दार्जिलिंग में हिंसा को लेकर सीपीएम ने भाजपा पर लगाया गंभीर आरोप

Daily news network Posted: 2017-06-20 16:43:00 IST Updated: 2017-06-20 16:43:00 IST
दार्जिलिंग में हिंसा को लेकर सीपीएम ने भाजपा पर लगाया गंभीर आरोप
  • आईपीएफटी ने पश्चिम बंगाल में अलग गोरखालैंड की मांग का समर्थन किया

अगरतला।

आईपीएफटी ने पश्चिम बंगाल में अलग गोरखालैंड की मांग का समर्थन किया है। वहीं पीआई-एम का आरोप है कि दार्जिलिंग में जारी अशांति के पीछे भाजपा का हाथ है। सीपीआई-एम के स्टेट

सेक्रेटरी बिजन धर ने आरोप लगाया कि भाजपा त्रिपुरा में आईपीएफटी की अलग राज्य की मांग को हवा दे रही है।


अब वह 10 जुलाई से राज्य में शुरु होने वाले बेमियादी रोड और रेल रोको आंदोलन को लेकर सांप्रदायिक तनाव पैदा कर रही है। बकौल धर, देश में कई ऐसे उदाहरण है जब भाजपा और आरएसएस स्वतंत्रता के बाद से सांप्रदायिक आधार पर देश को विभाजित करने की कोशिशों में शामिल रहे हैं। वे हमेशा चाहते हैं कि लोग हिंदू और मुसलमान के नाम पर बंटे रहें। भाजपा अब सांप्रदायिक आधार पर राज्यों को बांटने की कोशिश कर रही है। गोरखालैण्ड, त्रिपुरा में अलग राज्य की मांग, कश्मीर घाटी में अशांति भाजपा की राजनीति के जीवंत उदाहरण है।


धर ने दोहराया कि भाजपा और प्रधानमंत्री कार्यालय त्रिपुरा में प्रस्तावित रोड और रेल रोको आंदोलन में शामिल है। वह सांप्रदायिक आधार पर राज्य के बंटवारे के लिए दबाव बनाने की कोशिश के तहत ये सब कर रही है। भाजपा त्रिपुरा में हिंदुओं और मुस्लिमों, आदिवासियों और गैर आदिवासियों के बीच सौहार्द और भाईचारे के खिलाफ बेईमान राजनीति कर रही है।


धर ने आरोप लगाया कि आईपीएफटी के प्रमुख एन.सी.देबबर्मा ने सिम्ना-तमाकरी उप चुनाव में भाजपा से घूस ली थी। इसके चलते उन्हें पार्टी से निलंबित भी किया गया था। अब वह राज्य में अशांति पैदा करने के लिए भाजपा के इशारों पर खेल रहे हैं। उनके बयान से साफ है कि नाकेबंदी का कार्यक्रम उनके लिए मजबूरी है। भाजपा की स्टेट यूनिट के प्रेसिडेंट बिप्लब देब आईपीएफटी की त्विप्रालैण्ड की मांग का विरोध किया था। हो सकता है कि राजनीतिक लाभ के लिए भाजपा और एन. देबबर्मा के बीच कोई तालमेल हुआ हो।


धर ने सीपीआई-एम और लेफ्ट फ्रंट की ओर बंदूक करने के लिए देब की आलोचना करते हुए कहा कि अगर त्विप्रालैण्ड की मांग मान ली गई तो त्रिपुरा की पहचान खतरे में पड़ जाएगी। बिप्लब देबबर्मा की आलोचना करते हुए धर ने कहा, वे राजनीति में अभी अभी आए हैं। उन्हें राज्य के राजनीतिक इतिहास के बारे में जानकारी नहीं है। अगल राज्य की मांग सीपीआई-एम के 1978 में सत्ता में आने के दो साल बाद अलगाववादी समूहों ने उठाई थी। अब आईपीएफटी जो गैर कानूनी एनएलएफटी का मास्क है, उसी लाइन पर त्विप्रालैण्ड की मांग कर रही है।