'पूर्वोत्तर राज्यों में उग्रवाद का मुकाबला नई रणनीति और पूरी क्षमता से करेंगे'

Daily news network Posted: 2017-05-17 10:41:26 IST Updated: 2017-05-17 11:39:25 IST
'पूर्वोत्तर राज्यों में उग्रवाद का मुकाबला नई रणनीति और पूरी क्षमता से करेंगे'
  • केन्द्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने पूर्वोत्तर राज्यों के उग्रवाद प्रभावित इलाकों में नई रणनीति और पूरी क्षमता से मुकाबला करने की बात कही है। उन्होंने सुरक्षा बलों के अभियान और विकास कार्यों के साझा असर को उग्रवाद पर प्रभावी नियंत्रण कर पाने की मूल वजह बताया है।

नई दिल्ली।

केन्द्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने पूर्वोत्तर राज्यों के उग्रवाद प्रभावित इलाकों में नई रणनीति और पूरी क्षमता से मुकाबला करने की बात कही है। उन्होंने सुरक्षा बलों के अभियान और विकास कार्यों के साझा असर को उग्रवाद पर प्रभावी नियंत्रण कर पाने की मूल वजह बताया है। 



पूर्वोत्तर राज्यों के मुद्दों पर मंगलावर को बैठक की अध्यक्षता करते हुए सिंह ने यह बात कही। बैठक के उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए सिंह ने कहा कि विगत वर्षों में पूर्वोत्तर राज्यों में सुरक्षा व्यवस्था में उल्लेखनीय सुधार हुआ है।

उन्होंने दावा किया कि इस क्षेत्र का ज्यादातर हिस्सा उग्रवाद से मुक्त हो चुका है और शेष बचे कुछ इलाकों में उग्रवादी संगठन लगातार कमजोर हो रहे हैं। सिंह ने कहा कि सुरक्षा बलों के प्रभावी आतंकरोधी अभियानों, स्थानीय प्रशासन के सघन विकास कार्यों और पड़ोसी देशों के साथ बेहतर रिश्तों के कारण स्थिति में काफी सुधार हुआ है। 



हालांकि उन्होंने माना कि कुछ क्षेत्रों में हथियार और उग्रवादी संगठनों की आड़ में जबरन वसूली और अपहरण जैसी घटनाअें को अंजाम दिया जा रहा है।



गृह मंत्री ने कहा, 'सरकार ने इस क्षेत्र में सड़क, रेल और हवाई यातायात, ऊर्जा और संचार सुविधाओं के लिये मूलभूत ढांचागत सुविधायें मुहैया करा कर विकास कार्य तेज करने के लिए कारगर कदम उठाए हैं। इसमें स्थानीय लोगों की भागीदारी को सुनिश्चित कर सरकार ने 'एक्ट ईस्ट पॉलिसी' को आगे बढ़ाते हुए पूर्वोत्तर के द्वार दक्षिण पूर्वी एशियाई देशों के बाजार के लिए खोल दिए हैं। सिंह ने कहा कि समूचा पूर्वोत्तर भारत न सिर्फ प्राकृतिक बल्कि मानव संसाधन के मामले में काफी समृद्ध है। इस संपदा के समुचित दोहन के लिए इस क्षेत्र में सुरक्षा एवं शांतिपूर्ण वातावरण कायम करना आवश्यक है।



इसके लिए उन्होंने लंबे समय से उग्रवाद को झेल रहे पूर्वोत्तर राज्यों में स्थानीय पुलिस को जनता का विश्वास जीतने के लिये सामान्य आपराधिक गतिविधियों को रोकने पर ध्यान केन्द्रित करने की जरूरत पर बल दिया। सिंह ने पूर्वोत्तर क्षेत्र में आपराधिक मामलों को दर्ज कराने से लेकर दोषी ठहराये जाने तक की दर बहुत कम होने पर चिंता जाहिर करते हुये कहा कि इस स्थिति से निपटने के लिए सरकारी अभियोजन पक्ष और पुलिस को मिलकर जांच के गंभीर और साझा प्रयास करने की जरूरत है। उन्होंने इसमें फॉरेन्सिक प्रयोगशालाओं के विकास पर राज्य सरकारों को गंभीर पहल करने का सुझाव दिया। 



सिंह ने पिछले कुछ सालों में उग्रवादियों के खिलाफ अभियानों के दौरान भारी मात्रा में जब्त किये गये अवैध हथियारों की धरपकड़ के लिए स्थानीय प्रशासन और पुलिस द्वारा साझा अभियान चलाने को कहा। साथ ही उन्होंने सीमावर्ती इलाकों में नशा, हथियार और नकली मुद्रा के कारोबार पर भी रोक लगाने के लिये राज्य सरकारों से पुलिस के साथ मिलकर समयबद्ध प्रभावी कार्ययोजना बना कर लागू करने को कहा। बैठक में राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल, पूर्वोत्तर मामलों के मंत्री जितेन्द्र सिंह, गृह राज्य मंत्री किरण रिजीजू और केन्द्र एवं पूर्वोत्तर राज्यों के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे।