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पहली बार हाईकोर्ट के जज के खिलाफ जमानती वॉरंट हुआ जारी

Patrika news network Posted: 2017-03-10 13:56:16 IST Updated: 2017-03-10 13:56:16 IST
पहली बार हाईकोर्ट के जज के खिलाफ जमानती वॉरंट हुआ जारी
  • सुप्रीम कोर्ट ने कलकत्ता हाईकोर्ट के जज सीएस कर्णन के खिलाफ जमानती वॉरंट जारी किया है। अदालत की अवमानना के केस में ये वॉरंट जारी किया गया है।

नई दिल्ली।

सुप्रीम कोर्ट ने कलकत्ता हाईकोर्ट के जज सीएस कर्णन के खिलाफ जमानती वॉरंट जारी किया है। अदालत की अवमानना के केस में ये वॉरंट जारी किया गया है। सुप्रीम कोर्ट ने जस्टिस कर्णन को 10 मार्च को कोर्ट में पेश होने का निर्देश दिया था।

शुक्रवार को सुनवाई के दौरान 7 जजों की बेंच के सामने जस्टिस कर्णन पेश नहीं हुए,जिसके बाद सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस जेएस खेहर की अगुवाई वाली बेंच ने जस्टिस कर्णन के खिलाफ जमानती वॉरंट जारी किया और उन्हें 31 मार्च को कोर्ट में पेश करने का निर्देश दिया। इतिहास में यह पहला मौका है जब हाईकोर्ट के सीटिंग जज के खिलाफ अवमानने के केस में सुप्रीम कोर्ट ने जमानती वॉरंट जारी किया है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि जमानती वॉरंट पश्चिम बंगाल के डीजीपी तामिल कराएं।

जस्टिस कर्णन ने 23 जनवरी को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को पत्र लिखकर सुप्रीम कोर्ट के कुछ पूर्व जजों और मद्रास हाईकोर्ट के मौजूदा जजों पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाते हुए कार्रवाई की मांग की थी। सुप्रीम कोर्ट ने इसे अवमानना का मामला माना।पीएम को लिखे पत्र में जस्टिस कर्णन ने कहा था कि नोटबंदी से भ्रष्टाचार कम हुआ है लेकिन न्यायपालिका में मनमर्जी और बेखौफ भ्रष्टाचार हो रहा है। जस्टिस कर्णन ने सुप्रीम कोर्ट के जिन पूर्व न्यायधीशों और मद्रास हाईकोर्ट के जिन मौजूदा जजों पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाए,पत्र में उन 20 जजों के नाम भी दिए थे।

उन्होंने मामले की किसी जांच किसी एजेंसी से कराने की मांग की थी। सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस कर्णन के खिलाफ मद्रास हाईकोर्ट के एक जज की पत्नी ने भी याचिका दाखिल की थी। जज की पत्नी ने आरोप लगाया कि जस्टिस कर्णन ने उनके पति पर झूठे आरोप लगाकर परिवार को परेशान किया।  सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि जस्टिस कर्णन को पेश कराने के लिए और विकल्प नहीं बचता। ऐसे में 10 हजार रुपए का जमानती वॉरंट जारी किया जाता है। 8 फरवरी को सुप्रीम कोर्ट के 7 जजों की बेंच ने अवमानना के मामले में हाईकोर्ट के सीटिंग जस्टिस को नोटिस जारी किया था। सुप्रीम कोर्ट ने जस्टिस कर्णन को निर्देश दिया था कि वे 13 फरवरी को कोर्ट के समक्ष पेश होंगे। साथ ही उन्हें जूडिशियल और एडमिनिस्ट्रेटिव काम से रोक दिया गया।

सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस जेएस खेहर,जस्टिस दीपक मिश्रा,जस्टिस जे.चेलामेश्वर,जस्टिस रंजन गोगोई, जस्टिस एमबी लोकूर,जस्टिस पीसी घोष और जस्टिस कुरियन जोसेफ ने जस्टिस करनन को अवमानना मामले में कारण बताओ नोटिस जारी किया था और कहा था कि क्यों न उनके खिलाफ अवमानना की कार्रवाई शुरू की जाए। बेंच ने मामले में स्वयं संज्ञान लिया था। अदालत ने रजिस्ट्री को निर्देश दिया था कि कोलकाता हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल के जरिए नोटिस तामिल कराएं। सुप्रीम कोर्ट ने जस्टिस कर्णन को निर्देश दिया था कि वह कोई भी जूडिशियल या फिर एडमिनिस्ट्रेटिव काम न करें। ये भी निर्देश दिया गया था कि वह तमाम जूडिशियल व एडमिनिस्ट्रेटिव फाइ रजिस्ट्रार जनरल को वापस करें।

जस्टिस कर्णन सुप्रीम कोर्ट के रजिस्ट्रार को पत्र लिखकर यह आरोप भी लगा चुके हैं दलित होने की वजह से उन पर यह एक्शन लिया जा रहा है। उन्होंने अपने पत्र में लिखा था, यह ऑर्डर(सुप्रीम कोर्ट का नोटिस)साफ तौर पर बताता है कि ऊंची जाति के जज कानून अपने हाथ में ले रहे हैं और अपने जूडिशियल पावर का गलत इस्तेमाल कर रहे हैं। यह एक एससी/एसटी जज से छुटकारा पाने के लिए किया जा रहा है। जस्टिस कर्णन 2011 में मद्रास हाईकोर्ट में जज थे। उस वक्त उन्होंने एक साथी जज के खिलाफ जातिसूचक शब्द इस्तेमाल करने की शिकायत दर्ज कराई थी। 2014 में मद्रास हाईकोर्ट के जजों की नियुक्ति को लेकर वो तब के चीफ जस्टिस के चेंबर में घुस गए और बदसलूकी की थी। जस्टिस करनन ने उन्हें मद्रास हाईकोर्ट से कलकत्ता हाईकोर्ट ट्रांसफर किए जाने पर इस मामले की खुद सुनवाई शुरू कर दी थी। बाद में इसके खिलाफ मद्रास हाईकोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट में पिटीशन लगाई थी। यह मामला अभी सुप्रीम कोर्ट में चल रहा है।