असम: मुसलमान के घर पलेगा हिंदू परिवार का बच्चा,नाम जुनैद, पढि़ए पूरी कहानी

Daily news network Posted: 2018-01-06 15:33:20 IST Updated: 2018-01-06 17:27:58 IST
  • आपने इस तरह की खबरें तो पढ़ी ही होगी कि अस्पताल में बच्चों की अदला बदली हो गई,जिसके लड़का पैदा हुआ होता है उस परिवार को लड़की थमा दी गई और जिसके लड़की पैदा हुई उसे लड़का थमा दिया गया।

गुवाहाटी।

आपने इस तरह की खबरें तो पढ़ी ही होगी कि अस्पताल में बच्चों की अदला बदली हो गई,जिसके लड़का पैदा हुआ होता है उस परिवार को लड़की थमा दी गई और जिसके लड़की पैदा हुई उसे लड़का थमा दिया गया। ऐसा अस्पताल प्रशासन की लापरवाही की वजह से होता है। इस लापरवाही के चलते पीडि़त परिवारों को काफी परेशानियां झेलनी पड़ती है। असम में भी इसी तरह का मामला सामने आया है लेकि न यह केस दूसरे मामलों से थोड़ा अलग है। यहां दोनों परिवारों के लड़के पैदा हुए थे।


एक मुस्लिम परिवार है जबकि दूसरा हिंदू। दोनों परिवारों ने तय किया है कि डीएनए टेस्ट में पुष्टि के बावजूद वे अपने बेटों को नहीं बदलेंगे। दोनों बच्चे साल 2015 में जन्म के बाद अस्पताल में आपस में बदल गए थे। इस कारण सलमान परवीन और शहाबुद्दीन का जैविक बेटा अब अनिल और सेवाली बोडो के बेटे राकेश बोडो के रूप में रह रहा है। इसी तरह अनिल और सेवाली बोडो का बेटा अहमद परिवार में जुनैद के रूप में रह रहा है। सेवाली और सलमान दोनों ने ही 11 मार्च 2015 को दरांग के मंगलदाई सिविल अस्पताल में बच्चे को जन्म दिया था। जब परिवार को बच्चे को सौंपने की बारी आई तो नर्सों ने गलती से बच्चों को बदल दिया।


यह गलती कई दिनों तक दोनों परिवारों के ध्यान में नहीं आई। पेशे से टीचर शहाबुद्दीन ने कहा, अस्पताल से आने के एक सप्ताह बाद मैंने पाया कि मेरी पत्नी रो रही है। सलमान ने कहा कि बच्चा उनका नहीं है क्योंकि यह परिवार से अलग दिख रहा है। उसकी आंखें छोटी हैं जैसा कि आदिवासी बच्चों में होता है। कुछ समय बाद बोडो परिवार ने भी यही अनुभव किया। शहाबुद्दीन ने अस्पताल से मदद मांगी लेकिन अस्पताल ने उसे खारिज कर दिया। फिर उन्होंने आरटीआई के जरिए 11 मार्च को पैदा होने वाले सभी बच्चों के परिवार वालों का नाम और पता हासिल किया।


आरटीआई के जवाब में एक बोडो महिला का नाम था। मैंने बोडो कपल को पत्र लिखकर बच्चों के अदला बदली की आशंका जताई। उन्होंने हमें अपने घर बुलाया जहां बच्चों से मुलाकात के बाद हम सहमत हो गई कि बच्चों की अदला बदली हुई है। हालांकि बोडो की मां ने इस सच को मानने से इनकार कर दिया। इसके बाद शहाबुद्दीन ने एसपी के पास दिसंबर 2015 में एक एफआईआर दर्ज कराई व डीएनए टेस्ट के लिए कहा। साल 2016 में डीएनए टेस्ट कराया गया और नवंबर में रिपोर्ट आई लेकिन इससे बोडो की मां के रूख में कोई बदलाव नहीं आया। सेवाली ने कहा, हमने जो फैसला किया है कि हम अपने बच्चे को नहीं बदलनेंगे। मैंने राकेश पाला और उसे दूध पिलाया है।


मैं उसके बिना कैसे रह सकती हूं? सलमा ने कहा, हम बच्चों को बदलकर उनकी प्रतिक्रिया देखना चाहते थे लेकिन वे अपनी पाली वाली मां को नहीं छोडऩा चाहते थे। हम उन्हें अब नहीं बदलेंगे।