सिनेमाघरों में राष्ट्रगान के दौरान दिव्यांगों का खड़े होना जरूरी नहीं

Daily news network Posted: 2017-04-18 16:40:24 IST Updated: 2017-04-18 16:40:24 IST
सिनेमाघरों में राष्ट्रगान के दौरान दिव्यांगों का खड़े होना जरूरी नहीं
  • सुप्रीम कोर्ट ने सिनेमा हॉल में राष्ट्रगान के दौरान खड़े होने के मामले में दिव्यांगों को राहत दी

नई दिल्ली।

सुप्रीम कोर्ट ने सिनेमा हॉल में राष्ट्रगान के दौरान खड़े होने के मामले में दिव्यांगों को राहत दी है। कोर्ट ने कहा कि राष्ट्रगान के दौरान शारीरिक रूप से कमजोर लोगों को सिनेमा हॉल में खड़ा होना जरूरी नहीं है। नवंबर में कोर्ट ने देश के सभी सिनेमाघरों में फिल्म से पहले राष्ट्रगान बजाए जाने और वहां मौजूद सभी लोगों को सम्मान में खड़े होने का आदेश दिया था। 


वहीं देश के सभी स्कूल और कॉलेजों में राष्ट्रगीत वंदेमातरम जरूरी करने की मांग पर सुप्रीम कोर्ट ने केन्द्र से 4 हफ्तों में जवाब मांगा है। मामले पर अगली सुनवाई 23 अगस्त को होगी। सिनेमा हॉल में राष्ट्रगान को सम्मान दिलाने के लिए भोपाल के श्याम नारायण चौकसे ने 14 साल की लड़ाई लड़ी। उन्हीं की जनहित याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने फिल्म से पहले राष्ट्रगान बजाए जाने का आदेश दिया। 30 नवंबर 2016 को कोर्ट ने आदेश जारी करते हुए कहा,देशभर के सभी सिनेमाघरों में मूवी शुरू होने से पहले राष्ट्रगान जरूर बजेगा। इस दौरान स्क्रीन पर तिंरगा नजर आना चाहिए। 


साथ ही राष्ट्रगान के सम्मान में वहां मौजूद सभी लोगों को खड़ा होना होगा। चौकसे की याचिका में सुप्रीम कोर्ट से मांग की घई थी कि सिनेमाघरों में फिल्म शुरू होने से पहले राष्ट्रगान बजाया जाना चाहिए। कमर्शियल बेनिफिट और मनोरंजन शो में ड्रामा क्रिएट करने के लिए राष्ट्रगान के इस्तेमाल पर रोक लगानी चाहिए। एक बार राष्ट्रगान शुरू होने पर आखिर तक गाया जाना चाहिए। इसे बीच में नहीं रोकना चाहिए. 1960 के दशक में भारत में सिनेमाघरों में राष्ट्रगान बजाने की शुरुआत हुई थी। ऐसा सैनिकों के सम्मान और लोगों में राष्ट्रप्रेम की भावना जगाने के लिए होता था। 2003 में महाराष्ट्र सरकार ने इसके लिए नियम बनाया। इसके तहत सिनेमा हॉल में मूवी से पहले राष्ट्रगान बजाया और इस दौरान लोगों का खड़े रहना जरूरी किया गया।