त्रिपुरा: अलग राज्य की मांग को लेकर आंदोलन, माणिक सरकार की नींद उड़ी

Daily news network Posted: 2017-06-14 17:55:12 IST Updated: 2017-06-14 17:57:27 IST
त्रिपुरा: अलग राज्य की मांग को लेकर आंदोलन, माणिक सरकार की नींद उड़ी
  • त्रिपुरा में आदिवासियों की पार्टी कही जाने वाले आईपीएफटी ने अपनी मांगों को लेकर आंदोलन की धमकी दी है।

अगरतला। त्रिपुरा में आदिवासियों की पार्टी कही जाने वाले आईपीएफटी ने अपनी मांगों को लेकर आंदोलन की धमकी दी है। आईपीएफटी काफी समय से अलग राज्य की मांग कर रही है। सत्तारुढ़ सीपीएम ने चेताया है कि मणिपुर जैसी साजिश लेफ्ट शासित राज्य में सहन नहीं की जाएगी। त्रिपुरा में अगले साल विधानसभा चुनाव है। ाईटीएफटी ने बुधवार को घोषणा की, वह राष्ट्रीय राजमार्ग 8 को ब्लॉक कर देगी और 10 जुलाई से बेमियादी समय तक रेल की पटरियों को जाम कर देगी। राष्ट्रीय राजमार्ग-8 असम के जरिए त्रिपुरा को देश के अन्य इलाकों से जोड़ है आईपीएफटी के अध्यक्ष नरेन्द्र चंद्र देबबर्मा ने कहा, अपनी मांग के समर्थन में हम राष्ट्रीय राजमार्ग और रेलवे को 10 जुलाई से बेमियादी पीरियड तक ब्लॉक करेंगे। 23 अगस्त को इसी मुद्दे पर अगरतला में रैली आयोजित की जाएगी। 


17 मई को नई दिल्ली में हमारी प्रधानमंत्री कार्यालय में राज्य मंत्री जितेन्द्र सिंह से मुलाकात हुई थी। इस दौरान हमारी मांगों पर चर्चा हुई। मंत्री ने हमें बताया कि सरकार हमारी मांगों पर विचार करेगी। आपको बता दें कि जितेन्द्र सिंह पूर्वोत्तर क्षेत्र के विकास के राज्य मंत्री(स्वतंत्र प्रभार) भी हैं। आईपीएफटी की अलग राज्य की मांग त्रिपुरा में विधानसभा चुनाव से पहले मुख्य मद्दा बन गया है। अगले साल फरवरी में राज्य में चुनाव होने हैं। सीपीआईएम सहित ज्यादातर दलों ने मांगों को खारिज करते हुए कहा कि इस मुद्दे से शांतिपूर्ण राज्य में जातीय समस्या उत्पन्न हो सकती है। सीपीआईएम के राज्य सचिव बिजन धर ने कहा, मणिपुर विधानसभा चुनाव से महीनों पहले भाजपा ने उस समय की सत्तारुढ़ पार्टी को सत्ता से हटाने के मकसद से नगा ग्रुप को राज्य के बड़े राष्ट्रीय राजमार्ग को ब्लॉक करने के लिए उकसाया था ताकि तत्कालीन कांग्रेस सरकार के सामने विचित्र स्थिति उत्पन्न हो। मणिपुर में भाजपा के सत्ता संभालने के कुछ ही दिनों के भीतर महीनों तक चली नाकेबंदी वापस ले ली गई। 


धर ने कहा, भाजपा मणिपुर में सफल हो सकती है लेकिन त्रिपुरा में लेफ्ट फ्रंट की सरकार को हटाने की साजिश में सफल नहीं होगी। सीपीआईएम की केन्द्रीय समिति के सदस्य धर ने कहा कि 1988 में तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार ने पूर्व उग्रवादी संगठन त्रिपुरा नेशनल वॉलंटियर्स(टीएनवी) के साथ मिलकर साजिश रची थी। उस वक्त नृपेन चक्रवर्ती राज्य के मुख्यमंत्री थे। उनके नेतृत्व वाला लेफ्ट फ्रंट सरकार को हटा दिया था। 1988 के विधानसभा चुनाव से पहले टीएनवी ने 100 लोगों की हत्या कर दी थी। उस समय केन्द्रीय मंत्री संतोष मोहन देव के नेतृत्व वाली कांग्रेस ने तत्कालीन लेफ्ट फ्रंट सरकार को जबरन हटाने से पहले बड़ा आंदोलन किया था। सीपीएम नेता ने चेताया कि त्रिपुरा के लोग सत्तारुढ़ लेफ्ट फ्रंट सरकार के खिलाफ किसी भी साजिश की अनुमति नहीं देंगे।