जानिए सोशल मीडिया से इतने नाराज क्यों हैं असम के मुख्यमंत्री

Daily news network Posted: 2017-05-19 16:34:54 IST Updated: 2017-05-19 16:34:54 IST
जानिए सोशल मीडिया से इतने नाराज क्यों हैं असम के मुख्यमंत्री
  • असम के मुख्यमंत्री सर्वानंद सोनोवाल ने राज्य के मुख्य सचिव और डीजीपी को फेसबुक और व्हाट्सएप जैसे सोशल मीडिया की एक्टिविटीज पर कड़ी निगाह रहने का आदेश दिया

गुवाहाटी।

असम के मुख्यमंत्री सर्वानंद सोनोवाल ने राज्य के मुख्य सचिव और डीजीपी को फेसबुक और व्हाट्सएप जैसे सोशल मीडिया की एक्टिविटीज पर कड़ी निगाह रहने का आदेश दिया है। सोनोवाल ने पुलिस से उन लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने को कहा है जो दूसरों पर हमलों और छवि खराब करने के लिए सोशल मीडिया का इस्तेमाल करते हैं। मुख्यमंत्री ने कहा है कि किसी को भी बुरे मकसद के लिए सोशल मीडिया का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। सोशल मीडिया पर कुछ प्रतिष्ठि लोगों और राजनेताओं के खिलाफ झूठी खबरें फैलने के बाद सोनोवाल ने यह आदेश दिया है। 




मुख्यमंत्री ने पुलिस अधिकारियों को ऑनलाइन एब्यूज के मामलों से कठोरता से डील करने को कहा है। साथ ही साइबर सेल को और चौंकन्ना रहने को कहा है। जनता भवन में गृह विभाग की बैठक में राज्य सरकार ने यह अहम फैसला लिया। असम के डीजीपी मुकेश सहाय ने कहा है कि ऑनलाइन एब्यूज के साथ गंभीरता से निपटा जाएगा। हमने हाल ही में कुछ लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की है और यह अभियान जारी रहेगा। बुधवार को असम पुलिस ने तिहु कस्बे के राकेश मिश्रा के खिलाफ केस दर्ज किया।



राकेश मिश्रा ने फेसबुक पर स्थानीय विधाय रबीन्द्र डेका के खिलाफ आपत्तिजनक पोस्ट की थी। मिश्रा ने डेका पर विधवा महिला से रेप का आरोप लगाया था। डेका असम गण परिषद के विधायक हैं, जो राज्य में भाजपा के नेतृत्व वाले गठबंधन का हिस्सा है। पिछले महीने पुलिस ने कम्यूनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया लिबरेशन (एमएल) की यूथ विंग के पदाधिकारी परीमल गोरे को गिरफ्तार किया था। गोरे पर आपराधिक साजिश और दो समुदायों के बीच शत्रुता पैदा करने के इरादे का आरोप है। 



दरअसल बिश्वनाथ जिले के गोरे ने बिपुल शर्मा की पोस्ट को शेयर किया था। इसमें मुख्यमंत्री सर्वानंद सोनोवाल की आलोचना की गई थी। पोस्ट में सोनोवाल को अवसरवादी बताया गया था। पिछले महीने सामाजिक कार्यकर्ता बोंडिता आचार्य को एसिड अटैक और रेप की धमकी दी गई थी। यह धमकी ऑनलाइन दी गई थी। धमकी देने का आरोप दक्षिणपंथी संगठन पर लगा था। पुलिस ने कथित रूप से बीफ रखने के आरोप में 3 लोगों को गिरफ्तार किया था। आचार्य ने इसकी निंदा की थी। 



पिछले महीने एक व्यक्ति ने असम के मशहूर गायक जुबीन गर्ग को जान से मारने की धमकी दी थी। यह धमकी फेसबुक पर दी गई थी। गौरतलब है कि इससे पहले मुख्य सचिव वीके पिपरसेनिया ने कथित रूप से पुलिस को उन टीवी चैनलों और समाचार पत्रों के खिलाफ कार्रवाई करने को कहा था जो उग्रवादी संगठनों की खबरें प्रसारित करते हैं और छापते हैं। यह खबर सामने आने के बाद मुख्यमंत्री सोनोवाल को सफाई देनी पड़ी थी। सोनोवाल ने कहा था कि इस तरह के कोई निर्देश नहीं दिए गए हैं। वित्त मंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने कहा था कि हमारी सरकार प्रेस की फ्रीडम के लिए प्रतिबद्ध है। हम ऐसे किसी बिंदु को अनुमति नहीं देंगे जो लोकतंत्र के चौथे स्तम्भ को किसी भी तरह से प्रभावित करे।