पूर्वोत्तर का ज्यादातर हिस्सा उग्रवाद से मुक्त- राजनाथ

Daily news network Posted: 2017-05-17 13:03:14 IST Updated: 2017-05-17 13:03:14 IST
पूर्वोत्तर का ज्यादातर हिस्सा उग्रवाद से मुक्त- राजनाथ
  • केन्द्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि देश के पूर्वोत्तर क्षेत्र में सुरक्षा की स्थिति में उल्लेखनीय सुधार हुआ

नई दिल्ली।

केन्द्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि देश के पूर्वोत्तर क्षेत्र में सुरक्षा की स्थिति में उल्लेखनीय सुधार हुआ है और इस क्षेत्र का ज्यादातर हिस्सा उग्रवाद से मुक्त हो चुका है। सिंह ने यहां पूर्वोत्तर क्षेत्र से जुड़े मुद्दों पर बैठक की अध्यक्षता करते हुए यह बात कही। बैठक में पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास राज्य मंत्री जितेन्द्र सिंह, केन्द्रीय गृह राज्यमंत्री किरेन रिजिजू, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल और केन्द्र सरकार तथा पूर्वोत्तर राज्यों के अधिकारी उपस्थित थे। सिंह ने कहा कि पूर्वोत्तर क्षेत्र में अवैध हथियारों का प्रसार बहुत तेजी से बढ़ा है। हालांकि इस क्षेत्र का बड़ा हिस्सा उग्रवाद से मुक्त हो चुका है, लेकिन इतनी बड़ी मात्रा में अवैध हथियारों की मौजूदगी के कारण अपराधों की संख्या अधिक है। उन्होंने पूर्वोत्तर के सभी राज्यों को निर्देश दिया कि वे अवैध हथियारों के व्यापारियों और उन्हें रखने वाले लोगों के विरुद्ध संगठित अभियान चलाएं। 



पर्याप्त संख्या में होगी थानों की स्थापना

सिंह ने उग्रवाद रोधी प्रभावी नीति, विकासोन्मुख कार्यक्रमों तथा पड़ोसी देशों के साथ बेहतर रिश्तों से स्थिति में काफी सुधार दर्ज हुआ है। उन्होंने कहा कि कुछ क्षेत्रों में यद्यपि सशस्त्र गिरोह उग्रवाद की आड़ लेकर वसूली और अपहरण जैसी गतिविधियों में लिप्त हैं और सीमाओं से अवैध हथियारों, नशीले पदार्थों और जाली भारतीय मुद्रा की तस्करी होती है। उन्होंने कहा कि सीमा के क्षेत्रों में पुलिस को प्राथमिकता देते हुए हमें पर्याप्त संख्या में थाने स्थापित करने होंगे इससे सीमा पार से होने वाले अपराधों में कमी आयेगी और साथ ही दूर-दराज के क्षेत्रों में रह रहे यहां के लोगों के मन में सुरक्षा की भावना भी पैदा होगा। 



कट्टरवाद की समस्या बड़ी चुनौती

उन्होंने कहा कि सुरक्षा के भावी खतरों के रूप में कट्टरतावाद की समस्या एक बड़ी चुनौती के रूप में सामने आयी है और यदि इसे रोका नहीं गया तो यह आतंकवाद के रूप में परिवर्तित हो सकता है। गृहमंत्री ने कहा कि कट्टरता फैलाने वाले लोगों को पहचाने जाने की जरूरत है। उनके कुछ एजेंट धर्म की आड़ लेकर काम कर रहे हैं जबकि कुछ गैर सरकारी संगठन और लोग सामाजिक-सांस्कृतिक और शैक्षिक विकास के नाम पर संचालन कर रहे हैं। सिंह ने उनकी गतिविधियों को निगाह पर रखने और जरूरत होने पर पहले से ही कार्रवाई करने की जानी चाहिए। इसके साथ ही कुछ एजेंटों को विदेश से धन मिलता है। विदेशी फंड के उनके स्रोतों और उपयोग पर भी निगाह रखे जाने की जरूरत है। सिंह ने ब्रू,चकमा और हाजोंग्स जनजातियों से जुड़े मुद्दों के जल्द समाधान के लिए राज्यों से सक्रिय सहयोग देने का आग्रह करते हुए कहा कि ब्रू जनजातियों का त्रिपुरा से मिजोरम को प्रत्यर्पण और 50 वर्ष से अधिक समय से अरुणाचल प्रदेश में रह रही चकमा और हाजोंग्स जनजाति को नागरिकता देने जैसे कुछ मुद्दे काफी समय से लंबित है। इन मुद्दों का जल्द-से-जल्द समाधान हो जाने पर तनाव और अपराधों में कमी आयेगी।



