अब सीरीज बराबरी पर होगी विराट एंड कंपनी की निगाहें, बन सकते हैं कई रिकॉर्ड

Daily news network Posted: 2017-03-03 15:09:04 IST Updated: 2017-03-03 15:09:04 IST
अब सीरीज बराबरी पर होगी विराट एंड कंपनी की निगाहें, बन सकते हैं कई रिकॉर्ड
  • पुणे में मिली हार और पिच विवाद की गर्मागरम बहस के बीच भारतीय क्रिकेट टीम शनिवार से यहां एम चिन्नास्वामी स्टेडियम में शुरू होने जा दूसरे टेस्ट में अच्छे प्रदर्शन के साथ आस्ट्रेलियाई क्रिकेट टीम के खिलाफ सीरीज में 1-1 की बराबरी के लक्ष्य के साथ उतरेगी।

बेंगलुरू।

पुणे में मिली हार और पिच विवाद की गर्मागरम बहस के बीच भारतीय क्रिकेट टीम शनिवार से यहां एम चिन्नास्वामी स्टेडियम में शुरू होने जा दूसरे टेस्ट में अच्छे प्रदर्शन के साथ आस्ट्रेलियाई क्रिकेट टीम के खिलाफ सीरीज में 1-1 की बराबरी के लक्ष्य के साथ उतरेगी। 



विराट कोहली की नंबर एक टेस्ट टीम को स्टीवन स्मिथ की आस्ट्रेलियाई टीम ने पुणे में हुए पहले टेस्ट में 333 रन के बड़े अंतर से हराते हुए उसका 19 टेस्टों में अपराजेय रहने का क्रम तोड़ दिया था। हालांकि घरेलू मैदान पर अविश्वसनीय खेल दिखा रही मेजबान टीम की यह हार कई मायनों में चौंकाने वाली रही थी। साथ ही पहली बार टेस्ट पदार्पण कर रही पुणे की पिच को भी आईसीसी रेफरी ने बेहद खराब करार दिया जिसके बाद भारत पर अपने ही स्पिन जाल में फंसने के आरोपों का भी सामना करना पड़ा।



फिलहाल जहां पुणे की पिच को लेकर अभी भी सवाल उठ रहे हैं तो वहीं टीम इंडिया के कोच अनिल कुंबले ने भरोसा जताया है कि चार मैचों की सीरीज में 0-1 से पिछड़ गया भारत बेंगलुरू में जोरदार वापसी करेगा। भारतीय टीम पिछली टेस्ट सीरीज में दक्षिण अफ्रीका, न्यूजीलैंड और इंग्लैंड जैसी बड़ी टीमों को हरा चुकी है, लेकिन आस्ट्रेलिया से पुणे में मिली हार ने उसकी कमियों को उजागर किया है जो अब तक नजरअंदाज हो रही थीं।



विश्व की नंबर दो टेस्ट टीम से सीरीज जीतने के लिए उसे बेंगलुरू में हर हाल में जीत दर्ज करनी होगी और इसके लिए विराट एंड कंपनी को बल्लेबाजी खासतौर पर खराब ओपनिंग, कैच टपकाने तथा खराब क्षेत्ररक्षण की कमियों में व्यापक सुधार करना होगा।



पुणे टेस्ट में भारतीय बल्लेबाजों ने निराशाजनक प्रदर्शन करते हुए पहली पारी में 105 और दूसरी पारी में 107 रन पर ही घुटने टेक दिए जबकि स्पिन से डरने वाली आस्ट्रेलियाई टीम के स्पिनरों ने भारतीय परिस्थितियों को बेहतर ढंग से भुनाते हुए मैच भी तीन ही दिन में निपटा दिया था। वहीं उसकी खराब फील्डिंग भी चर्चा का विषय रही जिसमें उसके क्षेत्ररक्षकों ने मेहमान टीम के खिलाड़ियों को कई जीवनदान दिए। पिछले 10 टेस्टों में 23 कैच टपकाने वाली टीम इंडिया ने अकेले पुणे में आस्ट्रेलिया के खिलाफ पांच कैच टपकाए जिसका उसे खामियाजा भी भुगतना पड़ा।



