असम में बना देश का सबसे बड़ा पुल, 2000 लोगों की रोजी रोटी खतरे में

Daily news network Posted: 2017-05-20 17:55:58 IST Updated: 2017-05-20 17:55:58 IST
असम में बना देश का सबसे बड़ा पुल, 2000 लोगों की रोजी रोटी खतरे में
  • असम में भारत का सबसे बड़ा पुल बनकर तैयार हो गया है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जल्द ही इस पुल का उद्घाटन करेंगे।

तिनसुकिया। असम में भारत का सबसे बड़ा पुल बनकर तैयार हो गया है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जल्द ही इस पुल का उद्घाटन करेंगे। ढोलिया सादिया ब्रिज असम को अरुणाचल प्रदेश से जोड़ेगा। पुल बनने से जहां असम और अरुणाचल प्रदेश के लोगों का यात्रा करने में समय बचेगा वहीं इस पुल के कारण कुछ लोगों की रोजी रोटी पर बन आई है। 


द टेलीग्राफ की खबर के मुताबिक इस पुल के बनने से करीब 2 हजार लोगों की रोजी रोटी खतरे में पड़ गई है। जिन लोगों का रोजगार संकट में हैं उनमें बोट चलाने वाले, फेरी ऑपरेटर्स, वर्कर्स, पान कियोस्क के मालिक और घाट के अंत में दोनों ओर स्थित होटलों के वर्कर्स शामिल हैं। सादिया उप खंड और अरुणाचल प्रदेश के रोइंग जिले के निवासियों को इलाज,शिक्षा और आपात स्थिति में नदी पार जाने के लिए फेरी पर निर्भर रहना पड़ा था लेकिन पुल बनने के बाद यह निर्भरता खत्म हो गई है। सालों से घाट पर काम करने वाला बिश्वजीत रॉय रोजी रोटी मंडरा रहे खतरे से डरा हुआ है। वह घाट के ठेकेदार का कर्मचारी है। 


द टेलीग्राफ से बातचीत में रॉय ने कहा, ढोला सादिया घाट से प्रत्यक्ष रूप से करीब 2 हजार स्वनियोजित लोग जुड़े हुए हैं। यह उनके लिए आजीविका का एक मात्र जरिया है। नाव चलाने वाले नारायण दास ने बताया कि हम इस धंधे में सालों से हैं। हमारे लिए दूसरा काम करना मुश्किल होगा। 


पर्यटन के विकास को हमारी आजीविका को जिंदा रखने का भी ध्यान रखना होगा। हम चाहते हैं कि राज्य सरकार रोजगार के अवसर विकसित करें। इनलैंड वाटर ट्रांसपोर्ट डिपार्टमेंट में राज्य सरकार के कर्मचारी अतुल मेधी का कहना है कि मैं देखा है कि पिछले 20 सालों से 1 हजार परिवार ढोला सादिया घाट से अपनी रोजी रोटी कमा रहे हैं। मैं चिंतित हूं कि जब अगले सप्ताह से पुल पब्लिक के लिए पुल खोल दिया जाएगा तब उनके साथ क्या होगा। सादिया सेखोवा फेरी सर्विस के तहत करीब 120 सिंगल बोट्स हैं और 14 बड़ी बोट्स ऑपरेट कर रही हैं। 30 पान के कियोस्क और छोटी होटले हैं। 


छोटी नावें करीब 60 से 100 यात्रियों को लेकर जाती है। माझी बोट और डुब-डुबी के अलावा तीन लाइट मोटर व्हिकल्स और चार मोटरसाइकिलें हैं। डबल बोट्स बसों और ट्रकों को नदी के उस पार लेकर जाती है। ढोला सादिया घाट और फेसी सर्विस से जुड़े 2 हजार से ज्यादा परिवारों के पुर्नविस्थापन की मांग हो रही है। वहीं प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की ओर से इस पुल का उद्घाटन किए जाने से स्थानीय निवासियों में फिर से विकास की उम्मीद जगी है। आशा वर्कर और सादिया उपखंड के लखिनिपाथर की रहने वाली सुखामा बोरगोहेन ने कहा, हम विकास और समृद्धि की उम्मीद करते हैं। कई ऐसे उदाहरण है जब डिलीवरी के दौरान महिलाओं की स्थित गंभीर हो गई और उन्हें तिनसुकिया और डिब्रूगढ़ के बेहतर अस्पतालों में रैफर किया गया। हालांकि फेरीज की गैर मौजूदगी में मरीजों का स्थानीय स्तर पर ही इलाज किया जाता है। 


इस कारण मां और बच्चे की जान को खतरा उत्पन्न हो जाता है। एक केस में डिलीवरी के 13 दिन बाद महिला की मौत हो गई थी। गुमतिबिल की 37 वर्षीय बिनीता हजारिका के मुताबिक ढोला सादिया पुल हमारे लिए बहुत उम्मीदें लेकर आया है। कई मौकों पर डूमडूमा,तिनसुकिया और डिब्रूगढ़ से लौटने वाले लोग नदी के उस पार फंस जाते हैं। बनिता के मुताबिक भारी बारिश के बाद ब्रह्मपुत्र नदी ऊफान पर होती है। इस कारण फेरी की सुविधाओं को निलंबित कर दिया जाता है। 


बिनीता के मुताबिक सादिया उप खंड में केवल एक कॉलेज है। कई लोग अपने बच्चों को बेहतर एजुकेशन के लिए नदी के उस पार नहीं भेज सकते क्योंकि फेरी से नदी के उस पार जाने में काफी वक्त लगता है। नदी के तट तक ले जाने वाली आखिरी फेरी शाम को 4.30 बजे तक है। यह भी चिंता की वजह है। सादिया और तिनसुकिया के बीच की दूरी करीब 60 किलोमीटर है लेकिन इसे तय करने में करीब 6 घंटे से ज्यादा का वक्त लगता है। यह भी फेरी की उपलब्धता पर निर्भर करता है। ढोला सादिया पुल न केवल ट्रेवल में चार घंटे की कमी लाएगा बल्कि यह पैसे बचा ने में भी मदद करेगा। 9.16 किलोमीटर लंबा ढोला सादिया पुल सादिया सब डिवीजन और अरुणाचल प्रदेश के रोइंग जिले व इसके नजदीकी इलाकों के करीब एक लाख लोगों की सामाजिक आर्थिक स्थितियों को मजबूत करेगा। यह पुल मुंबई के बांद्रा वर्ली सी लिंग से 3 किलोमीटर ज्यादा लंबा है।