 

साइबर अपराध उभरता हुआ सुरक्षा खतरा

सिंह ने कहा कि कई जातीय सशस्त्र समूह अपनी शिकायतों के शांतिपूर्ण समाधान के लिये सरकार के साथ बातचीत कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि उनके सशस्त्र कैडरों को निर्धारित शिविरों में रखे जाने और बातचीत के लिए स्वीकार्य नियमों का भी पालन किये जाने की आवश्यकता है। सिंह ने कहा कि इनमें से कुछ वसूली, अपहरण आदि उग्र आपराधिक गतिविधियों में लगे हुए हैं जो जमीनी नियमों का उल्लंघन है। उन्होंने साइबर अपराध को उभरता हुआ सुरक्षा खतरा बताते हुए कहा कि साइबर अपराध की घटनाएं विश्व भर में बढ़ रही हैं और वित्तीय अपराधों के साथ-साथ साइबर स्पेस का उपयोग अस्थिरता पैदा करने के लिए किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि 2012 में असम में कुछ जातीय झड़पों के बाद अस्थिरता पैदा करने के लिए साइबर स्पेस का दुरुपयोग किया गया था। इसलिए साइबर अपराध की जांच करने और डिजिटल मीडिया के दुरुपयोग को रोकने की क्षमता में काफी सुधार करने की आवश्यकता है। इसके साथ ही पूर्वोत्तर क्षेत्र में अत्याधुनिक साइबर अपराध जांच प्रयोगशाला स्थापित किये जाने और सूचना प्रौद्योगिकी में निष्णात पुलिस अधिकारियों की भी काफी संख्या में जरूरत है। 



कुछ राज्यों में दोषसिद्धि का अनुपात खराब

गृहमंत्री ने कहा कि दुर्भाग्यवश पूर्वोत्तर के कुछ राज्यों में आपराधिक मामलों में मुकदमा चलाने और दोषसिद्धि का अनुपात काफी खराब है। एक राज्य में तो मुकदमा चलाने का अनुपात पूरे देश के औसत 86 प्रतिशत की तुलना में मात्र पांच है। उन्होंने कहा कि कई राज्यों में अपहरण और वसूली के मामले काफी ज्यादा हैं लेकिन इन मामलों में मुकदमा चलाने एवं दोषसिद्धि का प्रतिशत एक प्रतिशत से भी कम है, जो स्वीकार करने लायक नहीं है। सिंह ने कहा कि एक अपराधी जब अपराध करने के बावजूद अदालत से छूट जाता है, तो आम जनता का न्याय प्रणाली से भरोसा उठ जाता है और जब बरी किये जाने का अनुपात काफी ज्यादा हो, तो इससे एक तरफ तो राज्य की न्याय व्यवस्था पर भरोसा कम होता है और साथ ही यह अपराधों को भी प्रेरित करता है। 

उन्होंने कहा कि पूर्वोत्तर के कई राज्यों में अपराध जांच प्रयोगशालाओं की स्थिति भी संतोषजनक नहीं है। इस दिशा में पुलिस प्रमुखों और राज्य सरकारों को विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है। सिंह ने कहा कि सरकार द्वारा इस क्षेत्र में सड़क,रेल, वायु, बिजली और डिजिटल अधोसंरचना के त्वरित विकास के लिये उठाये गये कदमों एवं स्थानीय मानव संसाधन के विकास पर जोर देने से बेहतर सुरक्षा स्थिति सहित अन्य क्षेत्रों में भी और अच्छे परिणाम मिलने की आशा है। एक्ट ईस्ट पालिसी से इस क्षेत्र के द्वार दक्षिण पूर्व एशिया के बाजारों के लिये खुल जायेंगे। उन्होंने कहा कि पूर्वोत्तर भारत मानव और प्राकृतिक संसाधनों के मामले में काफी समृद्ध है। यहां की इन संभावनाओं का उचित दोहन करने के लिये इस क्षेत्र में सुरक्षित एवं शांतिपूर्ण माहौल विकसित किया जाना चाहिए।