संदिग्ध आतंकी सैफुल्लाह के पिता ने कहा,बेटा गद्दार था,नहीं लेंगे शव

Daily news network Posted: 2017-03-08 16:43:57 IST Updated: 2017-03-08 16:43:57 IST
संदिग्ध आतंकी सैफुल्लाह के पिता ने कहा,बेटा गद्दार था,नहीं लेंगे शव
  • यूपी में मंगलवार को एटीएस के साथ मुठभेड़ में मारे गए संदिग्ध आतंकी सैफुल्लाह के पिता सरताज अहमद ने अपने बेटे का शव लेने से इनकार कर दिया है।

लखनऊ।

यूपी में मंगलवार को एटीएस के साथ मुठभेड़ में मारे गए संदिग्ध आतंकी सैफुल्लाह के पिता सरताज अहमद ने अपने बेटे का शव लेने से इनकार कर दिया है। उन्होंने बेटे को गद्दार बताते हुए कहा,वह एक देशद्रोही का शव स्वीकार नहीं करेंगे। उधर सैफुल्लाह के नजदीकी रिश्तेदार भी सैफुल्लाह की हकीकत जानकर हैरान हैं। हालांकि गिरफ्तार किए गए तीन अन्य संदिग्धों के पिता ने उन्हें बेकसूर बताया है। यूपी एटीएस ने 11 घंटे चले एनकाउंटर में सैफुल्लाह को मार गिराया था।

सैफुल्लाह के पिता सरताज अहमद ने कहा,उसने देश हित में काम नहीं किया। हम उससे बहुत नाराज हैं और ऐसे देशद्रोही की लाश हम नहीं लेंगे। सैफुल्लाह ने बीकॉम तक की पढ़ाई की थी। वो अकाउंटिंग का काम सीखकर प्राइवेट काम करता था। उसका यहां मन नहीं लगता था। वह सऊदी अरब जाना चाहता था। सैफुल्लाह घर में हुई कहासुनी के बाद भाग गया था और फिर कभी लौटकर नहीं आया। पिछले सोमवार को उसने फोन कर बताया कि वह सऊदी जा रहा है। सैफुल्लाह की मां का निधन पिछले साल हुआ था। सरताज अहमद के तीन बेटे हैं। सैफुल्लाह सबसे छोटा था। सबसे बड़ा खालिद शादीशुदा है और प्राइवेट जॉब करता है। बीच का बेटा मुजाहिद चाय की दुकान चलाता है।

बकौल सरताज अहमद, सैफुल्लाह सुबह 10 बजे तक घर से निकल जाता था और देर रात लौटता था। पूछने पर बहस करने लगता था। बस यही कहता था कि इतना पैसा कमाऊंगा कि सब देखते रह जाएंगे। वो आतिश नाम के एक लड़के के साथ ज्यादा रहता था। वो क्या करते थे,इस बारे में घर में कभी नहीं बताया। करीब तीन महीने पहले काम को लेकर मैंने उसे पीटा था,जिसके बाद वो घर से चला गया। वो अपने साथ अपना पासपोर्ट,ड्राइविंग लाइसेंस, आधार कार्ड और अपने सारे सर्टिफिकेट लेकर गया था।

करीब साल भर पहले सैफुल्लाह ने एक लैपटॉप खरीदा था,लेकिन वो उसे किसी को छूने नहीं देता था। बीते 6 महीने से उसका ज्यादातर वक्त लैपटॉप पर ही गुजरता था। करीब तीन महीने पहले काम को लेकर मैंने उसे पीटा था,जिसके बाद वो घर से चला गया। करीब ढाई महीने बाद 4 मार्च की दोपहर उसका फोन आया। उसने कहा,हम एक दो दिन में सऊदी जा रहे हैं। मगर उसके पहले हमें एक जरूरी काम करना है। सैफुल्लाह ने यह नहीं बताया कि वो कौन सा जरूरी काम है। जब एनकाउंटर के बाद टीवी में उसका नाम सुना और फोटो देखी तो पता चला कि मेरा बेटा आतंकी बन चुका है।

सैफुल्लाह के बड़े भाई खालिद ने बताया,उसके बहुत बड़े सपने थे। वो पढ़ाई में तेज था। एक बार कोई चीज को देख लेता या सुन लेता तो वो उसे याद हो जाती थी। उसे क्रिकेट खेलने का बहुत शौक था। स्कूल में पढ़ते वक्त वो कई बार खेलकूद में इनाम जीत चुका था। वो जो ठान लेता था,उसे करके ही मानता था। वह कभी किसी पर गुस्सा नहीं करता था। ज्यादा किसी से बात करना पसंद नहीं था। उसे हमेशा नया करने का जुनून रहता था। उसे बहका दिया गया होगा,वो ऐसा नहीं कर सकता है। उसने कभी चींटी भी नहीं मारी,वो बम ब्लास्ट क्या करेगा?

सैफुल्लाह के एनकाउंट में मारे जाने के बाद उसके रिश्तेदारों को भी अब तक यकीन नहीं हो रहा है कि वह आतंकवाद की राह पकड़ चुका था। एक रिश्तेदार ने कहा,हर कोई हैरान है। उसका बर्ताव अच्छा था। वह पांच बार नमाज पढ़ा करता था। हमने उसके बारे में ऐसा कभी नहीं सोचा था। मध्य प्रदेश और कानपुर से गिरफ्तार किए गए संदिग्ध आतंकी दानिश,इमरान और फैजल के पिता ने अपने बेटों का बचाव किया है। उन्होंने कहा,ये आरोप गलत है। फैजल एक दुकान चलाता है। इमरान शादीशुदा है और उसकी एक बेटी भी है। दानिश भी मेरा बेटा है। मैंने उसे काम न करने के लिए डांटा था जिसके बाद वह घर छोड़कर चला गया था।