व करती है। इनमें जेएम,जीएनएलएफ और जेएपी शामिल है। आपको बता दें कि भीड़ ने 12 जुलाई को दार्जिलिंग में गोरखालैंड टेरिटोरियल एडमिनिस्ट्रिेशन टूरिस्ट इंर्फोमेशन ऑफिस को आग के हवाले कर दिया था। 9 जुलाई को गोरखालैंड समर्थआक सोनादा में मृत पाया गया था। 17 जुलाई को गोरखा जनमुक्ति मोर्चा के तीन प्रदर्शनकारी दार्जिलिंग में पुलिस के साथ हुए संघर्ष में मारे गए थे। 15 जुलाई को जुलाई को आंदोलन को एक महीना पूरा हो गया था। उधर एक अन्य घटनाक्रम में गोरखा समुदाय के कलाकारों ने राज्य सरकार की दमनकारी नीतियों के विरोध में अपने पुरस्कार लौटाने का फैसला किया है। उपन्यासकार के.एस. मुखताम यह कहते हुए अपना अवॉर्ड वापस कर दिया कि वह सिर्फ राज्य सरकार की नीतियों के खिलाफ अपने विरोध का संकेत देना चाहते हैं। 


मुखतान ने कहा, मैंने पश्चिम बंगाल की नीति को दमनकारी पाया है। खासतौर पर किसी संवाद में शामिल नहीं होना या शांति के लिए कोई पहल नहीं करना। मैं उपन्यासकार और लेखक हूं। मेरे अवॉर्ड वापस करने का ऑब्जेक्ट राज्य सरकार की नीतियों की निदा करना है। वे अर्धसैनिक बलों के प्रयोग जैसे कई दमनकारी कदम इस्तेमाल कर रहे हैं। दार्जिलिंग के लोग गोरखालैंड को प्राप्त करने के लिए इस आंदोलन को चला रहे हैं। यह उनके आत्म निर्णय का अधिकार है। सिंगर करमा योंजन ने भी विरोध के संकेत के रूप में अपना अवॉर्ड वापस कर दिया है। उन्होंने कहा, मुझे 2016 में पुरस्कार मिला था। मैं विरोध स्वरूप यह सरकार को वापस लौटा रहा हूं। मैं यह पुरस्कार नहीं गोरखालैंड चाहता हूं।