जानिए किसने कहा, त्रिपुरा में सीपीएम का अस्तित्व खतरे में

Daily news network Posted: 2017-06-16 12:47:13 IST Updated: 2017-06-16 12:47:13 IST
जानिए किसने कहा, त्रिपुरा में सीपीएम का अस्तित्व खतरे में
  • आईपीएफटी ने कहा कि सीपीएम का अस्तित्व खतरे में है इसलिए उसके नेता लोगों को गुमराह करने की कोशिश कर रहे हैं।

अगरतला।

आईपीएफटी ने सीपीएम के उन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया जो पार्टी के 10 जुलाई से रेल और नेशनल हाईवे को जाम करने के प्रस्तावित आंदोलन को लेकर लगाए गए थे। आईपीएफटी ने कहा कि सीपीएम का अस्तित्व खतरे में है इसलिए उसके नेता लोगों को गुमराह करने की कोशिश कर रहे हैं।


आईपीएफटी के प्रमुख एन.सी.देबबर्मा ने गुरुवार को अगरतला प्रेस क्लब में मीडिया को संबोधित करते हुए कहा कि स्वदेशी लोगों के विकास के प्रति नकारात्मक रूख के कारण सीपीएम धीरे धीरे ट्राइबल इलाकों में अपनी पकड़ खोती जा रही है।  पहाड़ी इलाकों के मतदाता सीपीएम को छोड़कर या तो आईपीएफटी के साथ आ रहे हैं या भाजपा की ओर जा रहे हैं। राज्यसभा सांसद के रूप में सीताराम येचुरी के कार्यकाल के समाप्त होते ही वे राष्ट्रीय स्तर पर भी अपनी महत्ता खो देंगे। अलग राज्य की मांग को लेकर आईपीएफटी 10 जुलाई से रोड और रेल रोको आंदोलन शुरू करने जा रही है। ये आंदोलन तब तक चलेगा जब तक उनकी मांग स्वीकार नहीं कर ली जाती। आईपीएफटी खासतौर पर खामतिंगबाड़ी में अपना आंदोलन चलाएगी ताकि आम लोगों को तकलीफ ना हो।


आईपीएफटी के प्रमुख ने कहा कि रोड  और रेल रोको आंदोलन का फैसला केवल हमारी पार्टी ने लिया है। इससे भाजपा का कोई लेना देना नहीं है। बकौल देबबर्मा, हमारा आंदोलन शांतिपूर्ण होगा। आंदोलन विशेष इलाके में चलेगा इसलिए हमें उम्मीद है कि इससे लोगों को कोई तकलीफ नहीं होगी। यह आंदोलन हमारे तिपरालैण्ड के लंबे मूवमेंट का हिस्सा है। पिछले साल भी हमने आंदोलन किया था। उस दौरान किसी तरह की गड़बड़ी नहीं हुई थी।


आईपीएफटी के नेताओं ने 17 मई को नई दिल्ली में प्रधानमंत्री कार्यालय में राज्य मंत्री जितेन्द्र सिंह से मुलाकात की थी। उन्होंने अपनी मांगों खासतौर पर तिपरलैण्ड की मांग को लेकर सिंह को ज्ञापन सौंपा था। देबबर्मा ने कहा, हमने अपनी मांगों के संबंध में या तो द्विपक्षी या त्रिपक्षीय मीटिंग रखने को कहा था। अगर केन्द्र सरकार हरी झंडी दे देती है तो हम अपना बेमियादी आंदोलन वापस ले सकते हैं। सीपीएम ने आरोप लगाया था कि आईपीएफटी के आंदोलन के पीछे भाजपा और प्रतिबंधित उग्रवादी संगठन एनएलएफटी का हाथ है। देबबर्मा ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि हमारा न तो पहले कभी एनएलएफटी से संबंध रहा है और न अब है। हमारा भविष्य में भी इसको लेकर कोई प्लान नहीं  है।