इस शहर में कदम रखते ही धुल जाते हैं सारे पाप

Daily news network Posted: 2018-01-14 17:11:48 IST Updated: 2018-01-14 20:28:33 IST

भारत से सबसे पुरान और पवित्र शहरों का जिक्र किया जाए तो उज्जैन

का नाम सबसे पहले आता है। यह शहर शिप्रा नदी के तट पर स्थित है। यह भव्य

कुंभ मेले का आयोजन स्थल है, जो बारह साल में एक बार आयोजित किया जाता है।

देश के प्रमुख तीर्थयात्रा स्थानों में से एक उज्जैन के उल्लेख वेद, पुराण,

रामायण और महाभारत में मिलते है। देश के बारह ज्योतिर्लिंगों में से एक

यहां बसा हुआ है। वहीं प्राचीन समय का उज्जैन, शिक्षा का एक केंद्र होने के

साथ सांदीपनी ऋषि, महान कवि कालिदास, राजा विक्रमादित्य और सम्राट अशोक की

यादों से पावन है। जानते हैं इस पावन नगरी की खासियत।

महाकाल मंदिर

उज्जैन

के के महाकालेश्वर की मान्यता भारत के प्रमुख बारह ज्योतिर्लिंगों में है।

महाकालेश्वर मंदिर का माहात्म्य विभिन्न पुराणों में विस्तृत रूप से

वर्णित है। महाकवि तुलसीदास से लेकर संस्कृत साहित्य के अनेक प्रसिध्द

कवियों ने इस मंदिर का वर्णन किया है। महाकालेश्वर की प्रतिमा दक्षिण मुखी

है। तांत्रिक परम्परा में प्रसिद्ध दक्षिण मुखी पूजा का महत्व बारह

ज्योतिर्लिंगों में केवल महाकालेश्वर को ही प्राप्त है। ओंकारेश्वर में

मंदिर की ऊपरी पीठ पर महाकाल मूर्ति की तरह यहां मंदिर में भी ओंकारेश्वर

शिव की प्रतिष्ठा है। तीसरे खण्ड में नागचंद्रेश्वर की प्रतिमा के दर्शन

केवल नागपंचमी को होते है। वर्तमान में यह मंदिर महाकाल मंदिर समिति के

तत्वावधान में संरक्षित है।

श्री बड़े गणेश मंदिर

महाकालेश्वर

मंदिर के निकट हरसिध्दि मार्ग पर बडे गणेश की भव्य और कलापूर्ण मूर्ति

प्रतिष्ठित है। इस मूर्ति का निर्माण पद्मविभूषण पंडित सूर्यनारायण व्यास

के पिता विख्यात विद्वान नारायण व्यास ने किया था। मंदिर परिसर में

सप्तधातु की पंचमुखी हनुमान प्रतिमा के साथ-साथ नवग्रह मंदिर तथा कृष्ण

यशोदा आदि की प्रतिमाएं भी विराजित हैं।

हरसिध्दि

उज्जैन

नगर के प्राचीन और महत्वपूर्ण धार्मिक स्थलों में हरसिध्दि देवी का मंदिर

प्रमुख है। चिन्तामण गणेश मंदिर से थोडी दूर और रूद्रसागर तालाब के किनारे

स्थित इस मंदिर में सम्राट विक्रमादित्य द्वारा हरसिध्दि देवी की पूजा की

जाती थी। हरसिध्दि देवी वैष्णव संप्रदाय की आराध्य रही। शिवपुराण के अनुसार

दक्ष यज्ञ के बाद सती की कोहनी यहां गिरी थी।

क्षिप्रा घाट

उज्जैन

नगर के धार्मिक स्वरूप में क्षिप्रा नदी के घाटों का प्रमुख स्थान है। नदी

के दाहिने किनारे, जहां नगर स्थित है, पर बने ये घाट काफी खूबसूरत हैं।

घाटों पर विभिन्न देवी.देवताओं के नये-पुराने मंदिर भी है। क्षिप्रा के इन

घाटों का गौरव सिंहस्थ के दौरान देखते ही बनता है, जब लाखों.करोडों

श्रध्दालु यहां स्नान करते हैं।


गोपाल मंदिर

गोपाल

मंदिर उज्जैन नगर का दूसरा सबसे बड़ा मंदिर है। यह मंदिर नगर के मध्य

व्यस्ततम क्षेत्र में स्थित है। मंदिर का निर्माण महाराजा दौलतराव सिंधिया

की महारानी बायजा बाई ने सन् 1833 के आसपास कराया था। मंदिर में कृष्ण

प्रतिमा है। मंदिर के चांदी के द्वार यहां का एक अन्य आकर्षण हैं।


कैसे पहुंचे

यहां

से निकटतम हवाई अड्डा इंदौर 58 किमी है और दिल्ली, ग्वालियर, भोपाल और

मुंबई से इंदौर के लिए नियमित उड़ानें उपलब्ध हैं। उज्जैन पश्चिम दिशा में

भोपाल-नागदा क्षेत्र में है।