लोक गीत से विद्यार्थियों ने दिखाई मणिपुर-नागालैंड की दिलचस्प सांस्कृतिक झलक!

Daily news network Posted: 2017-08-11 17:46:50 IST Updated: 2017-08-11 17:46:50 IST
लोक गीत से विद्यार्थियों ने दिखाई मणिपुर-नागालैंड की दिलचस्प सांस्कृतिक झलक!
  • नागालैंड का लोक गीत ओ रोशी, होशी-होशी से विद्यार्थियों ने मंच पर दिखाई मणिपुर-नागालैंड संस्कृति

नागालैंड का लोक गीत ओ रोशी, होशी-होशी से विद्यार्थियों ने मंच पर दिखाई मणिपुर-नागालैंड संस्कृति की ऐसी झलक जिसे देखकर लोग भाव विभोर हो गए। 


विक्रम विश्वविद्यालय के स्वर्ण जयंती हॉल के मंच पर शुक्रवार को विद्यार्थियों ने मणिपुर आैर नागालैंड की लोक संस्कृतियों को प्रस्तुतियों के माध्यम से मंच पर उतार दिया। एक भारत, श्रेष्ठ भारत कार्यक्रम के अंतर्गत मणिपुर आैर नागालैंड की लोक संस्कृतियों पर आधारित एकल व समूह गायन, ड्रामा आैर वक्तृता पर आधारित प्रस्तुतियां दी।

 स्वर्ण जयंती हॉल में सुबह 11.30 बजे कुलपति प्रो. एसएस पांडेय एवं कुलसचिव डॉ. परीक्षित सिंह ने कार्यक्रम का शुभारंभ किया। इसके बाद एकल व समूह गायन की प्रस्तुतियां शुरू हुई। समूह गायन में देवास व शाजापुर के विद्यार्थियों नागालैंड का लोक गीत ओ रोशी, होशी-होशी... गीत सुनाकर सभी मुग्ध कर दिया। 



रोशी एक फूल है जो नागालैंड में पाया जाता है आैर इसे युवाओं में उत्साह भरने के लिए जाना जाता है। युवाओं में उत्साह जगाने के लिए विशेष मौकों पर नागालैंड में यह गीत गाया जाता है। इसके अलावा ड्रामा व वक्तृता की भी प्रस्तुतियां दी। उज्जैन के अलावा देवास, शाजापुर व रतलाम जिलों के 50 से अधिक विद्यार्थियों ने सहभागिता की। संचालन डॉ. जगदीश शर्मा ने किया।