असम के किन्नरों में आखिर क्यों फैला खौफ...जानिए पूरा मामला

Daily news network Posted: 2018-01-12 12:50:57 IST Updated: 2018-01-12 12:50:57 IST
  • एनआरसी प्रक्रिया से ना सिर्फ आम लोगो में टेंशन का माहौल है बल्कि एक प्रक्रियां में किन्नर समुदाय भी खासा डरा हुआ है, असम में अवैध रूप से रह रहे बांग्लादेशी नागरिकों की पहचान के लिए अपडेट की जा रही

एनआरसी प्रक्रिया से ना सिर्फ आम लोगो में टेंशन का माहौल है बल्कि एक प्रक्रियां में किन्नर समुदाय भी खासा डरा हुआ है, असम में अवैध रूप से रह रहे बांग्लादेशी नागरिकों की पहचान के लिए अपडेट की जा रही राष्ट्रीय नागरिक पंजीकरण यानी एनआरसी की पहली ड्राफ्ट सूची में कई ट्रांसजेंडर्स के नाम नहीं आए हैं और उनके सामने अपनी नागरिकता गंवाने का संकट खड़ा हो गया है.


इन ट्रांसजेंडर्स में से अधिकतर को उनके परिवार ने घर से निकाल दिया है जबकि कई ने समाज में अपमान की वजह से घर छोड़ दिया है. ऐसे में इनके पास अपनी नागरिकता से जुड़े पर्याप्त दस्तावेज़ नहीं हैं. लिहाजा कई ट्रांसजेंडर्स ख़ास तौर से जो मुसलमान या फिर बंगाली समुदाय से हैं, एनआरसी को लेकर काफी डरे हुए हैं ट्रांसजेंडरों के लिए काम कर रहे गैर सरकारी संगठन के प्रमुख आशीष कुमार डे का कहना है, "अधिकतर ट्रांसजेंडरों का नाम मतदाता सूची में ही नहीं है."


"इसलिए जो लोग एनआरसी के काम को लेकर सर्वे कर रहे थे वे इन लोगों तक पहुंचे ही नहीं. इसकी एक वजह यह भी है कि जब कोई भी ट्रांसजेंडर अपना घर छोड़कर ट्रांसजेंडरों की समुदाय में शामिल होता है तो वहां के गुरु उनका नाम बदलकर अलग नाम रख देते है और उनके पुराने नाम से कोई मतलब नहीं रहता." हालांकि एनआरसी का काम देख रहे अधिकारी ने कहा कि वह इस समस्या का हल निकालेंगे