असम: लड़के को सांप ने काटा, इलाज की कमी से मौत, सीएम के इलाके में लापरवाही का चौथा मामला

Daily news network Posted: 2017-05-18 14:06:24 IST Updated: 2017-05-18 14:06:24 IST
असम: लड़के को सांप ने काटा, इलाज की कमी से मौत, सीएम के इलाके में लापरवाही का चौथा मामला
  • माजुली में पिछले 6 महीने में सांप के काटने से मौत का यह दूसरा मामला है।

तिनसुकिया।

असम के मुख्यमंत्री सर्वानंद सोनोवाल के निर्वाचन क्षेत्र माजुली में खराब मेडिकल सुविधाओं की पोल सोमवार को उस वक्त फिर खुल गई जब इलाज की कमी के कारण एक युवक की मौत हो गई। 18 साल के धर्मेन्द्र मेधी को सोमवार रात जहरीले सांप ने काट लिया था। उसे तुरंत माजुली के गरामुर पितांबर सिविल अस्पताल ले जाया गया। 



अस्पताल एंटी वेनम फेसिलिटी की व्यवस्था नहीं कर पाया। इस कारण मेधी को जोराहट मेडिकल कॉलेज व अस्पताल रेफर किया गया, जहां उसकी मौत हो गई। धर्मेन्द्र को सांप ने उस वक्त काटा जब वह अपने घर की छत पर सो रहा था। धर्मेन्द्र मेधी माजुली जिले के सिलाकोला गांव का रहने वाला था। माजुली में पिछले 6 महीने में सांप के काटने से मौत का यह दूसरा मामला है। साथ ही मेडिकल सुविधाओं की कमी के चलते मौत का चौथा मामला है। 




माजुली के डिप्टी कमिश्नर पल्लव गोपाल झा ने कहा कि घटना की जांच के आदेश दे दिए गए हैं। अगर डॉक्टर दोषी पाए जाते हैं तो कड़ी कार्रवाई की जाएगी। बुधवार को स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के सचिव आयुक्त समीर सिन्हा ने कहा कि उन्होंने घटना की जांच की है। मुख्यमंत्री को मामले की जानकारी दी गई है। राज्य का स्वास्थ्य विभाग स्थिति की मोनिटरिंग कर रहा है। सिन्हा ने कहा कि मैंने घटना को लेकर मुख्यमंत्री से बात की है। माजुली में एंटी वेनम सेरम की 33 बोतलें हैं। घटना दुखद है क्योंकि परिवार के सदस्य मरीज को डॉक्टर के पास ले जाने की बजाय ट्रेडिशनल डॉक्टर के भरोसे रहे। 




नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो के मुताबिक 2015 में असम में इस तरह के 14 मामले आए। इनमें से 11 मामलों में जहर से मौत हो गई। मरीज को सिविल अस्पताल से जोराहट ले जाने में सामान्यतया 6 घंटे लगते हैं। यह भी मौसम की स्थिति पर निर्भर करता है। नावों की उपलब्धता भी एक मसला है। गारामुर पितांबर सिविल अस्पताल के अधीयक्षक डॉक्टर माणिक मिल्ली ने कहा कि अस्पताल में आईसीयू नहीं है, एंटीवेनम का बंदोबस्त करने के लिए जरूरी है। 




डॉक्टरों ने मेधी को जोराहट मेडिकल कॉलेज व अस्पताल रेफर किया था। हालांकि मुझे पता चला है कि मरीज को मेडिकल कॉलेज ले जाने की बजाय,मरीज के अभिभावक उसे स्थानीय नीम हकीम के पास ले गए थे। मेधी के परिवार ने मिल्ली के दावों को मानने से इनकार कर दिया। उनका कहना है कि वे मरीज को जोराहट मेडिकल कॉलेज और अस्पताल ले गए थे। जब वे मंगलवार शाम अस्पताल पहुंचे तो डॉक्टरों ने बताया कि उसकी मौत हो चुकी है। मिल्ली ने स्वीकार किया कि सिविल अस्पताल के डॉक्टर अच्छी तरह से प्रशिक्षित नहीं है। इस बात का पता लगाना मुश्किल है कि मरीज को किस सांप ने काटा था और कौनसा एंटीवेनम इस्तेमाल करना हैैै। एंटी वेनम वैक्सीन से रिएक्शन हो सकता है। अत: बिना प्रोपर सेट अप के डॉक्टर एंटी वेनम वैक्सीन लगाने से डरते हैं। 




सिलाकोला गांव के एक निवासी ने कहा कि जब धर्मेन्द्र को सबसे पहले सिविल अस्पताल ले जाया गया तब क्या उसे एंटीवेनम इंजेक्शन लगाया गया था, अगर ऐसा होता तो उसकी मौत नहीं होती। माजुली को जिला घोषित करने के बावजूद यहां मेडिकल सुविधाओं की कमी है। मेधी का शव गत रात गांव नहीं लाया जा सका क्योंकि फेेरी सर्विस रोक दी गई थी। उसका अंतिम संस्कार मंगलवार को 150 ग्रामीणों की मौजूदगी में किया गया।  जिस सांप ने मेधी  को काटा था उसे मारे दिया गया और उसे चिता में फेंक दिया गया।