असम में वॉइस मैसेज के जरिए मुस्लिमों को भड़का रही है महिला पत्रकार!

Daily news network Posted: 2017-11-13 18:09:54 IST Updated: 2017-11-13 18:09:54 IST
असम में वॉइस मैसेज के जरिए मुस्लिमों को भड़का रही है महिला पत्रकार!
  • असम में एनआरसी के अंतिम प्रारुप की तैयारियां जारी है। इस बीच असम पुलिस की स्पेशल ब्रांच के उच्च पदस्थ सूत्रों से मिले इनपुट के मुताबिक कुछ निहित स्वार्थ क्षेत्र में अफवाहें फैलाकर मामले से ध्यान भटकाने की कोशिश कर रहे हैं।

गुवाहाटी।

असम में एनआरसी के अंतिम प्रारुप की तैयारियां जारी है। इस बीच असम पुलिस की स्पेशल ब्रांच के उच्च पदस्थ सूत्रों से मिले इनपुट के मुताबिक कुछ निहित स्वार्थ क्षेत्र में अफवाहें फैलाकर मामले से ध्यान भटकाने की कोशिश कर रहे हैं।


समाचार चैनल टाइम 8 के मुताबिक इस तरह की रिपोर्टें और आरोप है कि सोशल मीडिया में कुछ वॉइस मैसेज रिलीज किए गए हैं। इनमें असम की एक पत्रकार न्यायालय के विचाराधीन मामले पर बोल रही है और एनआरसी के संबंध में अफवाहें फैला रही है।


न्यायालय में विचाराधीन मामले पर बोलते हुए वॉइस नोट में यह घोषणा कर अल्पसंख्यक समुदाय को भड़काया गया है कि एनआरसी के स्टेट कॉ-ऑर्डिनेटर ने उसे बताया है कि मूल निवासियों(आई-ओ)की कैटेगरी बाद में फैक्टर होगी जब गैर मूल निवासियों को चुनाव लडऩे की अनुमति नहीं दी जाएगी क्योंकि असम इंडिजिनस सेंट्रिक स्टेट बन जाएगा।


वॉइस नोट में आरोप लगाया गया है कि मुस्लिम समुदाय को मूल निवासियों की कैटेगरी में शामिल नहीं किया गया है जबकि हिंदू-बंगाली समुदायों और टी गार्डन समुदाय को मूल निवासियों की कैटेगरी में शामिल किया गया है।


इस संबंध में एनआरसी संयोजक प्रतीक हाजेला ने कहा कि उन्होंने पत्रकार समेत किसी को भी ऐसा कुछ नहीं कहा है जैसा बताया गया है। पूरा मामला न्यायलय के विचाराधीन है। हाजेला ने कहा कि मैं यहां किसी के खिलाफ केस दर्ज कराने के लिए नहीं हूं। मैं यहां एनआरसी प्रोसेस में काम के लिए हूं।


इस मामले पर गुवाहाटी महानगर के बजरंग दल के मीडिया प्रभारी दीपज्योति दास ने कहा कि यह क्षेत्र में मुस्लिम लोगों को रेडिकलाइज करने की साजिश है। न्यायालय के विचाराधीन मामले पर कोई पत्रकार कैसे कमेंट कर सकता है? हमारे इनपुट के मुताबिक राज्य में एक बड़ी लॉबी है जो एनआरसी प्रोसेस पर फुल स्टॉप लगाने की कोशिश में है।


इस तरह की स्थिति उस वक्त भी बनी थी जब प्रदेश में कांग्रेस का राज था। एनआरसी का अंतिम प्रारुप व्यक्ति की नागरिकता के आधार पर होगा। धर्म का सवाल ही नहीं उठता। इससे पहले साल 2010 में बारपेटा पायलट प्रोजेक्ट के दौरान भी इसी तरह की स्थिति थी जब एक लॉबी ने एनआरसी प्रोसेस को पैरलाइज करने की कोशिश की थी।


अंतरराष्ट्रीय हिंदू सेना(आईएचएस) की आईटी व मीडिया सेल के प्रमुख व पब्लिसिटी सेक्रेटरी अक्षय कुमार हुजुरी ने कहा, अंतरराष्ट्रीय हिंदू सेना असम से तथाकथित पत्रकार के खिलाफ केस दर्ज कराएगी।


हमारी मांग है कि उसे तुरंत एनएसए के तहत गिरफ्तार किया जाना चाहिए। अभी तक मामला न्यायालय के विचाराधीन है और ओआई का तब तक कोई सवाल ही उठता जब त 15 नवंबर को मामले पर अंतिम सुनवाई नहीं हो जाती।


पत्रकार ने अपने वाइस नोट में खासतौर पर क्षेत्र के मुस्लिम लोगों को पोलराइज करने की कोशिश की है, जो निंदनीय है। इससे पहले असम पुलिस की स्पेशल ब्रांच के उच्च पदस्थ सूत्रों ने कहा था कि एनआरसी को राज्य के लोगों को रेडिकलाइज करने के लिए कुछ समूह मोहरे के रूप में इस्तेमाल कर रहे हैं।

PHOTO: Time8