वहीं एक बात यह भी सामने आई कि टीम इंडिया अभी भी बोर्ड पर रन जोडऩे के लिए मुख्यरूप से कप्तान विराट पर ही टिकी हुई है। आस्ट्रेलिया से पहले लगातार चार सीरीज में दोहरा शतक बनाने वाले विराट पुणे में शून्य और 13 रन ही बना पाए थे। उनके आउट होते ही बाकी टीम भी ताश के पत्तों की तरह बिखर गई। खुद विराट ने भी मैच के बाद कहा था कि यह उनकी टीम की पिछले दो वर्षों में सबसे खराब बल्लेबाजी थी।



टीम इंडिया की हार में उसकी खराब ओपनिंग भी काफी हद तक जिम्मेदार है जिसमें मुरली विजय और लोकेश राहुल लगातार निराश कर रहे हैं। उनकी जोड़ी ने पहली पारी में ओपनिंग साझेदारी में 26 रन और दूसरी पारी में 10 रन ही जोड़े। हालांकि यह पहली बार नहीं है जब ओपनिंग जोड़ी अच्छी शुरूआत नहीं दिला सकी। बंगलादेश के खिलाफ हैदराबाद में एकमात्र टेस्ट में ओपनिंग साझेदारी में उन्होंने दो रन जोड़े थे। इससे पहले इंग्लैंड के खिलाफ पांच मैचों की सीरीज में राजकोट में खेले गए पहले टेस्ट में मुरली और गंभीर ने पहली पारी में 68 और दूसरी पारी में शून्य रन जोड़े। गंभीर इसके बाद टीम से बाहर हो गए।



विशाखापत्तनम में फिर दूसरे टेस्ट में मुरली-विजय ने पहली पारी में छह और दूसरी पारी में 16 रन की ओपनिंग साझेदारी की। इस टेस्ट में मुरली ने 20 और तीन तथा राहुल ने शून्य और 10 रन बनाए। मुरली और राहुल पिछले काफी समय से टीम को निराश कर रहे हैं और बल्ले से उनका प्रदर्शन बेहद खराब रहा है लेकिन टीम को लगातार मिल रही सफलता से उनकी गलतियां नजरअंदाज होती रही हैं। लेकिन ओपनरों की नाकामी ने टीम के बाकी खिलाड़यिों पर दबाव बनाया है। पुणे में चेतेश्वर पुजारा, अजिक्या रहाणे मध्यक्रम में जबकि निचले क्रम में रविचंद्रन अश्विन, रवींद्र जडेजा और रिद्धिमान साहा भी फेल रहे।



उम्मीद है कि इस बार भी टीम पांच गेंदबाजों के साथ उतरेगी जिसमें स्पिन की जिम्मेदारी अश्विन, जडेजा तथा जयंत पर रहेगी तथा तेज गेंदबाजी आक्रमण उमेश यादव तथा इशांत शर्मा के कंधों पर रहेगी। उमेश ने पिछले मैच में छह विकेट निकाले थे। इशांत को हालांकि एक भी विकेट हाथ नहीं लगा था लेकिन उन्होंने किफायती गेंदबाजी की थी। दुनिया के नंबर एक टेस्ट बल्लेबाज स्मिथ के नेतृत्व वाली आस्ट्रेलियाई टीम का शानदार जीत के बाद मनोबल काफी ऊंचा दिख रहा है और वह निश्चित ही बेंगलुरू में भी पूरे आत्मविश्वास के साथ उतरेगी। पुणे में गेंदबाजों के प्रहार के बावजूद भी 109 रन ठोकने वाले स्मिथ ने साबित किया था कि वह निश्चित ही श्रेष्ठ बल्लेबाज हैं।



