असम: तीरंदाजी की नेशनल प्लेयर, हाईवे किनारे बेच रही है संतरे

Daily news network Posted: 2017-05-17 11:56:17 IST Updated: 2017-05-17 11:56:17 IST
असम: तीरंदाजी की नेशनल प्लेयर, हाईवे किनारे बेच रही है संतरे
  • तीरंदाजी में राष्ट्रीय स्तर पर गोल्ड मैडल जीतने वाली बुली बासुमैत्री आज हाईवे के किनारे संतरे बेचने पर मजबूर है

चिरांग।

यूं तो सरकार खेलों में बेहतरीन प्रदर्शन करने वालों के लिए सुविधाएं देने की बात करती है, लेकिन असम के चिरांग की एक नेशनल लेवल की प्लेयर सरकार के दावों की पोल खोलती है। दरअसल, तीरंदाजी में राष्ट्रीय स्तर पर गोल्ड मैडल जीतने वाली बुली बासुमैत्री आज हाईवे के किनारे संतरे बेचने पर मजबूर है। बुली कहती हैं कि मैंने कई मेडल जीते हैं, मैंने असम पुलिस में नौकरी के लिए कई बार आवेदन किया, लेकिन मुझे नौकरी नहीं मिली। मैं पिछले तीन सालों से संतरे बचे रही हूं।


 

ये राष्ट्रीय स्तर की खिलाड़ी जूनियर और सीनियर स्तर पर मेडल जीत चुकी हैं। बुली को भारतीय खेल प्राधिकरण से प्रशिक्षण प्राप्त है और नेशनल सब जूनियर आर्चरी चैंपियनशिप में दो गोल्ड मेडल और एक सिल्वर मेडल जीत चुकी हैं। वह 50 मीटर की नेशनल सीनियर आर्चरी चैंपनियशिप में गोल्ड मेडल जीत चुकी हैं इस उपलब्धि के बावजूद भी बुली बासुमैत्री को संतरे बेचने पर मजबूर होना पड़ा था। हालांकि, बुली की खबर मीडिया में आने के बाद असम के खेल मंत्री नाबा कुमार डोले ने उन्हें मिलने बुलाया था। वहां बुली को राज्य कोच के तौर पर नौकरी की पेशकश की गई है।



 

खेल मंत्री ने कहा था कि उन्होंने बुली से वादा किया है और जल्द ही अप्वाइंटमेंट लैटर मिल जाएगा। बुली को साल 2010 में चोट लगने के कारण तीरंदाजी छोडऩी पड़ी थी। वो कहती हैं कि अब नौकरी मिलने के बाद उन्हें संतरे नहीं बेचने पड़ेंगे। 28 साल की बुली दो छोटी बच्चियों की मां हैं, वह अपनी बेटियों को भी तरींदाज बनाना चाहती हैं।