त्रिपुरा: स्कूल का फरमान, महिला टीचर ना पहनें सलवार कमीज

Daily news network Posted: 2017-07-17 12:51:34 IST Updated: 2017-07-17 12:51:34 IST
त्रिपुरा: स्कूल का फरमान, महिला टीचर ना पहनें सलवार कमीज
  • उत्तर त्रिपुरा जिले के एक स्कूल ने महिला शिक्षिकाओं को स्कूल टाइमिंग के दौरान सलवार कमीज नहीं पहनने को कहा

अगरतला।

त्रिपुरा के एक स्कूल ने महिला शिक्षिकाओं के लिए ड्रेस कोड तय किया है। उत्तर त्रिपुरा जिले के एक स्कूल ने महिला शिक्षिकाओं को स्कूल टाइमिंग के दौरान सलवार कमीज नहीं पहनने को कहा है। स्कूल ने महिला शिक्षिकाओं को पारंपरिक ड्रेस पहनने की सलाह दी है।



गार्जियंस के जबरदस्त दवाब में कंचनपुर हायर सैकेण्डरी स्कूल के प्रधानाध्यापक भारत भूषण चकमा ने अपने फीमेल टीचिंग स्टाफ को ड्रेसिंग स्टाइल में बदलाव के लिए कहा है। चकमा ने कहा, बच्चों के गार्जियन ने स्कूल में कुछ महिला शिक्षिकाओं के ड्रेसिंग सेंस को लेकर शिकायत की थी। मैंने इस मामले को वरिष्ठ शिक्षकों के समक्ष उठाया। इसके बाद स्कूल टाइमिंग के दौरान महिला शिक्षिकाओं को मौखिक रूप से पारंपरिक ड्रेस को तरजीह देने की सलाह दी लेकिन व्यक्तिगत रूप से मैं किसी के ड्रेस स्टाइल में हस्तक्षेप करने का समर्थक नहीं हूं।



स्कूल कंचनपुर सब डिवीजन में स्थित है,जिसकी सीमा मिजोरम से लगती है। कई महिला शिक्षिकाएं विभिन्न स्वदेशी समुदायों से ताल्लुक रखती है। वे सब डिवीजन की विभिन्न स्कूलों में काम करती है। बच्चों के गार्जियंस ने अन्य महिला शिक्षिकाओं के स्कूल टाइमिंग के दौरान अश्लील ड्रेस पहने को लेकर उंगली उठाई थी। नॉर्थ डिस्ट्रिक्ट एजुकेशन ऑफिसर बरुण दास का कहना है कि वह सोमवार को स्कूल के हेडमास्टर से बात करेंगे। जहां तक मुझे पता है टीचरों के लिए ड्रेस कोड को लेकर कोई सर्कुलर जारी नहीं किया गया है। हां, मैंने इस फैसले के बारे में सुना है। इस मसले पर चर्चा होगी।



गौरतलब है कि इससे पहले असम में सरकारी कर्मचारियों के लिए ड्रेस कोड लागू किया गया था। सरकार ने सभी सरकारी कर्मचारियों को पारंपरिक पोशाक में आने का आदेश जारी किया था। इसको लेकर काफी हंगामा हुआ था। हालांकि बाद में इसे स्वेच्छा के आधार पर लागू किया गया था। राज्य की संस्कृति और परंपरा को प्रमोट करने के लिए ड्रेस कोड लागू किया गया था। इसके तहत हर महीने के पहले और तीसरे शनिवार को कर्मचारियों को पारंपरिक वेशभूषा में दफ्तरों में आना होगा। सदोउ असोम कर्मचारी परिषद ने सरकार के प्रपोजल का स्वागत किया था। संगठन का कहना है कि इस फैसले से कर्मचारियों और जानजातियों के बीच डिफरेंस नजर आएगा।