अंतर्राष्ट्रीय पुष्कर मेले में आपको नजर आएगी पारंपरिक छटा, है धार्मिक महत्व

Daily news network Posted: 2017-10-28 16:48:59 IST Updated: 2017-10-28 16:48:59 IST
अंतर्राष्ट्रीय पुष्कर मेले में आपको नजर आएगी पारंपरिक छटा, है धार्मिक महत्व
  • पुष्कर राजस्थान राज्य में स्थित एक महत्वपूर्ण तीर्थ स्थान माना जाता है। यह विशेष रूप से इसलिए भी प्रसिद्ध है क्योंकिं यंहा पर पूरी दुनिया में स्थित एकमात्र ब्रह्मा मंदिर है।

पुष्कर राजस्थान राज्य में स्थित एक महत्वपूर्ण तीर्थ स्थान माना जाता है। यह विशेष रूप से इसलिए भी प्रसिद्ध है क्योंकिं यंहा पर पूरी दुनिया में स्थित एकमात्र ब्रह्मा मंदिर है। अजमेर से लगभग 11 किमी दुरी पर पुष्कर में हर वर्ष मेले का आयोजन किया जाता है। यह मेला कार्तिक पूर्ण‍िमा के दिन से लगता है और सात दिनों तक चलता है। पुष्कर मेले के नाम से प्रसिद्ध इस मेलें में देश-विदेश से हजारों की संख्या में पर्यटक आते हैं।

पुष्कर में लगने वाला ये ऊंट मेला अपने आप में एक अनूठा मेला तो है ही साथ में सबसे बड़े पशु मेलें के रूप में प्रसिद्ध है। मेले के समय यंहा संस्कृति का अध्बुत मिलन दर्शनीय होता है। एक तरफ यंहा पर बड़ी संख्या में विदेशी और देशी सैलानी पहुंचते हैं और दूसरी तरह राजस्थान और आसपास के आदिवासी और ग्रामीण लोग अपने पशुओं को लेकर मेलें में आते हैं। रेत के विशाल मैदान पर होने वाले मेलें में ऊंटो की संख्या अधिक रहती थी पर अब लोग इनके अलावा अन्य मवेशोयों को लेकर भी मेलें में आते हैं। 

सैलानियों को जंहा इन पर सवारी का लुत्फ मिलता है वही साथ ही लोक संस्कृति व संगीत का शानदार नज़ारा किसी भी पर्यटक के लिए यादगार होता है। पुष्कर को इस क्षेत्र में तीर्थराज कहा जाता है और पुष्कर मेला राजस्थान का सबसे बड़ा मेला माना जाता है। मेले स्थल से परे पुष्कर नगरी का वातावरण एक तीर्थनगरी सा हो जाता है। कार्तिक पूर्णिमा में स्नान का विशेष महत्व होने से यंहा पर साधु-संत बड़ी संख्या में नजर आते हैं। वैसे तो मेले की शुरुवात में पशुओं की खरीद-फरोख्त पर जोर रहता है लेकिन पूर्णिमा के पास नगरी में आस्था और उल्लास का अनोखा संगम देखा जा सकता है। 

श्रद्धालुओं का सरोवर में स्नान का सिलसिला पूर्णिमा वाले दिन चरम पे होता है और धार्मिक गतिविधियाँ का जोर बढ़ जाता है। पुष्कर का मेला बहुत प्रसिद्ध है और भारत की ऐतिहासिक धरोहरों का दर्जा जो पर्यटकों के लिए हैं वही महत्व इस पुष्कर मेले और यंहा होने वाले अन्य त्योहारों का है। 

मेलें के कुछ खास आकर्षणों में यंहा होने वाले सांस्कृतिक कार्यक्रम होते हैं। पारम्परिक लोक नृत्य, लोक संगीत, घूमर, गेर, मांड और सपेरा जैसे लोक नृत्य देख के पर्यटक भी झूमने को मजबूर हो जाते हैं। संध्या आरती के समय दीपदान किया जाता है जिसमे पत्तों को जोड़कर और उनमे फूल और दीप रखकर जल में प्रवाहित किया जाता है। इस तरह आप जल में तैरते सैंकड़ो दीपक सरोवर में देख सकते है जो टिमटिमाते सितारों से भी खूबसरत लगते हैं। पुष्कर मेले में देश विदेश से आने वाले सैलानियों की संख्या बहुत अधिक होती है और यही कारण है के बहुत बार रहने की व्यवस्था कम पड़ जाती है। इसलिए राजस्थान पर्यटक विभाग द्वारा विशेष रूप से पर्यटक गांव बनाया जाता है। इसमें तम्बू में रहने की व्यवस्था होती है और सभी जरुरी सुविधाएं मिलती है। 


पशु मेला में ऊंट सबसे ज्यादा आकर्षण का केंद्र होते हैं। श्रेष्ठ नस्ल के पशुओं को पुरस्कृत किया जाता है। मेले के दिनों में ऊंटों व घोडों की दौड खूब पसंद की जाती है। सबसे सुंदर ऊंट व ऊंटनी को पुरस्कृत किया जाता है। दिन में लोग जहां पशुओं के विभिन खेलों और नस्लों को  देखते रहते हैं, तो वहीं शाम का समय राजस्थान के लोक नर्तकों व लोक संगीत का होता है। कला संस्कृति तथा पर्यटन विभाग सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयाजन करते हैं। साथ ही इस मेले में मौता कुआं, सर्कस, निशाने बाजी से लेकर अनेक कलाकृतियों तक के स्टॉल लगते हैं।

मेले में देशी-विदेशी सभ्यता और संस्कृति का संगम बहुत आकर्षक लगता है। एक ओर जहां हजारों की संख्या में विदेशी सैलानी आते है तो दूसरी ओर आसपास के तमाम राज्यों के आदिवासी और ग्रामीण भी इसमें भाग लेते हैं। रंग बिरंगे परिधानों- कुर्ती, कांचली, लहंगा, आंगी, डेवटा, पल्ला, चुनड़ी, पोमचा, बेस और जरी के कपड़े पहने ग्रामीण महिलाएं अपनी भाषा के गीत गाती है। जैसा की बताया गया के इस नगरी और मेले का विदेशी सैलानियों में लिए भी विशेष महत्व है।

वैसे तो पुष्कर की छोटी सी नगरी में अनेक मंदिर है लेकिन प्रमुख मंदिरों से ब्रह्मा का 14वीं सदी में बनाया गया प्रमुख है। भारत में स्थित यह एकमात्र ब्रम्हा का मंदिर है और हिन्दू धर्म में इसका विशेष महत्व है। पुष्कर में एक प्रसिद्ध मंदिर विद्या की देवी सरस्वती का भी है और इनके अलावा यहां बालाजी मंदिर, मन मंदिर, वराह मंदिर, आत्मेश्वर महादेव मंदिर आदि भी श्रद्धा के प्रमुख केंद्रों में से हैं। 

यहां आने वाले लोग कहते हैं कि पुष्कर नगरी में एक जादू है जो लोगों को खींचता है। खास तौर पर मेले के समय यहां आना एक यादगार अनुभव है। एक ऐसा अनुभव जो अगर मौका मिले तो किसी हाल में चूकना नहीं चाहिए। तो फिर देर किस बात की है, अंतर्राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त पुष्कर मेला का शनिवार को झंडारोहण के साथ विधिवत रूप से शुभारंभ हो चुका है।