त्रिपुरा: भाजपा में शामिल हुए मुसलमानों को मस्जिद में नहीं पढऩे दी नमाज

Daily news network Posted: 2018-02-13 15:50:21 IST Updated: 2018-02-13 15:50:21 IST
त्रिपुरा: भाजपा में शामिल हुए मुसलमानों को मस्जिद में नहीं पढऩे दी नमाज
  • दक्षिण त्रिपुरा के एक गांव के मुस्लिमों का आरोप है कि भाजपा में शामिल होने के कारण उन्हें मस्जिद में नमाज पढऩे से रोका गया।

अगरतला।

 त्रिपुरा में विधानसभा चुनाव से पहले चौंकाने वाली खबर सामने आई है। दक्षिण त्रिपुरा के एक गांव के मुस्लिमों का आरोप है कि भाजपा में शामिल होने के कारण उन्हें मस्जिद में नमाज पढऩे से रोका गया। उन्हें कहा गया कि वे हिंदूवादी पार्टी का समर्थन कर रहे हैं इसलिए उन्हें मस्जिद आने की जरूरत नहीं है। वे हिंदुओं के साथ जाएं। जब इन्हें मस्जिद में नमाज पढऩे से रोका गया तो उन्होंने अपनी अलग मस्जिद बनवा दी।


एक अंग्रेजी वेबसाइट की रिपोर्ट के मुताबिक मामला दक्षिण त्रिपुरा के शांतिबाजार विधानसभा क्षेत्र के मोइदातिला गांव का है। इस गांव में कुल 83 मुस्लिम परिवार हैं। इनमें से 25 परिवारों ने भाजपा के साथ जाने का फैसला किया। भाजपा का समर्थन करने वाले एक परिवार के सदस्य बाबुल हुसैन बताते हैं, करीब 16 महीने पहले हम भाजपा में शामिल हुए। इसके बाद हमसे कहा गया कि अब यहां नमाज की इजाजत नहीं है। अब मैं हिंदूवादी संगठन के समर्थन में हूं इसलिए मस्जिद की बजाय उनके(हिंदुओं) साथ जाऊं।


आलू की खेती करने वाले हुसैन बताते हैं, हम 25 परिवार के लोगों ने बांस और टीन शेड के सहारे एक अस्थाई मस्जिद बनाई। हम वहीं नमाज पढ़ते हैं। भाजपा का समर्थन करने वाले 25 परिवारों ने एक इमाम रखा है और उसकी सैलरी आपस में पैसे जुटाकर देते हैं। हुसैन कहते हैं, भाजपा के हिंदूवादी पार्टी होने के बारे में मैं कुछ नहीं जानता। मैं इसमें भरोसा नहीं करता कि  देश में मुस्लिमों के खिलाफ होने वाले हमलों में भाजपा शामिल है। यह सिर्फ कांग्रेस और सीपीएम की तरफ से आरोप भर है। कहीं कोई मुस्लिम मारा जाता है तो इसका मतलब है कि उसने कुछ गलत किया होगा। अच्छे आदमी पर कोई हमला क्यों करेगा?


हुसैन कभी कांग्रेस के वोटर हुआ करते थे। बकौल हुसैन, कांग्रेस खत्म हो चुकी है और हम चाहते हैं कि यहां से वाम सरकार(सत्तारुढ़ सीपीएम के नेतृत्व वाला लेफ्ट फ्रंट) भी जाए। इस सरकार को 25 साल हो गए हैं लेकिन हमें कुछ नही मिला। भाजपा की सरकार आने पर उम्मीद है कि हमें काफी कुछ मिलेगा। इस गांव में आज जो भी मुस्लिम परिवार भाजपा के समर्थन में हैं वे कभी कांग्रेस के साथ खड़े थे। इसके अलावा कुछ परिवार सीपीएम के भी साथ थे। सीपीएम का अब तक समर्थन करते रहे फारूक इस्लाम(27) कहते हैं, हमें समर्थन के बदले कुछ नहीं मिला। मेरे गांव में कुछ नहीं है। यहां न बिजली है और ना ही शुद्ध पानी। भाजपा ने कहा है कि वह हमें यह सब देगी। सीपीएम नेता और उनके कार्यकर्ता घमंडी हो गए हैं। हम बदलाव चाहते हैं।


भाजपा अल्पसंख्यक प्रकोष्ठ के प्रदेश अध्यक्ष मोहम्मद जसमुद्दीन मुस्लिम परिवारों के भाजपा से जुडऩे से उत्साहित हैं। उन्होंने कहा, कई और परिवार भाजपा के साथ जुड़े हैं। शांतिबाजार के अलावा कारमीबाजार के भी 40 परिवार हमारे साथ आए हैं। उधर सत्तारुढ़ सीपीएम का आरोप है कि आरएसएस कार्यकर्ता क्षेत्र में पैसे बांटकर लोगों को अपनी तरफ खींच रहे हैं। एक सीपीएम कार्यकर्ता ने कहा, करीब 25 आरएसएस कार्यकर्ता यहां काम कर रहे हैं। वे वोटर्स को पैसे दे रहे हैं। शांतिबाजार से सीपीएम के उम्मीदवार और सरकार में मंत्री मनिंद्र रियांग कहते हैं, यह कहना गलत है कि सरकार ने काम नहीं किया। पहले यहां के वोटर सिर्फ भोजन और कपड़ा मांगते थे। अब वे सभी बुनियादी सुविधाओं की डिमांड करते हैं। बिजली, सड़क, पानी, स्वास्थ्य और शिक्षा की मांग की जा रही है। आने वाले 5 सालों में हम इनकी और भी मांगें पूरी करने जा रहे हैं।