त्रिपुरा के शिक्षक हुए बागी, वीसी पर लगाए भ्रष्टाचार के आरोप

Daily news network Posted: 2017-05-17 18:25:01 IST Updated: 2017-05-17 18:25:01 IST
त्रिपुरा के शिक्षक हुए बागी, वीसी पर लगाए भ्रष्टाचार के आरोप
  • त्रिपुरा विश्वविद्यालय के शिक्षकों ने कुलपति पर भ्रष्टाचार के कई आरोप लगाए है। आरोप लगाने वाले में विश्वविद्यालय के फैकल्टी सदस्यों का एक बड़ा समूह शामिल है। कुलपति पर संस्थान के अंदर वित्तीय गड़बड़ी और पक्षपात के आरोप लगाए गए हैं।

अगरतला।

त्रिपुरा विश्वविद्यालय के शिक्षकों ने कुलपति पर भ्रष्टाचार के कई आरोप लगाए है। आरोप लगाने वाले में विश्वविद्यालय के फैकल्टी सदस्यों का एक बड़ा समूह शामिल है। कुलपति पर संस्थान के अंदर वित्तीय गड़बड़ी और पक्षपात के आरोप लगाए गए हैं।



भ्रष्टाचार को लेकर शिक्षकों के द्वारा बुलाए गए संवाददाता सम्मेलन में विश्वविद्यालय के सहायक प्रोफेसर सलीम शाह ने कुलपति प्रोफेसर अंजन कुमार घोष पर 10 करोड़ रुपए की गड़बड़ी का आरोप लगाया है। 



आरोप है कि उन्होंने पुस्तकालय के लिए ई-पुस्तकों को बिना किसी निविदा के 10 करोड़ रुपए में खरीद लिया। इसके लिए न तो कई निविदा जारी की गई और न ही संबंधित विभागों को इसकी जानकारी दी गई। 



शाह ने कहा कि विश्वविद्यालय में भ्रष्टाचार की कई घटनाएं हुई हैं हमने इन मुद्दों पर बार-बार कुलपति का ध्यान आकर्षित किया है लेकिन ऐसा लगता है कि वीसी खुद कानून और यूजीसी नियमों का पूरा उल्लंघन करने में शामिल थे। 


वहीं विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग के एक शिक्षक, मिलान रानी जमैतिया ने कला और वाणिज्य के पूर्व डीन सत्यदेव पोडर को अपमानित किए जाने पर गहरा दुख व्यक्त किया।



साथ ही शिक्षकों ने छात्रों की संख्या में लगातार हो रही कमी के मुद्दे को उठाया और कहा कि वे धीरे-धीरे विश्वविद्यालय के वर्तमान परिदृश्य में गर्त की ओर ले जा रहे हैं। 



उन्होंने कहा कि छात्रों की परिषद की चुनाव के लिए कोई पहल नहीं है, जबकि सर्वोच्च न्यायालय ने मध्य विश्वविद्यालयों में निर्वाचित छात्रों की परिषद के पक्ष में अपना निर्णय दिया था।

त्रिपुरा विश्वविद्यालय के संकाय सदस्यों ने 25 जनवरी को उप-कुलपति प्रोफेसर घोष से मुलाकात कर एसोसिएट प्रोफेसर और प्रोफेसर के पदों के नियुक्ति के बारे में पूछताछ की थी।



प्राधिकरण ने दो समीक्षा समितियों का गठन किया था। समितियों ने पाया कि शिक्षकों की भर्ती प्रक्रिया में काफी गड़बड़ी है। केवल चार विषयों की समीक्षा में पाया गया कि यूजीसी नियमों और विनियमों का गंभीर उल्लंघन किया गया।



साथ ही संकाय सदस्यों के दबाव को देखते हुए जांच दल प्रमुख ने इस महीने की शुरुआत में विश्वविद्यालय के सभी पदों से इस्तीफा दे दिया था। हालांकि, उन्होंने अपना इस्तीफा वापस लिया और वहीं कुलपति द्वारा इसे स्वीकार कर लिया।



विद्रोही प्रोफेसरों ने कहा कि यूजीसी के नियमों और कानून में ऐसा कुछ भी नहीं है। वाइस चांसलर विश्वविद्यालय में अपना स्वयं का कॉर्पोरेट हाउस चला रहा है।