30 दिन में सेटल करें हेल्‍थ पॉलिसी क्‍लेम, आरईआरडीएआई ने जारी किया नोटिफिकेशन

Daily news network Posted: 2017-07-15 21:24:24 IST Updated: 2017-07-15 21:24:24 IST
30 दिन में सेटल करें हेल्‍थ पॉलिसी क्‍लेम, आरईआरडीएआई ने जारी किया नोटिफिकेशन
  • इंश्‍योरेंस कंपनियों को हेल्‍थ पॉलिसी क्‍लेम को अब महज 30 दिन के भीतर निपटाना होगा। कंपनियों ने अगर ऐसा नहीं किया, तो उन्‍हें बैंक रेट के हिसाब से इंटरेस्‍ट देने के अलावा क्‍लेम अमाउंट पर 2 फीसदी देना होगा।

नई दिल्ली

इंश्‍योरेंस कंपनियों को हेल्‍थ पॉलिसी क्‍लेम को अब महज 30 दिन के भीतर निपटाना होगा। कंपनियों ने अगर ऐसा नहीं किया, तो उन्‍हें बैंक रेट के हिसाब से इंटरेस्‍ट देने के अलावा क्‍लेम अमाउंट पर 2 फीसदी देना होगा। इंश्‍योरेंस रेग्‍युलेटर आईआरडीएआई ने इंश्‍योरेंस कंपनियों को इस संबंध में निर्देश जारी किए हैं।

आरईआरडीएआई ने जारी किया नोटिफिकेशन

आईआरडीएआई ने कहा कि रेग्‍युलेटर इस निर्देश के जरिए पॉलिसीहोल्‍डर के हितों की रक्षा करना चाहता है। रेग्‍युलेटर ने नोटिफिकेशन जारी कर कहा है कि इंश्‍योरर को जरूरी डॉक्‍युमेंट्स प्राप्‍त होने की तारीख से 30 दिन के भीतर पॉलिसी क्‍लेम का निपटारा करना होगा। अगर ऐसा नहीं होता है, तो इंश्‍योरर को क्‍लेम पर बैंक रेट से 2 फीसदी ज्‍यादा इंटरेस्‍ट देना होगा और यह इंटरेस्‍ट सभी जरूरी डॉक्‍युमेंट्स मिलने की तारीख से लेकर क्‍लेम सेटल होने तक देना होगा।

पॉलिसीहोल्‍डर के हितों की रक्षा करना है मकसद

इंश्‍योरेंस रेग्‍युलेटर एंड डेवलपमेंट अथॉरिटी ऑफ इंडिया (आईआरडीएआई) ने कहा कि इस नोटिफिकेशन का मुख्‍य लक्ष्‍य पॉलिसीहोल्‍डर के हितों की रक्षा करना है। साथ ही इसके जरिए शिकायतों का जल्‍द निपटारा करना भी है। आईआरडीए ने आगे कहा है कि जिन मामलो में इंश्‍योरर को जांच करने की जरूरत है,तो ऐसे मामलों की जांच जरूरी डॉक्‍युमेंट मिलने की तारीख से अगले 30 दिनों के भीतर पूरी हो जानी चाहिए। ऐसे मामलों में इंश्‍योरर को जरूरी डॉक्‍युमेंट मिलने के दिन से 45 दिनों के भीतर मामले का निपटारा करना होगा। ऐसा नहीं किया तो यहां भी बैंक रेट के ऊपर 2 फीसदी ज्‍यादा इंटरेस्‍ट रेट देना होगा।

वेबसाइट पर देने होंगे अपडेट्स

इसके अलावा इंश्‍योरर को सर्विस पैरामीटर्स और टर्नअराउंड टाइम को भी अपनी वेबसाइट पर भी दिखाना होगा। यह बोर्ड से अप्रूव होने के बाद ही अपडेट किया जाना चाहिए। जब भी पैरामीटर्स बदलेंगे, तो उन्‍हें उसके हिसाब से अपडेट करना होगा। इसके अलावा उन्‍हें इंश्‍योरेंस प्रोडक्‍ट में होने वाले एड ऑन्‍स के बारे में भी बताना होगा।