त्रिपुरा चुनाव: लेफ्ट का होगा सफाया, बीजेपी की बनेगी सरकार ?

Daily news network Posted: 2018-02-15 09:24:55 IST Updated: 2018-02-15 09:24:55 IST
त्रिपुरा चुनाव: लेफ्ट का होगा सफाया, बीजेपी की बनेगी सरकार ?

त्रिपुरा में आगामी 18 फरवरी को अब तक का सबसे बड़ा चुनावी घमासान देखने को मिल सकता है। वामपंथियों के इस गढ़ में सत्ता हासिल करने के लिए पहली बार दक्षिणपंथी बीजेपी सीधे मुकाबले में नजर आ रही है। सत्ता पर काबिज होने के लिए 'लाल' और 'भगवा' के बीच जुबानी जंग भी तेज हो गई है।


पिछले 25 वर्षों से सत्ता में बरकरार वाम दल की इस चुनाव में अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ रही है। त्रिपुरा चुनाव में हार होने पर देश में वामपंथी राजनीति लगभग विलुप्ति की कगार पर पहुंच जाएगी। केरल में वामंपथी दल सत्ता में आते-जाते रहते हैं। पहले हिंदू राजा के शासन वाले इस राज्य में वाम दलों और कांग्रेस की तुलना में अब बीजेपी भी सत्ता के लिए दावेदारी कर रही है।

बीजेपी ने राज्य में कांग्रेस पार्टी को न केवल राजनीतिक गुमनामी के करीब ढकेल दिया है, बल्कि लेफ्ट को टक्कर देने में मुख्य दावेदार बन गई है। इस तथ्य को राज्य के मुख्यमंत्री माणिक सरकार ने भी कुछ समय पहले कोलकाता में सार्वजनिक रूप से स्वीकार किया था। चार बार राज्य में सत्ता संभालने वाली कांग्रेस पार्टी अब केवल नाम के विरोधी दल तक सिमट कर रह गई है।



बीजेपी से मिल रही तगड़ी चुनौती के बावजूद सीपीएम जीत को लेकर आश्वस्त है। सीपीएम के स्टेट सेक्रटरी बिजन धर ने कहा, 'यह लड़ाई साम्यवाद और सांप्रदायिकता के बीच है। यह बीजेपी और लेफ्ट को कट्टर प्रतिद्वंदी बनाता है। यह केवल त्रिपुरा की नहीं, बल्कि पूरे देशभर की लड़ाई है। अगर हम जीते तो यह लोकतंत्र की विजय होगी, जहां लोगों की अभिव्यक्ति की आजादी, धर्म और ऐसा जीवन मिलेगा जिसमें सरकार का हस्तक्षेप नहीं होगा।'


उधर, 25 वर्षों के लेफ्ट शासन को उखाड़ फेंकने के लिए बीजेपी ने कमर कस ली है। 'चलो पलटाई' के नारे के साथ बीजेपी अपने धुर विरोधी सीपीएम के साथ चुनावी नारे से लेकर पार्टी के झंडे तक लड़ाई लड़ रही है। बीजेपी के कमल निशान वाले झंडे हर उस जगह पर देखे जा सकते हैं, जहां सीपीएम के झंडे लगे हैं। बीजेपी ने त्रिपुरा में भी पीएम मोदी की लोकप्रियता को भुनाते हुए सत्ता में आने के लिए पूरा जोर लगा दिया है।


बीजेपी ने लेफ्ट मुक्त भारत का नारा दिया है और उसकी नजर आदिवासी वोटों पर है। त्रिपुरा में 30 फीसदी आदिवासी हैं और 60 में से 20 सीटें उनके लिए आरक्षित हैं। राज्य में कुल 19 आदिवासी जातियां हैं। लेफ्ट ने भी पहली बार आदिवासी वोटों के जरिए ही सत्ता का स्वाद चखा था। आदिवासियों को अपने पाले में लाने के लिए बीजेपी कई वादे कर रही है। पीएम मोदी ने भी अपनी रैली में राज्य की माणिक सरकार की जगह बीजेपी सरकार को लाने का आह्वान किया था।