माणिक सरकार का मोदी सरकार से अनुरोध,त्रिपुरा के उग्रवादी संगठनों से संवाद बहाल करें

Daily news network Posted: 2017-11-15 14:46:37 IST Updated: 2017-11-15 14:46:37 IST
माणिक सरकार का मोदी सरकार से अनुरोध,त्रिपुरा के उग्रवादी संगठनों से संवाद बहाल करें
  • त्रिपुरा के मुख्यमंत्री माणिक सरकार ने मंगलवार को केन्द्र सरकार से अनुरोध किया कि वह त्रिपुरा के उन उग्रवादी संगठनों से संवाद बहाल करें जिनके ठिकाने बांग्लादेश में हैं।

अगरतला।

त्रिपुरा के मुख्यमंत्री माणिक सरकार ने मंगलवार को केन्द्र सरकार से अनुरोध किया कि वह त्रिपुरा के उन उग्रवादी संगठनों से संवाद बहाल करें जिनके ठिकाने बांग्लादेश में हैं। विधानसभा में मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रतिबंधित संगठन नेशनल लिबरेशन फ्रंट ऑफ त्रिपुरा(एनएलएफटी) के अनुरोध के बाद केन्द्र सकार ने संगठन के साथ तीन त्रिपक्षीय वार्ताएं की। इसमें त्रिपुरा सरकार भी शामिल थी लेकिन पिछले कुछ महीनों से संवाद पर कोई प्रगति नहीं हुई है। मैं केन्द्र सरकार से एनएलएफटी के साथ फिर से वार्ता शुरू करने क अनुरोध करता हूं।

माणिक सरकार ने कहा, राज्य सरकार को खुफिया जानकारी मिली है कि एनएलएफटी इंडिजिनस पीपुल्स फ्रंट ऑफ त्रिपुरा(आईपीएफटी) का समर्थन करेगी, अगर आईपीएफटी ने अगले साल फरवरी में प्रस्तावित विधानसभा चुनाव में हिस्सा लिया। उग्रवाद के कई दशकों के बाद हमने त्रिपुरा में शांति व स्थायीत्व स्थापित की लेकिन एनएलएफटी चुनावों में आईपीएफटी का समर्थन करेगी, यह राज्य के लिए खतरनाक होगा। ट्राइबल बेस्ड आईपीएफटी मौजूदा त्रिपुरा ट्राइबल एरियाज ऑटोनोमस डिस्ट्रिक्ट काउंसिल को अपग्रेड कर अलग ट्राइबल राज्य की मांग को लेकर 2009 से आंदोलन कर रही है। आईपीएफटी ने अलग राज्य की मांग को लेकर 10 जुलाई को रेल व सड़क रोको आंदोलन शुरू किया था। इस आंदोलन के दौरान त्रिपुरा की लाईफलाइन राष्ट्रीय राजमार्ग-8 को जाम कर दिया गया। आईपीएफटी का आंदोलन 10 दिन तक चला।

इस आंदोलन के कारण आवश्यक वस्तुओं की किल्लत हो गई थी। इससे राज्य के लोगों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ा था। सरकार, जिनके पास गृह विभाग भी है, ने कहा कि मौजूदा हालात को देखते हुए केन्द्र सरकार को संवाद बहाल करना चाहिए और उग्रवादी संगठन के मसलों को हल करना चाहिए। उन्होंने कहा कि प्रतिबंधित ऑल त्रिपुरा टाइगर फोर्स के पूर्व चीफ रंजीत देबबर्मा, जिन्हें कुछ साल पहले बांग्लादेश के सुरक्षा बलों ने वापस भारत में धकेला था, को शनिवार को देशद्रोह के आरोप में खोवई जिले के तेलियामुरा में गिरफ्तार किया गया। देबबर्मा के पास से कुछ संवेदनशील दस्तावेज मिले। उन्हें जब्त कर लिया गया। चार दिन की पुलिस रिमांड के बाद उन्हें कोर्ट में पेश किया जाएगा। देबबर्मा ने पुलिस की अनुमति के बगैर पिछले हफ्ते तेलियामुरा में जनसभा की थी।

उन्होंने त्रिपुरा के भारतीय संघ में विलय को चुनौती दी थी। देबबर्मा ने जनसभा में राष्ट्र विरोधी विचार व्यक्त किए थे। 2012 में देबबमार को बांग्लादेश पुलिस ने गिरफ्तार किया था क्योंकि वह कथित रूप से कई नरसंहार में शामिल थे। जनवरी 2013 को उन्हें भारतीय अथॉरिटीज के हवाले कर दिया गया। इसके बाद उन्हें त्रिपुरा लाया गया और वहां गिरफ्तार किया गया। 2015 में त्रिपुरा की एक अदालत ने उन्हें जमानत दे दी। देबबर्मा ने हाल ही में त्रिपुरा यूनाइटेड पीपुल्स काउंसिल गठित की है। इसमें कई पूर्व उग्रवादी संगठनों के सरेंडर करने वाले उग्रवादी शामिल हैं। देबबर्मा का कहना है कि 1993 में विभिन्न संगठनों के साथ एक समझौते पर हस्ताक्षर हुए थे। इस दौरान सरकार ने जो आवासन दिए थे उन्हें लागू किया जाए।