भारत में नौ प्रमुख कंपनियों के सिर्फ 18 प्रतिशत खाद्य उत्पाद ही सही

Daily news network Posted: 2017-03-19 13:10:26 IST Updated: 2017-10-11 15:57:25 IST
भारत में नौ प्रमुख कंपनियों के सिर्फ 18 प्रतिशत खाद्य उत्पाद ही सही
  • पोषक तत्वों के लिहाज से देश में नौ प्रमुख कंपनियों के महज 12 प्रतिशत पेय और 18 प्रतिशत खाद्य उत्पाद ही खरे साबित हुए हैं और बाकी सभी उत्पादों में इनका स्तर तय मानकों से काफी नीचे पाया गया है। ये बात एक सर्वेक्षण में सामने आई है।

नई दिल्ली।

पोषक तत्वों के लिहाज से देश में नौ प्रमुख कंपनियों के महज 12 प्रतिशत पेय और 18 प्रतिशत खाद्य उत्पाद ही खरे साबित हुए हैं और बाकी सभी उत्पादों में इनका स्तर तय मानकों से काफी नीचे पाया गया है। ये बात एक सर्वेक्षण में सामने आई है।



सामाजिक सरोकारों के लिए काम करने वाली गैर सरकारी संस्था 'बिल एंड मिलिंडा गेट्स फांउडेशन' की वित्तीय मदद से एक डच कंपनी 'एक्सेस टू न्यूट्रीशन फाउंडेशन' की ओर से कराए गए ताजा सर्वेक्षण में देश में खाद्य उत्पाद बनाने और बेचने वाली शीर्ष नौ कंपनियों के उत्पादों की 'भारतीय खाद्य सुरक्षा एंव मानक प्राधिकरण' द्वारा तय मानकों के आधार पर तैयार एक इंडेक्स पर जांच की गई।


इनमे सबसे चौंकाने वाली बात यह पाई गई कि इन कंपनियों के महज 12 प्रतिशत पेय उत्पाद और 18 प्रतिशत खाद्य उत्पादों में ही भरपूर पोषक तत्व पाए गए बाकी सभी उत्पाद तय मानकों पर खरे नहीं उतरे। पोषक तत्वों के लिहाज से मदर डेयरी के उत्पाद पहले स्थान पर रहे जबकि अमूल दूसरे स्थान पर, हिन्दुस्तान यूनीलीवर और ब्रिटानिया के उत्पाद क्रमश: तीसरे और चौथे स्थान पर, पार्ले पांचवें, कोका कोला छठे, नेस्ले सातवें, पेप्सीको आठवें और मोंडेलेज इंडिया नौवें स्थान पर रहे।


सर्वेक्षण के ये नतीजे देश मे पांच साल से कम आयु वर्ग के बच्चों की एक बड़ी आबादी में कुपोषण तथा एक बड़े वर्ग में मोटापे के बढ़ रही समस्या से निबटने की बड़ी चुनौती के संदर्भ में काफी अहमियत रखते हैं। ये नतीजे खाद्य पदार्थ बनाने वाली इन कंपनियों द्वारा विज्ञापनों में किए जाने वाले उन दावों को भी झुठलाते हैं कि उनके उत्पाद पोषक तत्वों से भरपूर हैं।

राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण 2015-16 के अनुसार पोषक आहार नहीं मिल पाने के कारण देश में पांच साल से कम आयु वर्ग के करीब 38.4 प्रतिशत बच्चों का पूरा शारीरिक विकास नहीं हो पाता। दूसरी तरफ भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद् की 2015 की रिपोर्ट में देश में मोटापे से ग्रस्त लोगों की संख्या 13 करोड़ पचास लाख बताई गई है।



सर्वेक्षण में कंपनियों के उत्पादों को सिर्फ पोषक तत्वों के लिहाज से ही नहीं बल्कि उनकी उत्पादक नीतियों तथा राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उनके कारोबारी तरीकों के आधार पर भी आंका गया। सरकार ने कुपोषण की समस्या से निबटने के लिए पोषक तत्वों को उत्पादों में अतिरिक्त रूप से शामिल किए जाने की नीति बनाई है। इसका मकसद देश की बड़ी आबादी को कम कीमतों पर विटामिन और खनिजों से भरपूर पोषक युक्त आहार उपलब्ध कराना है।

ऐसे समय में जब देश में डिब्बा और पैकेट बंद खाद्य पदार्थों का चलन पूरे देश में तेजी से बढऩे लगा है, ऐसे उत्पादों में पोषक तत्वों की अनिवार्यता अहम है। सर्वेक्षण में इस बात की जांच भी की गई कि खाद्य उत्पाद बनाने वाली कंपनियां उत्पादन प्रक्रिया में अतिरिक्त पोषक तत्वों को शामिल करने के लिए क्या कदम उठा रही हैं। इस मामले में नेस्ले इंडिया सबसे आगे पाई गई। सर्वेक्षण के अनुसार ज्यादातर कंपनियों ने डेयरी उत्पादों में विटामिन ए, डी और सी को शामिल किया है लेकिन अन्य खाद्य उत्पादों में इनका अंश कम ही पाया गया।



खासतौर से इनमें आयरन की कमी देखी गई जबकि भारत में लोगों में आयरन की कमी के मामले दुनिया में सबसे ज्यादा हैं। सर्वेक्षण रिपोर्ट में कंपनियों को दिए सुझाव में कहा गया है कि वे अपने खाद्य उत्पादों को पोषक तत्वों से भरपूर बनाने की प्रक्रिया में मुनाफा कमाने की न सोचें और न उत्पादों का मूल्य बढ़ाएं ताकि बड़ी आबादी को पोषक खाद्य पदार्थ कम मूल्य पर उपलब्ध हो सकें।