इसके अलावा पीटर हैंसिकोंब, मैट रेनशॉ, शॉन मार्श और डेविड वार्नर जैसे अच्छे बल्लेबाज टीम के पास मौजूद हैं। आस्ट्रेलिया के सर्वश्रेष्ठ स्कोरर रहे वार्नर हालांकि पिछले मैच में 38 और 10 रन ही बना पाए थे लेकिन वह अच्छे खिलाड़ी हैं और उनपर टीम को मजबूत ओपनिंग दिलाने की जिम्मेदारी रहेगी। गेंदबाजों में निश्चित ही सभी की निगाहें एक बार फिर कीफे पर रहेंगी जिन्होंने भारतीय जमीन पर किसी विदेशी टीम के गेंदबाज का बेहतरीन प्रदर्शन किया था। कीफे के अलावा भारतीय बल्लेबाजों के लिए नाथन लियोन और तेज गेंदबाज जोश हेजलवुड भी बड़ी चुनौती रहेंगे।



ऐसे में विराट यदि बेंगलुरू में बल्लेबाजी क्रम में कुछ फेरबदल करते हैं तो यह टीम के लिए फायदेमंद हो सकता है। लेकिन कुंबले ने फिर से रहाणे पर भरोसा जताते हुए कहा है कि वह अंतिम एकादश में टीम का हिस्सा रहेंगे जिससे तिहरे शतकधारी करूण नायर को अभी भी टीम में जगह मिलती नहीं दिख रही है। रहाणे ने पुणे मैच में 13 और 18 रन बनाए थे। वहीं इस बार ओपनरों पर भी काफी दबाव रहेगा। खुद कप्तान विराट के लिए भी वापसी करते हुये टीम का मनोबल बनाये रखना चुनौती होगी। यदि गेंदबाजों की बात करें तो स्पिनरों ने पुणे में भी अपेक्षा के अनुरूप ही प्रदर्शन किया और अश्विन तथा जडेजा ने सात तथा पांच विकेट निकाले। वहीं जयंत यादव भी उपयोगी रहे थे।



यदि बेंगलुरू पिच की बात करें तो यहां स्लो टर्नर पिच की उम्मीद है जो दोनों टीमों के लिए फायदेमंद साबित हो सकती है। भारत का चिन्नास्वामी स्टेडियम में बराबरी का रिकार्ड है जहां उसने अब तक कुल 21 टेस्ट खेले हैं जिनमें से छह टेस्ट जीते हैं, छह हारे हैं और नौ टेस्ट ड्रा खेले हैं। भारत और आस्ट्रेलिया के बीच बेंगलुरू में पहली बार टेस्ट मैच सितंबर 1979 में खेला गया था जो ड्रा रहा था। इसके बाद दोनेां टीमें मार्च 1998 में भिड़ीं जिसमें आस्ट्रेलिया ने आठ विकेट से जीत हासिल की। आस्ट्रेलिया ने अक्टूबर 2004 में भी भारत को इसी मैदान पर 217 रन से हराया था। लेकिन भारत ने अक्टूबर 2010 में आस्ट्रेलिया को सात विकेट से पराजित किया।



हालांकि यह देखना दिलचस्प होगा कि इस बार स्पिनरों में अश्विन या पुणे टेस्ट के मैन ऑफ द मैच स्टीव ओ कीफे में कौन श्रेष्ठ साबित होता है। दुनिया के नंबर एक टेस्ट गेंदबाज अश्विन के बजाय पुणे की परिस्थितियों का भरपूर फायदा उठाते हुये आस्ट्रेलियाई स्पिनर कीफे ने यहां करियर का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन कर 12 विकेट निकाले थे। भारतीय कोच कुंबले ने कहा कि वह परिस्थितियों के हिसाब से गेंदबाजी क्रम का निर्णय करेंगे।