त्रिपुरा ने राज्यपाल ने कहा: हिंदुओं के चिता जलाने पर भी लग सकती है रोक

Daily news network Posted: 2017-10-11 09:45:47 IST Updated: 2017-10-11 09:45:47 IST
त्रिपुरा ने राज्यपाल ने कहा: हिंदुओं के चिता जलाने पर भी लग सकती है रोक
  • त्रिपुरा के राज्यपाल तथागत राय ने विवादित बयान दिया है। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट द्वारा पटाखों पर प्रतिबंध लगाए जाने पर प्रतिक्रिया देते ट्वीट किया।

अगरतला।

त्रिपुरा के राज्यपाल तथागत राय ने विवादित बयान दिया है। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट द्वारा पटाखों पर प्रतिबंध लगाए जाने पर प्रतिक्रिया देते ट्वीट किया।  उन्होंने लिखा कि कभी दही हांडी, आज पटाखा, कल हो सकता है प्रदूषण का हवाला देकर मोमबत्ती और अवॉर्ड वापसी गैंग हिंदुओं की चिता जलाने पर भी याचिका डाल दे। बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने प्रदूषण का हवाला देते हुए दीपावली पर दिल्ली-एनसीआर में पटाखों की बिक्री पर बैन लगा दिया था।


वहीं बॉम्बे हाईकोर्ट ने महाराष्ट्र के रिहायशी इलाकों में पटाखे बेचने पर रोक लगा दी है। साथ ही प्रशासन को आदेश दिया है कि वो प्रतिबंधित इलाकों में पटाखे बेचने वालों के खिलाफ  कार्रवाई करे। हाईकोर्ट का यह आदेश पटाखा चलाने के खिलाफ  नहीं है, बल्कि सिर्फ रिहायशी इलाकों में बिक्री पर रोक के लिए है।


एक चैनल से बातचीत में तथागत राय ने साफ किया कि वो एक हिन्दू होने की वजह से सुप्रीम कोर्ट के आदेश से नाखुश हैं, क्योंकि ये समुदाय को उसके उत्सव से जुड़े एक अहम पहलू से वंचित करता है। मालूम हो कि बीजेपी नेता से राज्यपाल बने तथागत रॉय को सोशल मीडिया पर कुछ मुद्दों पर उनके हार्ड-लाइन रुख के लिए जाना जाता है। हाल में उन्होंने रोहिंग्या के लिए कचरा कहने वाला विवादित बयान दिया था।


इससे पहले सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर लेखक चेतन भगत ने भी अपनी प्रतिक्रिया दी थी। उन्होंने भी सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर नाखुशी जाहिर करते हुए पटाखों की बिक्री पर बैन लगाने को गैर-जरूरी बताया था। उन्होंने सवाल किया कि किस आधार पर किसी की परंपराओं पर बैन लगाया जा रहा है।


चेतन भगत ने एक ट्वीट में लिखा कि बिना पटाखों के बच्चों के लिए दिवाली का क्या मतलब है। लेखक ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट का बैन परंपराओं पर चोट है। उन्होंने कहा कि बैन की जगह रेगुलेशन बेहतर विकल्प हो सकता था। चेतन भगत ने मामले में अपनी नाखुशी जाहिर करने के बाद प्रदूषण नियंत्रण करने के लिए कई सुझाव भी दिए थे।



भगत ने यह भी कहा था कि केवल हिंदुओं के त्योहार पर बैन क्यों लगाने की हिम्मत क्यों दिखाई जाती है? क्या जल्द ही बकरियों की बलि और मुहर्रम के खूनखराबे पर भी रोक लगेगी? जो लोग दिवाली जैसे त्योहारों में सुधार लाना चाहते हैं, मैं उनमें यही शिद्दत खून-खराबे से भरे त्योहारों को सुधारने के लिए भी देखना चाहता हूं.'