जहां नाम से नहीं, सीटी बजाकर बुलाते हैं एक-दूसरे को

Daily news network Posted: 2018-01-07 13:53:45 IST Updated: 2018-01-07 18:34:23 IST
  • भारत में एक ऐसा गांव है, जहां लोग एक-दूसरे को नाम से नहीं बल्कि सीटी बजाकर बुलाते हैं। लोगों को बुलाने के लिए अलग-अलग स्टाइल में सीटी बजाई जाती है।

शिलॉन्ग।

भारत में एक ऐसा गांव है, जहां लोग एक-दूसरे को नाम से नहीं बल्कि सीटी बजाकर बुलाते हैं। लोगों को बुलाने के लिए अलग-अलग स्टाइल में सीटी बजाई जाती है। मेघालय के पूर्वी जिले खासी हिल्स में कांगथांन गांव है, जिसे व्हिसलिंग विलेज के नाम से भी जाना जाता है। गांव में खासी आदिवासी रहते हैं।

कांगथांन गांव के हर शख्स के दो नाम होते हैं। पहला हमारी और आपकी तरह ही साधारण नाम तथा दूसरा व्हिसलिंग ट्यून नेम। गांव के लोग साधारण नाम से बुलाने की बजाय व्हिसलिंग ट्यून नेम से ही बुलाते हैं। 

इसके लिए हर शख्स के लिए व्हिसलिंग ट्यून अलग-अलग होती है और यही अलग तरीका उनके नाम और पहचान का काम करती है। गांव में जब बच्चा पैदा होता है तो यह धुन उसको उसकी मां देती है। फिर बच्चा धीरे-धीरे अपनी धुन पहचानने लगता है। 

कांनथांन गांव में 109 परिवार के 627 लोग रहते हैं। सभी की अपनी अलग-अलग ट्यून है। यानी गांव में कुल 627 ट्यून हैं। गांव के लोग यह ट्यून प्रकृति से बनाई जाती है। कांनथांन गांव चारो तरफ से पहाड़ों से घिरा है। इसलिए गांव के लोग कोई भी ट्यून निकालते हैं तो वो कम समय में दूर तक पहुंचती है। 

यानी गांव के लोगों का बातचीत का यह तरीका भी वैज्ञानिक रूप से सही है। वक्त बदलने के साथ-साथ यहां के लोग भी बदलने लगे हैं। अब यह लोग अपने ट्यून नेम को मोबाइल पर रिकॉर्ड कर उसे रिंगटोन भी बना लेते हैं।