फर्जी बिलों की आड़ में मोदी सरकार को लग रहा करोड़ों का चूना

Daily news network Posted: 2017-12-08 13:19:21 IST Updated: 2017-12-08 13:26:34 IST
फर्जी बिलों की आड़ में मोदी सरकार को लग रहा करोड़ों का चूना
  • मंडी के इस रौनक की आड़ में बेलतला में सिंडीकेट राज ने फिर से अपनी दस्तक दी है।

गुवाहाटी

सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद मेघालय में कोयले की ढुलार्इ फिर से शुरू हो गर्इ है जिससे पूर्वोत्तर के सबसे बड़ी कोयला मंडी में रौनक आ गर्इ है। मंडी के इस रौनक की आड़ में बेलतला में सिंडीकेट राज ने फिर से अपनी दस्तक दी है। पहले की तरह ही फिर से सिंडीकेट ने बिल के नाम पर फर्जीवाड़े का खेल शुरू कर दिया है। इस कारण राज्य सरकार को करोड़ो का  नुकसान उठाना पड़ रहा है।


जानकारी के अनुसार चेक गेटो को हटा देने के कारण फर्जीवाड़े के इस खेल को आैर भी आसानी हो गर्इ है क्योंकि रास्ते में कहीं भी इन ट्रको को चेक नहीं किया जाता है आैर गंतव्य स्थान पर पहुंचने के बाद सारे रिकाॅर्ड को मिटा दिया जाता है। इन कोयले की बिक्री को सरकार के खाते में नहीं दिखाया जाता है। हालाकिं इस बारे में कर्इ बार सरकार को सूचित किया जा चुका है लेकिन इसके बावजूद फर्जीवाड़े का यह खेल धड़ल्ले से चल रहा है।


जानकारी के मुताबिक कोयले की बिक्री पर 5 प्रतिशत जीएसटी आैर 400 रु सेस प्रति टन है ।अगर आप 10 टन कोयला यहां से लेकर जा रहे हैं तो उस पर आपको 4000 रु को सेस आैर 5 प्रतिशत जीएसटी यानि 4500 रु देने होंगे। 10 टन पर आपको कुल मिलाकर 9000 रु देने होंगे । ये रुपए राज्य आैर केंद्र के खातें में जाता है ।



अब बेलतला में कुछ लोगों ने फर्जी बिल काटने का धंधा शुरू कर रखा है जिसमें कुछ बस डिपो के लोग भी शामिल है। ये 150 रु प्रति टन के हिसाब से बिल काटते है आैर प्रति 10 टन पर 1500 रु सिंडीकेट के जेब में जाते हैं आैर राजस्व सरकार को इसमें से एक पैसा भी नहीं मिलता है।



आपको बता दें कि एक अनुमान के अनुसार करीब बेलतला से करीब 150 ट्रक कोयला हर रोज बाहर जाता है। ये ट्रक वाले 850 रु प्रति टन जीएसटी आैर सेस की जगह 150 टन वाला बिल लेकर राज्य से बाहर निकल जाते है। इन कोयलो की बिक्री को राजस्व सरकार के खातें में दिखाया ही नहीं जाता है।