वामपंथियों का गढ़ रही है नलचर सीट, 7 बार सीपीएम के उम्मीदवार जीते

Daily news network Posted: 2018-02-13 19:06:25 IST Updated: 2018-02-13 19:06:25 IST
वामपंथियों का गढ़ रही है नलचर सीट, 7 बार सीपीएम के उम्मीदवार जीते
  • त्रिपुरा के विधानसभा चुनाव में सभी की नजरें नलचर सीट पर लगी हुई है। यह सीट एससी के लिए रिजर्व है। इस सीट पर इस बार त्रिकोणीय मुकाबला है।

अगरतला।

त्रिपुरा के विधानसभा चुनाव में सभी की नजरें नलचर सीट पर लगी हुई है। यह सीट एससी के लिए रिजर्व है। इस सीट पर इस बार त्रिकोणीय मुकाबला है। इस सीट पर बंगाली भाषी मतदाताओं की संख्या काफी ज्यादा है इसलिए सभी दलों ने बंगाली भाषी उम्मीदवारों को चुनाव मैदान में उतारा है। सीपीएम ने यहां से एक बार फिर तपन चंद्र दास पर दांव लगाया है। 2013 के विधानसभा चुनाव में दास ने यहां से जीत दर्ज की थी। 

कांग्रेस ने राकेश दास, भाजपा ने सुभाष चंद्र दास और आमरा बंगाली ने आशुतोष दास को टिकट दिया है। इस सीट से 7 बार सीपीएम के उम्मीदवार जीते हैं जबकि 2 बार कांग्रेस के। सीपीएम के तपन चंद्र दास सबसे ज्यादा वोटों से जीत दर्ज करने वाले नेता हैं। उन्होंने पिछले विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के उत्तम दास को 8,107 वोटों से हराया था। तपन चंद्र दास को कुल 21, 969 वोट मिले थे जबकि उत्तम दास को 13, 862 मत पड़े। इस सीट से कम वोटों से जीत दर्ज करने वाले उम्मीदवार थे कांग्रेस के नारायण दास। 1983 के विधानसभा चुनाव में नारायण दास ने सीपीएम के सुमंता कुमार दास को सिर्फ 210 वोटों से हराया था। 

नारायण दास को कुल वोट मिले थे 7,420 जबकि सुमंता दास को मिले थे 7,210। सीपीएम के सुकुमार बर्मन यहां से पांच बार विधायक रहे हैं। वे 1988 में चुनाव जीतकर पहली बार विधायक बने। इसके बाद वे 2008 तक लगातार यहां से चुनाव जीतते रहे। 1972 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के उम्मीदवार बेनोडे बेहारी दास ने जीत दर्ज की थी। उन्होंने सीपीएम के हरी माधव भौमिक को 879 वोटों से हराया था। दास को कुल 4,078 वोट मिले थे जबकि भौमिक को 3,199 मत पड़े थे। 1977 के चुनाव में कांग्रेस ने उम्मीदवार बदल लिया, लेकिन उसे फायदा नहीं हुआ। सीपीएम के सुमंता कुमार दास ने कांग्रेस के बीर चंद्र बर्मन को 3,488 वोटों से हराया। 

सुमंता कुमार दास को कुल 6,433 वोट मिले थे जबकि कांग्रेस के बीर चंद्र बर्मन को 2,945 वोट पड़े थे। 1988 के चुनाव में सीपीएम के सुकुमार बर्मन ने कांग्रेस के नारायण दास को 1,166 वोटों से हराया। बर्मन को कुल 9,420 जबकि नारायण दास को 8, 254 वोट पड़े। 1993 के विधानसभा चुनाव में सीपीएम ने फिर सुकुमार बर्मन पर दांव लगाया। उन्होंने कांग्रेस के नारायण दास को 1,418 वोटों से हराया। बर्मन को कुल 10,526 जबकि नारायण दास को 9,108 वोट पड़े। 1998 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने फिर अपना उम्मीदवार बदला। हालांकि कांग्रेस को इस बार भी फायदा नहीं हुआ। 

सीपीएम के सुकुमार बर्मन ने कांग्रेस के पुलिन बेहारी भौमिक को 3,662 वोटों से मात दी। बर्मन को कुल 11,905 जबकि भौमिक को 8,243 वोट मिले। 2003 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने फिर उम्मीदवार बदला। इस बार भी कांग्रेस को हार का मुंह देखना पड़ा। सीपीएम के बर्मन ने फिर यहां से जीत दर्ज की। उन्होंने कांग्रेस के नानी गोपाल दास को 3,572 वोटों से हराया। बर्मन को कुल 13, 220 जबकि गोपाल दास को 9,648 वोट मिले। 2008 में कांग्रेस ने फिर उम्मीदवार बदला। कांग्रेस को फिर हार का स्वाद चखना पड़ा। सीपीएम के सुकुमार बर्मन ने कांग्रेस के शुक्ला दास को 2,532 वोटों से हराया। बर्मन को इस बार कुल 14,748 जबकि दास को 12, 216 वोट मिले।