बारिश में इन जगहों पर घूमने जाएं और दिल खोलकर पार्टनर के साथ करें रोमांस

Daily news network Posted: 2017-07-12 19:41:01 IST Updated: 2017-07-12 19:41:01 IST
बारिश में इन जगहों पर घूमने जाएं और दिल खोलकर पार्टनर के साथ करें रोमांस
  • बारिश का मौसम सभी को अच्छा लगता है चाहे वो घूमने के शौकीन हो या न हो। हर कोई बारिश में भीगना चाहता है। गर्मी में हम हिल स्टेशन जाते हैं तो सर्दियों में ऐसी जगह जहां गर्म हो लेकिन बारिश में आपको जगहों की तलाश ज्यादा नहीं करनी पड़ती है।

शिलॉन्ग।

बारिश का मौसम सभी को अच्छा लगता है चाहे वो घूमने के शौकीन हो या न हो। हर कोई बारिश में भीगना चाहता है। गर्मी में हम हिल स्टेशन जाते हैं तो सर्दियों में ऐसी जगह जहां गर्म हो लेकिन बारिश में आपको जगहों की तलाश ज्यादा नहीं करनी पड़ती है।



बारिश का स्वभाव ही ऐसा है कि ये हर दिशा की दशा बदल देती है। इसलिए इस बार आप भी अपनी रोजमर्रा की दफ्तर वाली नीरस जिंदगी की दिशा बदल दीजिए और चलिए हमारे साथ ऐसी जगहों पर जहां सिर्फ बारिश होती ही नहीं बल्कि भिगोती भी है।



मेघालय

बादलों का घर कहे जाने वाले मेघालय में यूं तो मौसम 12 महीने मेहरबान रहता है लेकिन मानसून के समय मेघालय में मेघ जमकर बरसते हैं जिससे यहां की खासी, जैंतिया और गारो पहाड़ियां अपना सुरम्य दृश्य प्रस्तुत करती हैं। मेघालय की 1491 मीटर ऊंचाई वाली खासी पहाड़ियों की मंत्रमुग्ध कर देने वाली हरियाली छटा से ढका है 'मासिनराम'। दुनिया में सबसे ज्यादा बारिश वाले इलाके की वजह से गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में मासिनराम का नाम है।

यही कारण है कि इसका हरा रंग कभी फीका नहीं पड़ता। पहाड़ी में वर्ष भर झरनों की कल-कल, चारों तरफ घने जंगल और पहाड़ी के नीचे बनी चूने की गुफाएं आपको अपनी ओर आकर्षित करती हैं।



चेरापूंजी(सोहरा)

मासिनराम के पूर्व में छिपा सौंदर्य का एक और खजाना है चेरापूंजी। मासिनराम के बाद चेरापूंजी में ही सबसे अधिक वर्षा होती है। चेरापूंजी अपने सुंदर झरनों औपर वनस्पति के लिए जाना जाता है। चेरापूंजी में प्राकृतिक सौंदर्य कूट-कूटकर भरा है तो कुदरत की हर कलाकृति के पीछे एक रहस्य भी है और इस रहस्य को जानने का सफर भी काफी रोमांच से भरा पड़ा है। यहां नोहकलिकाई झरना, माउलंग सीम पीक झरना, मौसमाई गुफाएं प्रकृति की उत्कृष्टता का शानदार उदाहरण हैं।

फूलों की घाटी

फूलों की सुंदरता किसे नहीं पसंद। घर में खिला एक फूल भी हमें अपनी ओर आकर्षित कर लेता हैं। सोचिए अगर आपको अलग-अलग किस्म के लाखों फूल एक साथ देखने मिल जाएं तो वो नजारा किसी स्वर्ग लोक से कम नहीं होगा।



बारिश में पुष्प श्रृंगार करती हिमालय की ये घाटी उत्तराखंड के घाघरिया में है। चारों तरफ ऊंची-ऊंची श्रृंखलाओं के बीच बिछी फूलों की चादर और इसकी खुशबू पर्यटकों का मन मोह लेती है।


