उत्तराखंड में बीजेपी को बहुमत, गोवा-मणिपुर में कांग्रेस आगे

Daily news network Posted: 2017-03-11 09:13:36 IST Updated: 2017-03-11 12:26:14 IST
उत्तराखंड में बीजेपी को बहुमत, गोवा-मणिपुर में कांग्रेस आगे
  • उत्तराखण्ड विधानसभा चुनाव के अब तक के रुझानों में भाजपा को बहुमत मिल गया है। 70 विधानसभा सीटों के रुझानों में भाजपा को 37 और कांग्रेस 17 सीटों पर आगे चल रही है।

देहरादून।

पांच राज्यों के चुनावों के लिए शनिवार को हुई मतगणना के शुरुआती रुझानों के हिसाब से बीजेपी यूपी और उत्तराखंड में स्पष्ट बहुमत से सरकार बनाने जा रही है। वहीं गोवा, मणिपुर और पंजाब में कांग्रेस ने अपनी बढ़त बना ली है। उत्तराखंड में बीजेपी 54 सीटों पर आगे चल रही है। यहां कांग्रेस को 14 सीटों पर बढ़त है। वहीं दो सीटों में निर्दलीय उम्मीदवार आगे चल रहे हैं। गोवा में कांग्रेस ने 13 सीटों पर अपनी बढ़त बना ली है। 8 सीटों पर बीजेपी आगे है। मणिपुर में भी कांग्रेस 18 और बीजेपी 16 सीटों पर आगे चल रही है। बता दें कि मणिपुर की 60, गोवा की 40 और उत्तराखंड की 70 विधानसभा सीटों के लिए चुनाव हुए थे।

गौरतलब है कि उत्तराखंड में चुनाव से पहले कांग्रेस के 9 बागी विधायक बीजेपी में शामिल हो गए थे, इनमें से 7 बीजेपी के टिकट पर चुनाव भी लड़े। पिछले विधानसभा चुनाव में भी यहां दोनों पार्टियों के बीच कड़ा मुकाबला हुआ था। इस लिहाज से इस बार इन बागी विधायकों का रोल अहम हो गया था। बीजेपी को उम्मीद थी कि इन 7 विधायकों के पार्टी में आने का उसे चुनाव में पूरा फायदा मिलेगा। ज्यादातर एक्जिट पोल में बीजेपी के सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरने का अनुमान लगाया गया था। उधर, मणिपुर में बीजेपी पहली बार सभी 60 सीटों पर चुनाव लड़ी।

मणिपुर में मुख्यमंत्री ओकराम इबोबी अपनी सीट बचाने में कामयाब रहे। उन्होंने थउबल सीट से इरोम शर्मिला को हरा दिया है। यहां थउबल विधानसभा सीट पर सबसे बड़ी टक्कर मानी जा रही थी, क्योंकि इबोबी के खिलाफ आयरन लेडी मानी जाने वाली इरोम शर्मिला भी इसी सीट से लड़ रहीं थीं। वहीं उप मुख्यमंत्री गईखांगम गंगमेई नुंगबा सीट से आगे चल रहे हैं।

वहीं गोवा की बात करें तो सर्वे में सी वोटर ने गोवा की 40 सीटों में से बीजेपी को 15, कांग्रेस को 10 और आप को 7 सीटें मिलने का अनुमान जताया है, जबकि अन्य के खाते में 8 सीटें जा सकती हैं। सी वोटर सर्वे की मानें तो सूबे में सबसे बड़ी पार्टी के बहुमत से दूर रहने पर सरकार गठन में अन्य की भूमिका अहम हो सकती है।