10 किलोमीटर लंबी और 2 किलोमीटर चौंड़ी इस घाटी में जुलाई-अगस्त में पैंडीकुला, ग्रैंडीफ्लोरा, लिंगुलारिया, जंगली गुलाब, लिली, सनफ्लावर, मैरीगोल्ड, कोबरा लिली, बटरकप, कमल और भी न जाने कितनी किस्मों के फूलों की सौगात घाटी में रंगत बिखेर देती है। यहां कस्तूरी मृग, स्नो लेपर्ड, भालू आसानी से देखे जा सकते हैं।



चारों तरफ घाटी में सुशोभित फूल, घाटी के बीच बहती पुष्पावती नदी, बारिश की बूंदे, आस-पास बहते नाले और फूलों पर मंडराती अनेक तितलियां, नजारा इतना खूबसूरत की आपकी आंखें बिना थके घंटो निहार सकती हैं। घाटी में पहले इस सौंदर्य को यूनेस्को ने वर्ल्ड हेरिटेज में शामिल किया है।



वेली ऑफ फ्लावर्स पहुंचने के लिए ऋषिकेश और हरिद्वार से गोविंदघाट तक टैक्सी से पहुंचा जा सकता है। इसके बाद 13 किलोमीटर की पैदल यात्रा कर घाघरिया पहुंचते हैं। घाघरिया से घाटी की दूरी 4 किलोमीटर है। वैली ऑफ फ्लावर्स नेशनल पार्क अप्रैल से अक्टूबर महीने तक खुला रहता है।



केरल का स्वर्ग(मुन्नार)

12 हजार हेक्टेयर में फैले चाय का विस्तृत बागान का सौंदर्य है केरल के इडुक्की में बसा पहाड़ी पर्यटन स्थल मुन्नार। शुद्ध हवा और चाय की खुशबू आपको मुन्नार में हर पल ताजगी भरी सुबह का एहसास कराती है। घुमावदार सड़कें, ऊंचे-ऊंचे पेड़, घने जंगलों में पसरा सन्नाटा जो बहुत कुछ कहता है। पहाड़ों पर बादलों का डेरा, झील, झरनों से सराबोर मुन्नाह सैलानियों को संबोहित कर देता है। मुन्नार मुधिरापुझा, नल्लठन्नी और कुंडाली के मुहाने पर स्थित है। 


एराविकुलम नैशनल पार्क-97 स्क्वायर किलोमीटर में फैला ये पार्क नीलकुरूंजी फूल के लिए मशहूर है। जो 12 वर्ष में एक बार ही खिलते हैं। 2018 में ये फूल खिलेगा। इसके अलावा कई जंगली जानवर आपको यहां दिखाई देंगे। इस पार्क के अंदर अनामुड़ी पीक है जो सिल्वर ओक के वृक्षों से ढकी हैं। इन पेड़ो का इस्तेमाल माचिस और अगरबत्ती बनाने में होता है।

हरियाली का हब-अगुम्बे(कर्नाटक)

दक्षिण भारत का चेरापूंजी है कर्नाटक का अगुम्बे। शिमोगा के तीर्थहल्ली में बसे इस हरियाली हब में इंसान कम जीव-जंतु, झरने, घने वन ज्यादा हैं जो यहां आने वाले लोगों का मन जीत लेते हैं। यहां इंसानी आबादी 500 से भी कम है। जड़ी-बूटियां और वनस्पति की बहुतायत होने के कारण सरकार ने यहां अगुम्बे रेन फॉरेस्ट रिसर्च स्टेशन की स्थापना की है। रोमांच पसंदीदा यहां ट्रैकिंग के लिए आते हैं।

सबसे जहरीला और खतरनांक सांप किंग कोबरा का घर है अगुम्बे। अगुंम्बे में ओनांक झरना, 826 फीट ऊंचा जोगीगुंडी झरना, 126 फीट ऊंचा कोडलु तीर्था झरने हैं जो आकर्षण का केंद्र हैं।